पीएम मोदी का इजरायल दौरा: जन्मदिन और राजनयिक संबंधों का खास कनेक्शन

प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली संसद में बताया कि 17 सितंबर 1950 को उनके जन्म के दिन ही भारत ने इजरायल को मान्यता दी थी। जानें उनके भाषण की मुख्य बातें।

Feb 25, 2026 - 22:35
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पीएम मोदी का इजरायल दौरा: जन्मदिन और राजनयिक संबंधों का खास कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद 'नेसेट' (Knesset) में अपने संबोधन के दौरान भारत और इजरायल के बीच गहरे ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और ऐतिहासिक संयोग का उल्लेख किया, जिसने दोनों देशों के बीच के रिश्तों को एक नई भावनात्मक गहराई प्रदान की। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बताया कि उनके जन्म की तिथि और भारत द्वारा इजरायल को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की तिथि एक ही है।

ऐतिहासिक संयोग: जन्मदिन और इजरायल को मान्यता

प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके जीवन और भारत-इजरायल के बीच के राजनयिक संबंधों में एक अटूट जुड़ाव है और उन्होंने बताया कि 17 सितंबर 1950 को जब उनका जन्म हुआ था, ठीक उसी दिन भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इजरायल को मान्यता प्रदान की थी। प्रधानमंत्री ने इसे एक सुखद संयोग बताते हुए कहा कि इस भूमि से उनका लगाव स्वाभाविक है। उन्होंने याद दिलाया कि 9 साल पहले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में इजरायल की यात्रा पर आए थे और इस ऐतिहासिक भूमि पर दोबारा लौटना उनके लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है।

हमास के हमलों पर संवेदना और एकजुटता

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमास के आतंकवादी हमलों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने भारत की ओर से उन सभी परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने इस बर्बर हमले में अपने प्रियजनों को खोया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत इस कठिन समय में इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या और उनके जीवन की तबाही को किसी भी आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत ने इस संकट की घड़ी में इजरायल के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और समर्थन को दोहराया है।

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के कड़े रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी तर्क या वजह से जायज नहीं ठहराया जा सकता। भारत स्वयं दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है और इसके परिणामों को भली-भांति समझता है। उन्होंने 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस हमले में इजरायली नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई थी। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और इसमें किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं है।

वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई का आह्वान

आतंकवाद के वैश्विक प्रभाव पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य समाज को अस्थिर करना, विकास की गति को रोकना और आपसी भरोसे को नष्ट करना है और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ निरंतर और समन्वित वैश्विक कार्रवाई करने की अपील की। प्रधानमंत्री के अनुसार, दुनिया के किसी भी कोने में होने वाला आतंकवाद वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किए जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है।

द्विपक्षीय संबंधों और भविष्य की दिशा

संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच बढ़ते सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देश न केवल सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में बल्कि कृषि, जल संरक्षण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के पूरक हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच की साझेदारी और अधिक प्रगाढ़ होगी और उन्होंने इजरायली नेतृत्व और वहां की जनता को भारत के प्रति उनके प्रेम और सम्मान के लिए धन्यवाद दिया और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

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