महाराष्ट्र में सियासी घमासान: शिंदे और उद्धव के बीच जुबानी जंग में शेर, बाघ और शोले की एंट्री

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच तीखी बयानबाजी हुई। शिंदे ने शेर और बाघ के रूपकों का इस्तेमाल किया, जबकि उद्धव ने पद छोड़ने की पेशकश की।

Jun 20, 2026 - 08:35
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महाराष्ट्र में सियासी घमासान: शिंदे और उद्धव के बीच जुबानी जंग में शेर, बाघ और शोले की एंट्री

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय एक बड़ा सियासी संग्राम देखने को मिल रहा है, जहां शिवसेना के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच जुबानी जंग काफी तेज हो गई है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए, जिसमें शेर, बाघ और कुत्तों जैसे शब्दों के साथ-साथ बॉलीवुड फिल्म 'शोले' के संवादों का भी सहारा लिया गया और यह राजनीतिक लड़ाई अब उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां दोनों पक्ष खुद को असली शिवसेना साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

एकनाथ शिंदे का तीखा हमला: शेर और बाघ का जिक्र

मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने गुट को बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी बताया। उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो कुछ भी अभी दिख रहा है, वह सिर्फ एक ट्रेलर है और असली फिल्म का आना अभी बाकी है। शिंदे ने आक्रामक अंदाज में कहा कि आज एक बाघ आपके सामने खड़ा है, जबकि कुछ कुत्ते लगातार भौंक रहे हैं और उन्होंने आगे कहा कि कुत्ते हमेशा झुंड में भौंकते हैं, लेकिन शेर हमेशा अकेला आता है। शिंदे के अनुसार, कुत्ते भौंकते रहते हैं जबकि बाघ अपना शिकार करता है और दहाड़ता है। उन्होंने दावा किया कि यही वह शिवसेना है जो आज पूरे महाराष्ट्र में मजबूती से खड़ी है।

शोले का डायलॉग और उर्दू शेर के जरिए तंज

अपने भाषण के दौरान शिंदे ने विरोधियों पर तंज कसने के लिए मशहूर हिंदी फिल्म 'शोले' के एक संवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने फिल्म के किरदार असरानी के डायलॉग का हवाला देते हुए कहा कि पहले कुछ नेता अपने पीछे लोगों को लेकर चलते थे, लेकिन अब उनके पीछे कोई नहीं बचा है। " उन्होंने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर क्यों नेता और कार्यकर्ता उनके गुट को छोड़कर जा रहे हैं और उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गुट को आत्म-मंथन और आत्म-निरीक्षण करने की सलाह दी।

शिवसेना (यूबीटी) में संकट और सांसदों की बगावत

शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह संकट ऐसे समय में आया है जब पार्टी में एक और बड़ी बगावत की सुगबुगाहट तेज है। खबरों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो यह ठाकरे गुट के लिए एक बड़ा झटका होगा। सांसदों का यह संभावित कदम उस फूट को और गहरा कर सकता है जिसने 2022 में पहली बार महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया था। उस समय एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी और अंततः पार्टी के नाम और उसके प्रसिद्ध धनुष-बाण चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जमा लिया था।

उद्धव ठाकरे की भावुक अपील और इस्तीफे की पेशकश

पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत और शिंदे के हमलों के बीच उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की। स्थापना दिवस के अवसर पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं है, तो वे तुरंत अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि अगर सदस्यों को लगता है कि वे अब नेतृत्व करने के योग्य नहीं हैं, तो वे किसी भी निष्ठावान कार्यकर्ता को पार्टी की कमान सौंप देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पद से चिपके रहने वाले व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन वे पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के लिए अपनी लड़ाई कभी नहीं छोड़ेंगे। उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को चेतावनी भी दी कि वे शिवसेना को "चोरों और गद्दारों" के हाथों में न जाने दें।

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