राजस्थान: कुत्तों के काटने के मामले दोगुने, जयपुर सबसे अधिक प्रभावित

राजस्थान में 2025 में कुत्तों के काटने के मामले दोगुने हुए। जयपुर 633 मामलों के साथ शीर्ष पर। बच्चों पर हमलों में भी वृद्धि दर्ज।

Mar 23, 2026 - 08:35
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राजस्थान: कुत्तों के काटने के मामले दोगुने, जयपुर सबसे अधिक प्रभावित

राजस्थान में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वर्ष 2025 के दौरान तीव्र वृद्धि देखी गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस तरह के मामले पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं। राजधानी जयपुर इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर उभरा है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर में वर्ष 2024 में 307 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 633 हो गए हैं। यह संख्या राज्य के सभी जिलों में सर्वाधिक है।

जयपुर में मामलों की वर्तमान स्थिति

जयपुर जिले में कुत्तों के हमलों की संख्या में 100% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जहां 307 लोग कुत्तों के शिकार हुए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 633 तक पहुंच गया। आरटीआई आवेदक चंद्रशेखर गौड़ द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, जयपुर में न केवल कुल मामलों में वृद्धि हुई है, बल्कि हमलों की गंभीरता भी बढ़ी है। प्रशासन द्वारा इन आंकड़ों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बच्चों पर हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि

आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू बच्चों पर होने वाले हमले हैं। जयपुर में वर्ष 2024 में कुत्तों के काटने से 45 बच्चे पीड़ित हुए थे, जिनकी संख्या 2025 में बढ़कर 65 हो गई है। यह आंकड़ा राज्य के किसी भी अन्य जिले की तुलना में सबसे अधिक है। बच्चों के साथ होने वाली इन घटनाओं ने स्थानीय निवासियों और अभिभावकों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। खैरथल-तिजारा जिले में भी बच्चों पर हमलों के मामले 2024 में 4 से बढ़कर 2025 में 9 हो गए हैं।

विभिन्न जिलों के तुलनात्मक आंकड़े

जयपुर के बाद राज्य के अन्य जिलों में भी कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। खैरथल-तिजारा में 2025 में कुल 55 मामले दर्ज किए गए, जबकि पाली में 46 और कोटा में 45 मामले सामने आए। भीलवाड़ा में भी 33 घटनाएं दर्ज की गई हैं। कोटा में बच्चों पर हमलों की संख्या 2024 में 9 थी, जो 2025 में बढ़कर 16 हो गई। हालांकि, बीकानेर एक ऐसा जिला रहा जहां बच्चों पर हमलों के मामलों में कमी आई है; यहां 2024 में 6 मामले थे जो 2025 में घटकर 2 रह गए।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का अंतर

रिपोर्ट के अनुसार, कुत्तों के काटने की अधिकांश घटनाएं शहरी क्षेत्रों में केंद्रित रही हैं। जयपुर, कोटा और पाली जैसे शहरी केंद्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके व्यवहार में बदलाव को इन घटनाओं का मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके विपरीत, ग्रामीण इलाकों में कुत्तों के काटने की घटनाएं अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई हैं। पाली जिले में वर्ष 2024 में बच्चों पर हमले का कोई मामला नहीं था, लेकिन 2025 में वहां 2 मामले दर्ज किए गए हैं, जो शहरी विस्तार के साथ बढ़ती चुनौतियों को दर्शाता है।

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