क्या ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला करेगा इजराइल? जानें क्यों बढ़ रही दुनिया की टेंशन
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और परमाणु ठिकानों पर संभावित हमले की पूरी जानकारी। जानें क्यों इजराइल के निशाने पर हैं ईरान के न्यूक्लियर प्लांट।
ईरान और इजराइल के बीच तनाव अब उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध की आशंका जताई जा रही है। यह संघर्ष इसलिए भी अनोखा है क्योंकि आमतौर पर दो देशों के बीच युद्ध सीमा विवाद या किसी पुराने ऐतिहासिक कारण से होता है, लेकिन ईरान और इजराइल के मामले में ऐसा नहीं है। न तो इन दोनों देशों की सीमाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और न ही इनकी दुश्मनी का कोई बहुत पुराना इतिहास रहा है। एक समय था जब ईरान पश्चिम एशिया में इजराइल का इकलौता दोस्त हुआ करता था, लेकिन आज वही ईरान इजराइल का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजराइल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करेगा और इस दुश्मनी के पीछे अमेरिका की भूमिका और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत के कारणों को समझना बेहद जरूरी है।
ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र और इजराइल की नजर
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को कई महत्वपूर्ण केंद्रों में विभाजित किया है। इनमें फोरदोव, खोनदाब, नतांज, इश्फहान और बुशहर के न्यूक्लियर प्लांट शामिल हैं। इन्हीं ठिकानों पर ईरान उस यूरेनियम को तैयार कर रहा है जिसका उपयोग परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का यह दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब पहुंच चुका है और कुछ का तो यह भी मानना है कि उसने शायद इसे हासिल भी कर लिया है। यही कारण है कि ये सभी प्लांट लंबे समय से इजराइल और अमेरिका के निशाने पर बने हुए हैं। इजराइल को डर है कि यदि ईरान परमाणु शक्ति संपन्न हो गया, तो यह उसकी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा।
वैज्ञानिकों की हत्या और मोसाद पर आरोप
ईरान का यह स्पष्ट आरोप रहा है कि इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने पिछले 15 वर्षों में उसके कई शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की है। ईरान के अनुसार, इन हत्याओं का मुख्य उद्देश्य उसके परमाणु कार्यक्रम की गति को रोकना या उसे पूरी तरह से समाप्त करना था। हालांकि, इन घटनाओं के बाद ईरान की परमाणु बम बनाने की जिद और अधिक बढ़ गई है। अब यह माना जा रहा है कि परमाणु हथियारों के खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए इजराइल इन ठिकानों पर सीधा सैन्य हमला करने की योजना बना सकता है। ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है, लेकिन इजराइल की खुफिया और सैन्य क्षमताएं हमेशा से ही उसके लिए चुनौती रही हैं।
बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी चेतावनी
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसने एक बहुत बड़ी गलती की है और उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान की सरकार इजराइल के आत्मरक्षा और दुश्मनों को जवाब देने के संकल्प को समझने में विफल रही है। उन्होंने अपने संबोधन में याहया सिनवार और हमास कमांडर दाइफ का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी इजराइल की ताकत को नहीं समझा था। इसके अलावा उन्होंने नसरल्लाह और मोहसिन का उदाहरण देते हुए कहा कि तेहरान में बैठे लोग भी शायद इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं, लेकिन जल्द ही वे इसे समझ जाएंगे। नेतन्याहू का संकल्प है कि जो भी इजराइल पर हमला करेगा, उसे उसका करारा जवाब दिया जाएगा, क्योंकि इजराइल अपने दुश्मनों को कभी माफ नहीं करता।
परमाणु ठिकानों को नष्ट करने का इजराइली इतिहास
इजराइल के पास अपने दुश्मनों के परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट करने का एक पुराना और सफल इतिहास रहा है और साल 1981 में इजराइली वायु सेना ने इराक के परमाणु प्लांट को उसके पूरी तरह तैयार होने से पहले ही जमींदोज कर दिया था। इसके बाद साल 2007 में इजराइल ने सीरिया के परमाणु प्लांट को भी तबाह करने में सफलता हासिल की थी। हालांकि, ईरान का मामला इराक और सीरिया से काफी अलग है। जब इजराइल ने इराक और सीरिया पर हमला किया था, तब वहां परमाणु कार्यक्रम अपने शुरुआती चरण में थे। इसके विपरीत, ईरान के परमाणु प्लांट लगभग पूरी तरह तैयार हैं और काफी सुरक्षित ठिकानों पर स्थित हैं। ऐसे में इजराइल का कोई भी हमला सीधे तौर पर परमाणु युद्ध की शुरुआत का ट्रिगर साबित हो सकता है।
अमेरिका की भूमिका और भविष्य की आशंकाएं
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजराइल दोनों ही समान रूप से चिंतित हैं और इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम किसकी मदद से शुरू हुआ और यह इस स्तर तक कैसे पहुंचा, यह आज भी एक बड़ा सवाल है। इजराइल अपने दुश्मनों को कभी माफ नहीं करने की नीति पर चलता है और ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद अब तेहरान में भी पलटवार की तैयारी की जा रही है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव एक बड़े वैश्विक संकट का रूप लेगा और यदि इजराइल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करता है, तो इसके परिणाम न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
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