भारतीय नाविकों की मौत पर ट्रंप का चौंकाने वाला जवाब, पीएम मोदी ने जताई कड़ी चिंता
ओमान तट पर अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत पर पीएम मोदी ने ट्रंप से सवाल किया। ट्रंप ने कोई शोक नहीं जताया और इसे एक मुश्किल काम बताया।
फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में ओमान के तट पर हुई तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा और होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना द्वारा किए गए मिसाइल हमले में भारतीय नाविकों की जान चली गई थी, जिसके बाद दोनों वैश्विक नेताओं के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही थी। यह मुलाकात 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद हुई थी, जिसमें पीएम मोदी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया।
ट्रंप का बयान और अफसोस की कमी
मिसाइल हमले का शिकार हुए कमर्शियल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर हुई इस घटना को लेकर जब मीडिया ने राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल किया, तो उनके जवाब ने सभी को हैरान कर दिया। ट्रंप ने भारतीय नाविकों की मौत पर किसी भी प्रकार का शोक या अफसोस व्यक्त नहीं किया। उन्होंने इस मुद्दे पर वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच निरंतर सहयोग की बात कही। ट्रंप ने कमर्शियल जहाजों के संचालन को एक मुश्किल काम करार दिया और संकेत दिया कि इस तरह की घटनाएं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में होती रहती हैं।
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस घटना के बारे में सुना है और यह हमेशा से होता रहा है। उन्होंने आगे कहा, "हम एक साथ काम करते हैं। " हालांकि, ट्रंप के इस बयान में संवेदना की कमी साफ दिखी, क्योंकि उन्होंने हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष नाविकों के प्रति कोई औपचारिक दुख प्रकट नहीं किया।
पीएम मोदी ने सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद मजबूती से उठाया। यूएस-ईरान मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के संदर्भ में बात करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय नाविकों की जान की सुरक्षा उनके लिए सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते का पालन करते समय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि नाविकों की सुरक्षा को हर हाल में सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
राजनयिक तनाव और भारत का कड़ा विरोध
अमेरिकी सेना द्वारा किए गए इस हमले के पीछे अमेरिकी सेंट्रल कमांड का तर्क था कि इन जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी का उल्लंघन किया था। अमेरिकी सेना ने ऐसे दो कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया था जिन पर भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीन दिनों के भीतर दो बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच भी टेलीफोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत काफी तनावपूर्ण रही, जिसमें विदेश मंत्री जयशंकर ने भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया और भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा, चाहे वह युद्ध क्षेत्र हो या कोई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग।
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