मिडिल ईस्ट युद्ध का असर: अगस्त से महंगी होंगी कार, टीवी और कपड़े

मिडिल ईस्ट संकट के कारण भारत में अगस्त 2024 से कार, टीवी, कपड़े और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी पर विस्तृत रिपोर्ट।

Jul 28, 2026 - 09:35
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। कंज्यूमर गुड्स बनाने वाली कंपनियां इस साल तीसरी बार अगस्त में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव की वजह से कच्चे माल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव और माल ढुलाई (फ्रेट) के खर्चों में भारी वृद्धि है। इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में होने वाले बदलाव ने भी कंपनियों की लागत को बढ़ा दिया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले यह कीमतों में बढ़ोतरी का आखिरी दौर हो सकता है, ताकि फेस्टिव सीजन के दौरान मांग पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

विभिन्न श्रेणियों में कीमतों पर पड़ेगा असर

अगस्त महीने से पैक्ड चाय, हेयर ऑयल, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन, कपड़े और पैसेंजर गाड़ियों जैसे कई महत्वपूर्ण उत्पादों की कीमतों में 6 से 8 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। कंपनियों को उम्मीद है कि अगस्त में कीमतें बढ़ाने से वे त्योहारी सीजन के लिए खुद को तैयार कर सकेंगी। भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत अगस्त में केरल के ओणम त्योहार से होती है और यह नवरात्रि से लेकर दिवाली तक जारी रहती है, जो इस साल नवंबर में है। कंपनियां चाहती हैं कि दिवाली की खरीदारी शुरू होने से पहले कीमतों का समायोजन पूरा हो जाए ताकि ग्राहकों को बाद में किसी बड़े झटके का सामना न करना पड़े।

इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की कीमतों में उछाल

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र इस वैश्विक संकट से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में से एक है। हायर इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव सतीश एनएस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पश्चिम एशिया संकट कम होने के साथ हालात स्थिर हो जाएंगे। लेकिन हालिया तनाव के कारण एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और कमोडिटी व क्रूड डेरिवेटिव की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री ने अब तक लागत में हुई बढ़ोतरी का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला था, लेकिन अब इसे करना अनिवार्य हो गया है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां अगस्त से सभी कैटेगरी में 4 से 6 फीसदी तक कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इस साल रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन की कीमतें पहले ही 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं, जबकि टेलीविजन की कीमतें 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ी हैं। टीवी की कीमतों में इस भारी वृद्धि की मुख्य वजह मेमोरी चिप की बढ़ती लागत और सप्लाई में कमी है। स्मार्टफोन की कीमतें भी बढ़ रही हैं क्योंकि पिछले आठ-नौ महीनों में मेमोरी चिप की कीमतें तीन गुना से ज्यादा हो गई हैं।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बढ़ेगी महंगाई

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी भी अगस्त से अपनी कारों की कीमतें 30,000 रुपये तक बढ़ाने जा रही है। यह इस वित्तीय वर्ष में कंपनी की दूसरी मूल्य वृद्धि होगी, जिसका उद्देश्य इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी की भरपाई करना है। होंडा कार्स इंडिया भी 1 अगस्त से अपनी कीमतों में इजाफा करेगी। वहीं, लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज इंडिया गिरते रुपये की भरपाई के लिए अगली तिमाही में कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष अय्यर ने कहा कि कंपनी मुद्रा में हो रहे बदलावों पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि हालांकि लग्जरी सामानों पर खर्च अभी भी स्थिर बना हुआ है, लेकिन आयात लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं उद्योग के लिए बड़ी चुनौती हैं और टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी इस महीने की शुरुआत में ही अपनी कीमतों में बढ़ोतरी कर दी थी। मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने 2026 की पहली छमाही में कुल मिलाकर 4 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई थीं।

कपड़ों और एफएमसीजी उत्पादों पर दबाव

कपड़ों के ब्रांड्स ने अब तक कम कीमत पर खरीदे गए पुराने स्टॉक के जरिए कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की थी। लेकिन अब ज्यादा कीमतों पर खरीदे गए नए सीजन के सामान स्टोर तक पहुंच रहे हैं, जिससे कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है। भारत में केल्विन क्लाइन और टॉमी हिलफिगर जैसे ब्रांड बेचने वाली अरविंद फैशन्स ने भी कीमतों में बदलाव के संकेत दिए हैं। कंपनी की चीफ एग्जीक्यूटिव अमीषा जैन ने बताया कि कंपनी पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे टकराव के बीच अपने मुनाफे को बचाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। अगस्त में कपड़ों की कीमतों में 8 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। पेट्रोलियम से जुड़े इनपुट, जैसे कि लीनियर लो-डेंसिटी पॉलीइथिलीन और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और बजाज कंज्यूमर केयर ने भी महंगाई के दबाव का जिक्र किया है। बजाज कंज्यूमर केयर के मैनेजिंग डायरेक्टर नवीन पांडे ने कहा कि इंडस्ट्री को एक बार फिर इनपुट कॉस्ट बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर तिमाही में मार्जिन पर दबाव बने रहने की संभावना है। उन्होंने विशेष रूप से सरसों और बादाम के तेल जैसी खाद्य तेलों की ऊंची कीमतों पर चिंता जताई और हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद कंपनियां मांग को लेकर आशान्वित हैं। हैवेल्स इंडिया के चेयरमैन अनिल राय गुप्ता ने कहा कि ग्राहकों ने अब तक हुई मूल्य वृद्धि को स्वीकार किया है, जो बाजार की मजबूती को दर्शाता है।

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