पुतिन पर अमेरिकी सीनेट का बड़ा प्रहार रूस से तेल खरीदने वालों पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ

अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल पास किया है। जानें भारत और चीन पर इसका क्या असर होगा।

Aug 8, 2026 - 10:35
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पुतिन पर अमेरिकी सीनेट का बड़ा प्रहार रूस से तेल खरीदने वालों पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ

रूस पर आर्थिक शिकंजा कसने के उद्देश्य से अमेरिकी सीनेट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद अब रूस से तेल, गैस और अन्य सामान खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के लिए मिलने वाले राजस्व से वंचित करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इस विधेयक के पारित होने से उन देशों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अभी भी रूस पर निर्भर हैं। अमेरिका का यह फैसला वैश्विक व्यापारिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है और इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं।

सीनेट में भारी बहुमत से पारित हुआ विधेयक

अमेरिकी सीनेट में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति देखने को मिली और यह 86-11 के भारी बहुमत से पारित हुआ। यह विधेयक दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा चलाए गए एक साल के लंबे अभियान का परिणाम है। ग्राहम का उद्देश्य यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन को और अधिक मजबूत करना और लंबे समय से चल रहे युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना था। सीनेट में मिला यह भारी समर्थन इस बात का संकेत है कि अमेरिकी नीति निर्माता रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के पक्ष में हैं। इस विधेयक के माध्यम से अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह रूस की युद्ध मशीनरी को मिलने वाली वित्तीय मदद को हर हाल में रोकना चाहता है।

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की कैपिटल हिल यात्रा और बिल का महत्व

यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार के कुछ ही घंटों बाद कैपिटल हिल का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान ज़ेलेंस्की ने दोनों दलों के सीनेटरों से मुलाकात की और यूक्रेन की स्थिति से उन्हें अवगत कराया। पिछले सप्ताह ही सीनेट ने इस व्यापक विधेयक पर पहली प्रक्रियात्मक वोटिंग की थी, जिसके बाद अब इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। ज़ेलेंस्की की मौजूदगी और सीनेट का यह फैसला यूक्रेन को यह भरोसा दिलाता है कि अमेरिका इस कठिन समय में उसके साथ खड़ा है। यह बिल न केवल रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाएगा बल्कि यूक्रेन के मनोबल को भी ऊंचा करेगा।

इन देशों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

वर्तमान में दुनिया के कई बड़े देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए रूस पर निर्भर हैं। इस नए पैकेज के लागू होने के बाद चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देशों की परेशानियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि ये देश वर्तमान में रूस से तेल और गैस की बड़ी मात्रा में खरीदारी करते हैं। अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले 100 प्रतिशत टैरिफ के कारण इन देशों के लिए रूसी तेल और गैस का आयात करना बेहद महंगा हो जाएगा। यह कदम इन देशों को रूस से अपनी निर्भरता कम करने के लिए मजबूर करने की एक कोशिश है। यदि ये देश रूस से खरीदारी जारी रखते हैं, तो उन्हें अमेरिकी बाजार में व्यापार करने के दौरान भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप प्रशासन के दौरान और भी कड़े कदमों की संभावना

सीनेट द्वारा उठाया गया यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा में अब तक का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह युद्ध पिछले चार वर्षों से अधिक समय से चल रहा है और अब इसने और भी गंभीर रूप ले लिया है। इस पैकेज के पारित होने के बाद अब ट्रंप प्रशासन को और भी अधिक शक्तियां मिल सकती हैं। भविष्य में रूस से आयात होने वाली चीजों, विशेष रूप से तेल और गैस पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की इजाजत भी मिल सकती है। इससे वॉशिंगटन को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का ज्यादा अधिकार मिलेगा जो रूस से खरीदारी कर रहे हैं और इसके अलावा, अगर इस पैकेज को पूरी तरह से मंजूरी मिल जाती है, तो पुतिन और रूस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल का कड़ा संदेश

इस पैकेज पर दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ मिलकर काम करने वाले सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस अवसर पर भावुक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की यूक्रेन से और पुतिन मॉस्को से इस घटनाक्रम को देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि लिंडसे ग्राहम भी इसे देख रहे होंगे। ब्लूमेंथल ने यूक्रेन के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आप अकेले नहीं हैं और व्लादिमीर पुतिन को चेतावनी दी कि वह यूक्रेन पर कभी विजय प्राप्त नहीं कर पाएंगे। यह बयान अमेरिकी सीनेट के उस संकल्प को दोहराता है जिसके तहत वे रूस की विस्तारवादी नीतियों का विरोध कर रहे हैं।

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