पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा को पड़ा भारी संसदीय समिति ने कहा सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा

संसदीय समिति ने पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा की माफी ठुकराई और जिम्मेदार व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

Aug 3, 2026 - 21:35
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पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा को पड़ा भारी संसदीय समिति ने कहा सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर संसदीय समिति अब पूरी तरह से सख्त नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटाए जाने के मामले में समिति ने कड़ा ऐतराज जताया है और मेटा द्वारा मांगी गई माफी को सिरे से ठुकरा दिया है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इस तरह की गंभीर चूक के लिए सिर्फ माफी मांग लेना काफी नहीं होगा। समिति ने निर्देश दिया है कि इस घटना के लिए जो भी व्यक्ति जिम्मेदार है, उस पर उचित कानूनी एक्शन लिया जाना चाहिए।

दिग्गज टेक कंपनियों से सीधे सवाल-जवाब

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति की इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल कंपनियों के प्रतिनिधियों को तलब किया गया था और इसमें स्नैपचैट, गूगल, एक्स (पूर्व में ट्विटर), मेटा (फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम) और यूट्यूब जैसी कंपनियों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ-साथ गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे। सांसदों ने इन कंपनियों से उनकी कार्यप्रणाली और नियमों की अनदेखी को लेकर तीखे सवाल पूछे। समिति ने स्पष्ट किया कि डिजिटल दुनिया में लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बीत रहा है, इसलिए नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह कोई सामान्य तकनीकी गड़बड़ी नहीं

संसदीय सदस्यों ने मेटा के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। समिति का मानना था कि इसे महज एक सामान्य तकनीकी गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसी कारण सांसदों ने मेटा के आला अधिकारियों से सीधे और कड़े सवाल किए। मेटा के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पीएम का वीडियो गलती से हटाया गया था और इसके लिए उन्होंने औपचारिक तौर पर माफी भी मांगी। हालांकि, समिति के सदस्यों ने एकजुट होकर यह साफ कर दिया कि इतने संवेदनशील मामले में केवल सॉरी बोल देने भर से बात नहीं बनेगी।

कानूनी कार्रवाई के सख्त निर्देश

समिति के सदस्यों के बीच इस विषय पर व्यापक चर्चा हुई कि बड़ी डिजिटल कंपनियों को उनकी गलतियों के लिए पूरी तरह से जवाबदेह कैसे ठहराया जाए। कई सांसदों ने कड़े शब्दों में कहा कि यह मामला सिर्फ एक भूल या माफी तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम में जवाबदेही तय करने का है। सदस्यों का तर्क था कि जब प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद से जुड़ी सामग्री के साथ ऐसी लापरवाही हो सकती है, तो आम यूजर्स के कंटेंट की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा और इसी के मद्देनजर समिति ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्लेटफॉर्म को इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की तत्काल पहचान करनी चाहिए और उस जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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