आईफोन 18 खरीदने का असली खर्च: 3 लाख का फोन ऐसे पड़ता है 5 लाख में
जानें क्यों 3 लाख रुपये का आईफोन असल में 5 लाख रुपये का पड़ता है। एक्सेसरीज, ईएमआई ब्याज और रखरखाव के खर्चों का पूरा विश्लेषण।
जब भी कोई ग्राहक आईफोन 18 जैसा प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने का मन बनाता है, तो उसका ध्यान सबसे पहले फोन की एमआरपी यानी उसकी कीमत पर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 3 लाख रुपये की कीमत वाला फोन असल में आपकी जेब पर इससे कहीं ज्यादा भारी पड़ता है? एक प्रीमियम स्मार्टफोन की ओनरशिप कॉस्ट यानी उसे इस्तेमाल करने का कुल खर्च समय के साथ बढ़ता जाता है। अगर आप 3 लाख रुपये का आईफोन खरीदते हैं, तो अगले दो से तीन सालों में इसका कुल खर्च 5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यह अंतर उन छिपे हुए खर्चों की वजह से आता है जिन्हें हम अक्सर खरीदारी के समय नजरअंदाज कर देते हैं।
एक्सेसरीज और शुरुआती खर्चों का बोझ
3 लाख रुपये की कीमत तो सिर्फ एक शुरुआत है। एप्पल अब अपने फोन के साथ चार्जर नहीं देता है, इसलिए फोन खरीदते ही आपको एक ओरिजिनल चार्जर खरीदना पड़ता है। इसके अलावा मैगसेफ चार्जिंग एक्सेसरीज, एक प्रीमियम क्वालिटी का कवर और स्क्रीन की सुरक्षा के लिए महंगा स्क्रीन प्रोटेक्टर लेना अनिवार्य हो जाता है। इन जरूरी एक्सेसरीज पर ही शुरुआती खर्च 10000 रुपये से लेकर 20000 रुपये तक पहुंच सकता है। इस तरह फोन हाथ में आते ही उसकी प्रभावी कीमत 3 लाख 20000 रुपये के आसपास दिखने लगती है।
एप्पल केयर प्लस और सुरक्षा का खर्च
इतने महंगे फोन के साथ रिस्क लेना समझदारी नहीं मानी जाती, इसलिए ज्यादातर लोग एप्पल केयर प्लस जैसी सुरक्षा योजनाएं लेते हैं। यह प्लान फोन के टूटने या खराब होने पर होने वाले भारी खर्च से बचाता है, लेकिन इस प्लान की अपनी एक कीमत होती है। मॉडल और प्लान की अवधि के हिसाब से इसके लिए अलग से भुगतान करना पड़ता है। अगर हम 3 लाख रुपये के फोन में एप्पल केयर प्लस की लागत जोड़ दें, तो कुल खर्च 3 लाख 15000 रुपये से लेकर 3 लाख 25000 रुपये के बीच पहुंच जाता है।
ईएमआई और ब्याज का गणित
ज्यादातर लोग 3 लाख रुपये का भुगतान एक साथ करने के बजाय ईएमआई का विकल्प चुनते हैं। अगर आप इस फोन को 24 महीने की ईएमआई पर लेते हैं, तो इस पर लगने वाला ब्याज और प्रोसेसिंग फीस फोन की लागत को काफी बढ़ा देती है। बैंक के ऑफर्स और ब्याज दरों के आधार पर आपको 30000 रुपये से लेकर 50000 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। इस स्थिति में फोन की प्रभावी लागत 3 लाख 50000 रुपये तक पहुंच जाती है। यह वह पैसा है जो आप सिर्फ फोन को किस्तों में खरीदने की सुविधा के लिए चुकाते हैं।
रखरखाव और समय के साथ होने वाले खर्च
आईफोन के साथ एक्सेसरीज का खर्च सिर्फ एक बार का नहीं होता। दो-तीन साल के इस्तेमाल के दौरान चार्जिंग केबल खराब हो सकती है, कवर पुराना होकर खराब हो सकता है या स्क्रीन प्रोटेक्टर को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। अगर एक यूजर हर साल इन चीजों पर औसतन 5000 रुपये से 10000 रुपये खर्च करता है, तो 3 साल में यह खर्च 15000 रुपये से 30000 रुपये तक अतिरिक्त जुड़ जाता है। इसके अलावा अगर फोन में कोई ऐसी खराबी आती है जो वारंटी में कवर नहीं है, तो रिपेयरिंग का खर्च अलग से देना पड़ता है।
कैसे पहुंचता है 5 लाख रुपये का आंकड़ा?
अगर हम इन सभी खर्चों को जोड़ें, तो गणित काफी चौंकाने वाला होता है। 3 लाख रुपये का मूल फोन, 20000 रुपये की शुरुआती एक्सेसरीज, 30000 रुपये का प्रोटेक्शन प्लान और लगभग 50000 रुपये का ईएमआई ब्याज मिलाकर शुरुआती ओनरशिप कॉस्ट ही 4 लाख रुपये के करीब हो जाती है। इसके बाद अगले कुछ सालों तक एक्सेसरीज, रिपेयर और अन्य छोटे-मोटे खर्चों को जोड़ने पर कुल खर्च 4 लाख 50000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये या उससे भी अधिक हो सकता है। हालांकि, अगर फोन नकद खरीदा जाए और एक्सेसरीज पर कम खर्च हो, तो यह लागत कम रह सकती है और इसलिए 3 लाख रुपये का आईफोन खरीदने से पहले सिर्फ उसकी कीमत नहीं, बल्कि पूरी ओनरशिप कॉस्ट का आकलन करना जरूरी है।
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