मंडोर ओपन जेल में गूंजी शहनाई: उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों ने लिए सात फेरे
जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने हाईकोर्ट की अनुमति से शादी की। जेल सुधार की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है।
राजस्थान के जोधपुर में स्थित मंडोर ओपन जेल (खुला बंदी शिविर) बुधवार को एक अभूतपूर्व और भावुक कर देने वाले समारोह का गवाह बना। यहां उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों ने जेल की चारदीवारी के भीतर ही विवाह के पवित्र बंधन में बंधकर अपने जीवन की नई शुरुआत की। यह ऐतिहासिक अवसर तब आया जब नागौर जिले के अडसिंगा निवासी 33 वर्षीय मूलाराम भाटी और मुंबई की रहने वाली 31 वर्षीय सीमा ने हिंदू रीति-रिवाज के साथ सात फेरे लिए। यह संभवतः पहला ऐसा मामला है जहां किसी ओपन जेल परिसर के अंदर दो दोषसिद्ध बंदियों का विवाह संपन्न कराया गया है, जो जेल सुधार और मानवीय दृष्टिकोण की एक नई मिसाल पेश करता है।
प्रेम और पुनर्वास की अनूठी कहानी
मूलाराम और सीमा की प्रेम कहानी जेल की सलाखों के पीछे शुरू हुई थी। जानकारी के अनुसार, मूलाराम को करीब 2 वर्ष पहले अजमेर जेल से मंडोर ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया था। 5 वर्ष पहले महिला जेल से यहां भेजा गया था। ओपन जेल के नियमों के अनुसार, बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनसे खेती और अन्य कार्य कराए जाते हैं। इसी दौरान खेती के काम के सिलसिले में दोनों का परिचय हुआ और समय के साथ यह परिचय गहरी दोस्ती में बदला और फिर दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला किया। हाल ही में जब सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली, तो दोनों ने इस अवसर का उपयोग विवाह करने के लिए किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी की।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ विवाह
विवाह का आयोजन पूरी तरह से पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया और इस खास मौके पर दोनों परिवारों के कुल 21 सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने वर-वधू को अपना आशीर्वाद दिया। दूल्हे मूलाराम की अगवानी ढोल और थाली की थाप के साथ की गई, जो राजस्थानी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है और विवाह मंडप में महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जिससे जेल का वातावरण किसी उत्सव जैसा प्रतीत होने लगा। वरमाला की रस्म के बाद, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे का साथ निभाने का वचन दिया। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि जेल प्रशासन के लिए भी एक नया अनुभव था।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी और संवैधानिक अधिकार
इस विवाह को संपन्न कराने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत ने अनुमति देते हुए टिप्पणी की कि जेल सुधार व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंड देना नहीं है, बल्कि उनका पुनर्वास कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है और अदालत ने वर्ष 2022 के 'नंदलाल बनाम राज्य' मामले का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि विवाह करना, परिवार बसाना और गरिमापूर्ण जीवन जीना प्रत्येक व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा है। राज्य सरकार ने भी इस विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिससे इस मानवीय पहल का मार्ग प्रशस्त हुआ और मंडोर ओपन जेल में संपन्न यह विवाह यह संदेश देता है कि सुधार की प्रक्रिया में जीवन को नई शुरुआत देने के अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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