मेरी चुप्पी को कमजोरी मत समझना, बहुत जल्द बांग्लादेश लौटूंगी: शेख हसीना का बड़ा बयान

शेख हसीना ने भारत से अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बांग्लादेश वापसी का संकेत दिया है और यूनुस सरकार पर राजनीतिक दमन के आरोप लगाए हैं।

May 19, 2026 - 09:35
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मेरी चुप्पी को कमजोरी मत समझना, बहुत जल्द बांग्लादेश लौटूंगी: शेख हसीना का बड़ा बयान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में अपने निर्वासन के दौरान एक बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि उनकी चुप्पी को किसी भी तरह से उनकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह बहुत जल्द बांग्लादेश वापस लौटेंगी। एक ई-मेल इंटरव्यू के माध्यम से अपनी बात रखते हुए हसीना ने कहा कि देश से उनकी भौतिक अनुपस्थिति का यह अर्थ कतई नहीं है कि वह शांत बैठी हैं। उन्होंने दावा किया कि वह हर समय अपने देश के हितों के लिए लड़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पूरी तरह सक्रिय हैं। ज्ञात हो कि 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद सत्ता छोड़ने के बाद से शेख हसीना भारत में रह रही हैं।

वापसी की शर्तें और लोकतांत्रिक बहाली

अपनी स्वदेश वापसी के संबंध में शेख हसीना ने कहा कि उनकी वापसी किसी एक निश्चित तारीख पर निर्भर नहीं करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी वापसी से पहले बांग्लादेश में एक लोकतांत्रिक माहौल का होना अनिवार्य है। हसीना के अनुसार, देश में अभिव्यक्ति की आजादी, राजनीतिक अधिकार और कानून का शासन वापस आना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत वापसी के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश की आजादी और वहां की जनता के व्यापक हित के लिए भी बहुत जरूरी है। जब तक देश में सामान्य राजनीतिक स्थितियां बहाल नहीं होतीं, तब तक लोकतंत्र की नींव कमजोर बनी रहेगी।

अवामी लीग की शक्ति और संघर्ष का इतिहास

अवामी लीग पर लगे प्रतिबंधों के मुद्दे पर शेख हसीना ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अवामी लीग जनता की पार्टी है और इसे किसी भी कागजी आदेश या प्रतिबंध के जरिए खत्म करना असंभव है। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन पर अब तक 19 बार जानलेवा हमले हो चुके हैं, लेकिन इन हमलों ने उन्हें कभी रुकने पर मजबूर नहीं किया। हसीना ने कहा कि अगर अवामी लीग को बैन करके मिटाया जा सकता, तो शायद बांग्लादेश का जन्म ही नहीं हुआ होता। उन्होंने दावा किया कि आज भी बांग्लादेश की धरती पर लाखों समर्थक और हजारों नेता पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार अवामी लीग की लोकप्रियता से डरी हुई है, इसीलिए उस पर रोक लगाई गई है।

मुहम्मद यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप

शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने यूनुस सरकार की कार्यप्रणाली को अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ एक राजनीतिक नरसंहार करार दिया। हसीना द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 600 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि 150000 से ज्यादा लोगों को झूठे और फर्जी मुकदमों में फंसाकर गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि दमनकारी नीतियों के कारण कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। हसीना का मानना है कि जैसे ही देश में लोकतंत्र की वापसी होगी, ये सभी नेता और कार्यकर्ता वापस लौट आएंगे।

अर्थव्यवस्था और विकास परियोजनाओं पर प्रहार

देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए शेख हसीना ने कहा कि उनके शासनकाल में बांग्लादेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा था और उन्होंने अपने कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों के रूप में पद्मा ब्रिज, रूपपुर परमाणु परियोजना और मातारबाड़ी बंदरगाह जैसे विशाल प्रोजेक्ट्स का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की गलत नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है और पार्टी के भविष्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अवामी लीग एक लोकतांत्रिक संगठन है और यदि किसी नेता पर आरोप लगते हैं, तो पार्टी स्वयं उन पर कार्रवाई करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोधियों की किसी भी साजिश या दबाव में आकर पार्टी कभी नहीं टूटेगी और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहेगी।

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