मिडिल ईस्ट संकट: पीएम मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा पर उच्च स्तरीय बैठक की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की ऊर्जा तैयारियों और आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

Mar 22, 2026 - 20:35
 0  4
मिडिल ईस्ट संकट: पीएम मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा पर उच्च स्तरीय बैठक की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारत की ऊर्जा तैयारियों और सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के शीर्ष कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की रणनीति तैयार करना था। अधिकारियों के अनुसार, सरकार का प्राथमिक ध्यान देश में ईंधन और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई अन्य वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहे। बैठक के दौरान मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात और भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और औद्योगिक क्षेत्र के हितों की रक्षा की जा सके।

पेट्रोलियम और बिजली क्षेत्रों की स्थिति का आकलन

बैठक के दौरान वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने पेट्रोलियम, पावर और फर्टिलाइजर सेक्टर की वर्तमान स्थिति का गहन आकलन किया। अधिकारियों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य देश भर में ऊर्जा की बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसमें कच्चे तेल के आयात, रिफाइनिंग क्षमता और बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद घरेलू बाजार में ऊर्जा की कीमतों और उपलब्धता को स्थिर बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

एलपीजी और उर्वरक वितरण पर विशेष ध्यान

बैठक में एलपीजी (LPG) वितरण और उर्वरक की उपलब्धता को लेकर विशेष रणनीति पर चर्चा हुई। कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि मिडिल ईस्ट से होने वाली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। अधिकारियों ने बताया कि लॉजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि देश के दूरदराज के हिस्सों में भी रसोई गैस और खाद की कमी न हो। आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध और आपूर्ति बाधाएं

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उत्पन्न हुए गतिरोध पर बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण शिपिंग रूट है और इस पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण या बाधा भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है और अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग से होने वाले कार्गो मूवमेंट पर ईरान के प्रभाव के कारण जहाजों की आवाजाही सीमित हुई है। भारत अपनी आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों और कूटनीतिक विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला और कूटनीतिक प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले भी उल्लेख किया था कि पश्चिम एशिया के युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इस संकट के समाधान और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ टेलीफोन पर चर्चा की है। इन कूटनीतिक प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्र में शांति बहाल करना और वैश्विक व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना है।

उपभोक्ता और औद्योगिक हितों की सुरक्षा

अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट के बीच घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र कार्य कर रहा है। बैठक में यह भी तय किया गया कि ऊर्जा भंडारण क्षमताओं का अधिकतम उपयोग किया जाएगा और भविष्य की किसी भी आपात स्थिति के लिए रणनीतिक भंडार को तैयार रखा जाएगा और सरकार का ध्यान स्थिर लॉजिस्टिक्स और कुशल वितरण प्रणाली के माध्यम से आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow