बिहार के कटिहार में सिस्टम शर्मसार: पुल के अभाव में कंधे पर अर्थी लेकर नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण

कटिहार के मोरसंडा गांव में पुल न होने के कारण ग्रामीण शव को कंधे पर उठाकर नदी पार करने को मजबूर हुए। विधायक कविता पासवान ने जल्द पुल निर्माण का आश्वासन दिया है।

May 31, 2026 - 12:35
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बिहार के कटिहार में सिस्टम शर्मसार: पुल के अभाव में कंधे पर अर्थी लेकर नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण

बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र और विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिले के फलका प्रखंड अंतर्गत मोरसंडा गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजनों और ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और गांव और श्मशान घाट के बीच बहने वाली कमला नदी पर पुल न होने के कारण, लोगों को मजबूरन अर्थी को अपने कंधों पर उठाकर नदी के पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

मोरसंडा गांव की दुखद घटना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोरसंडा गांव के निवासी अरविंद मंडल का निधन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार के लिए शव को श्मशान घाट ले जाना अनिवार्य था। विडंबना यह है कि गांव और श्मशान के बीच कमला नदी बहती है, जिस पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीणों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं था, इसलिए उन्होंने साहस जुटाया और अर्थी को कंधों पर रखकर पानी के बीच से रास्ता तय किया। नदी के उस पार पहुंचने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार संपन्न हो सका। यह दृश्य न केवल दुखद है बल्कि आधुनिक युग में बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव को भी दर्शाता है।

दशकों से बुनियादी सुविधाओं का अभाव

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या उनके लिए नई नहीं है। आजादी के दशकों बाद भी इस क्षेत्र के लोग बुनियादी ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नदी के दोनों किनारों पर एक बड़ी आबादी निवास करती है, लेकिन एक पुल के न होने से उनका जीवन अस्त-व्यस्त रहता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें हर छोटे-बड़े काम के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है और जब समय कम होता है या कोई आपातकालीन स्थिति होती है, तो लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बातें केवल कागजों तक सीमित हैं।

आवागमन के खतरों और चुनौतियों का विवरण

नदी पार करने के लिए ग्रामीणों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसका विवरण इस प्रकार है:

  • क्षेत्र में एक निजी नाव का संचालन होता है, लेकिन उसमें अक्सर क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है और
  • बाढ़ के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है।

    विधायक का आश्वासन और तकनीकी बाधाएं

    इस संवेदनशील मामले पर कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र की विधायक कविता पासवान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और उन्होंने स्वीकार किया कि मोरसंडा गांव के पास कमला नदी पर पुल का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। विधायक ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को पहले भी बिहार विधानसभा में प्रमुखता से उठाया है। उनके अनुसार, जिला स्तर पर योजना से संबंधित कुछ तकनीकी कारणों और औपचारिकताओं की वजह से पुल निर्माण का कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि, उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि अब इस पुल के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और जल्द से जल्द तकनीकी बाधाओं को दूर कर निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

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