ममता बनर्जी ने तृणमूल में किया बड़ा फेरबदल, सायोनी घोष और माला राय की छुट्टी
ममता बनर्जी ने 20 सांसदों की बगावत के बीच टीएमसी में बड़ा फेरबदल किया है। सायोनी घोष और माला राय को हटाकर अर्नब बनर्जी और अलिफा अहमद को नई जिम्मेदारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर एक बहुत बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। पार्टी की युवा और महिला शाखाओं में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए उन्होंने कई प्रमुख पदों पर नई नियुक्तियां की हैं और कुछ वरिष्ठ नेताओं को उनके मौजूदा पदों से हटा दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव एक ऐसे समय में किए गए हैं जब 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद टीएमसी के भीतर अंदरूनी असंतोष और राजनीतिक हलचल बहुत तेज हो गई है। ममता बनर्जी का यह कदम पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने और बागियों को कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।
युवा और महिला विंग में नई नियुक्तियां
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी ने पिछले हफ्ते ही एक बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन के दौरान सांसद सायोनी घोष को टीएमसी युवा विंग का अध्यक्ष दोबारा नियुक्त किया था। लेकिन राजनीति की बदलती परिस्थितियों के बीच, महज एक हफ्ते के भीतर ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। सायोनी घोष की जगह अब अर्नब बनर्जी को युवा विंग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है और इसी प्रकार, पार्टी ने कोलकाता दक्षिण की सांसद माला राय को भी महिला विंग 'तृणमूल महिला कांग्रेस' के अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया है। उनकी जगह अब कालिगंज की विधायक अलिफा अहमद को नई अध्यक्ष बनाया गया है।
बागी गुट और सांसदों की बगावत
सायोनी घोष और माला राय को हटाए जाने के पीछे पार्टी में यह चर्चा बहुत तेज है कि वे लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों के समूह के साथ जुड़ चुकी हैं। यह बागी गुट अब पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मैदान में आ गया है और सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने की योजना बना रहा है। यह समूह संसद में खुद को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता देने की मांग करने वाला है। इन असंतुष्ट सांसदों का दावा है कि टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से लगभग 20 सांसद उनके साथ खड़े हैं, जिनमें सायोनी घोष और माला राय के नाम भी प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।
पार्टी के भीतर बढ़ता विवाद और तीखी बयानबाजी
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा यह विवाद अब सार्वजनिक बयानों तक पहुंच गया है और पार्टी के एक वरिष्ठ राज्यसभा सांसद ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि ये संगठनात्मक बदलाव तीन दिन पहले हुई पार्टी की बैठक में ही तय कर लिए गए थे। उन्होंने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ममता दीदी ने लोगों को दूध और केला देकर पाला, लेकिन वे सांप निकले। यह बयान उन 20 बागी सांसदों के संदर्भ में दिया गया है जो पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। इसी बीच, टीएमसी की बागी सांसद काकली घोष दस्तीदार ने यह बड़ा दावा किया है कि यदि उनके गुट को संसद में अलग मान्यता मिल जाती है, तो वे भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को अपना समर्थन दे सकते हैं।
पूर्व में हुए संगठनात्मक बदलाव
आपको बता दें कि इससे पहले 5 जून को भी ममता बनर्जी ने राज्य में टीएमसी की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया था और एक नई संगठनात्मक संरचना तैयार की थी। उस समय उन्होंने कई पुराने नेताओं और अपने वफादारों को नई जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उसी बदलाव के दौरान पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव के रूप में ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को फिर से जिम्मेदारी दी थी।
कोलकाता और लोकसभा इकाई में फेरबदल
ताजा फेरबदल के तहत, कोलकाता के टीएमसी सांसद कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है और यह पद पहले सुदीप बंद्योपाध्याय के पास था, लेकिन अब उन्हें हटा दिया गया है। कुणाल घोष ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए सौंपी है। गौरतलब है कि सुदीप बंद्योपाध्याय भी शनिवार को बागियों के गुट में शामिल हो गए थे। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को टीएमसी की लोकसभा इकाई का मुख्य सलाहकार बनाया गया है और वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, इस इकाई में पार्टी के केवल 8 सांसद ही ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी जता रहे हैं।
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