भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता: 15 जुलाई से 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर ड्यूटी खत्म
भारत और ब्रिटेन के बीच CETA समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा, जिससे 99% भारतीय उत्पादों पर टैक्स खत्म होगा और पेशेवरों को 5 साल की टैक्स राहत मिलेगी।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापारिक रिश्तों का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू होने जा रहा है। आगामी 15 जुलाई 2026 से दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी CETA आधिकारिक तौर पर लागू हो जाएगा। इस ऐतिहासिक समझौते के साथ ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता जिसे DCC कहा जाता है, वह भी इसी दिन से प्रभाव में आएगा। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और कारोबारियों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है। इस समझौते के लागू होने से न केवल 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी ड्यूटी के सीधी एंट्री मिलेगी, बल्कि वहां काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए दोहरे टैक्स से छूट की सीमा को भी 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
भारतीय सामानों के लिए ब्रिटेन का बाजार हुआ टैक्स फ्री
इस नए व्यापारिक ढांचे के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को बहुत बड़ा और सीधा फायदा मिलने वाला है और अब तक जिन सामानों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगता था, वे अब बिना किसी ड्यूटी के वहां आसानी से बेचे जा सकेंगे। आंकड़ों की बात करें तो प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाला 70 प्रतिशत तक का टैक्स अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसी तरह समुद्री उत्पादों पर लगने वाला 21 दशमलव 5 प्रतिशत का शुल्क, इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स पर लगने वाला 18 प्रतिशत का टैक्स, चमड़े और जूतों पर लगने वाला 16 प्रतिशत का शुल्क तथा कपड़ों पर लगने वाला 12 प्रतिशत तक का भारी-भरकम आयात शुल्क अब शून्य हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत के छोटे-बड़े कारखानों, किसानों और मछुआरों का सामान अब ब्रिटेन के बाजारों में अपनी सही और प्रतिस्पर्धी कीमत पर बिक सकेगा। इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई वैश्विक ताकत मिलेगी। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों जैसे डेयरी उत्पादों, अनाज और सेब को बाहरी आयात के दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
सेवा क्षेत्र और पेशेवरों के लिए नए अवसर
यह समझौता केवल सामानों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सर्विस इंडस्ट्री के लिए भी यह एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। ब्रिटेन ने 137 ऐसे सर्विस सेक्टर्स में भारत को प्रवेश दिया है जिनमें भारत का दुनिया भर में दबदबा है। इनमें आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा, टेलीकॉम और हेल्थकेयर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। सबसे बड़ी राहत ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को मिली है। नए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत अब अस्थायी तौर पर ब्रिटेन जाने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां के दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान यानी डबल टैक्स से 5 साल तक की छूट मिलेगी। इस फैसले से 75 हजार से ज्यादा पेशेवरों के साथ-साथ करीब 900 भारतीय कंपनियों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। इसके अलावा एक विशेष व्यवस्था के तहत हर साल 1800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीतकारों को भी ब्रिटेन में काम करने के विशेष अवसर प्रदान किए जाएंगे।
स्टील उद्योग की सुरक्षा और भविष्य की राह
किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। कुल 30 अध्यायों वाले इस व्यापारिक ढांचे में भारत ने अपने स्टील निर्यातकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। 1 जुलाई 2026 से ब्रिटेन द्वारा स्टील पर लागू किए जा रहे नए और सख्त नियमों के बावजूद, भारत के 85 प्रतिशत स्टील निर्यात को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। बाकी बचे हुए हिस्से को भी एक खास कोटा सिस्टम के जरिए सुरक्षित किया गया है। यह व्यापार समझौता केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा। इससे महिलाओं, युवाओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई सेक्टर को दुनिया के एक बड़े उपभोक्ता बाजार से जुड़ने का सीधा मौका मिलेगा। मई 2021 में जिस साझेदारी की नींव रखी गई थी, वह 14 दौर की लंबी और गहन बातचीत के बाद अब जमीन पर उतरकर भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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