राज्यसभा चुनाव: मध्य प्रदेश में कांग्रेस को झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द। तेलंगाना मामले को छिपाने का आरोप। भाजपा की जीत तय।

Jun 9, 2026 - 20:35
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राज्यसभा चुनाव: मध्य प्रदेश में कांग्रेस को झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस की ओर से नामांकन दाखिल करने वाली वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है। यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उनके नामांकन पत्रों पर जताई गई गंभीर आपत्तियों के बाद लिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है और उसके तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की पूरी संभावना बन गई है।

नामांकन रद्द होने के मुख्य कारण

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का प्राथमिक कारण उनके खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाना बताया गया है। भाजपा नेताओं द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में इस कानूनी मामले का विवरण नहीं दिया था। इसके अतिरिक्त, भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नामांकन पत्रों में उनकी संपत्ति और बैंक बैलेंस का पूरा विवरण स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया था। चुनाव नियमों के कड़े प्रावधानों के तहत, प्रत्येक उम्मीदवार को अपने खिलाफ दर्ज मामलों, चल-अचल संपत्ति और ऋण का पूरा विवरण पूरी पारदर्शिता के साथ हलफनामे में देना अनिवार्य होता है। किसी भी जानकारी को छिपाना या गलत तथ्य प्रस्तुत करना नामांकन खारिज होने का आधार बनता है।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा नेता राकेश सिंह ने इसे सच्चाई और ईमानदारी की जीत करार दिया। उन्होंने कहा, "उन्होंने जान-बूझकर यह बात छिपाई। फॉर्म अधूरा था और उन्होंने गलत जानकारी दी थी। इन सभी आधारों पर उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया और दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं। लेकिन, चूंकि उनके नामांकन फॉर्म में गंभीर खामियां थीं और तेलंगाना में दर्ज एक मामले को कथित तौर पर छिपाया गया था, इसलिए रिटर्निंग ऑफिसर ने इसी आधार पर उनका नामांकन खारिज कर दिया।

वहीं, प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा, "न्याय की जीत हुई है और हमारे कार्यकर्ता महेश केवट को आशीर्वाद मिला है। भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है। चुनाव नहीं हुए तो भी हमारे उम्मीदवार राज्यसभा सदस्य बने और अगर चुनाव होते तो भी वे राज्यसभा सदस्य बनते। हमें जो कागज मिले वह किसने दिए? हमारे पास तेलंगाना का कागज आ रहा है, जबकि तेलंगाना में सरकार इनकी है। " विजयवर्गीय के इस बयान ने कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह की ओर भी इशारा किया है।

कांग्रेस का पलटवार और आरोप

नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता मयंक राम नारायण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा का 'नारी शक्ति वंदन' का मुखौटा सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संख्या बल के बजाय सत्ता बल के भरोसे राजनीति कर रही है और राज्यसभा चुनाव में भी लोकतंत्र को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। मयंक राम नारायण ने आगे कहा कि जब कांग्रेस विधायक एकजुट नजर आए, तो भाजपा ने हार के डर से मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति लगाकर उसे खारिज कराने की साजिश रची।

राजनीतिक परिणाम और भविष्य

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से अब मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर मुकाबला लगभग समाप्त हो गया है। भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना अब महज एक औपचारिकता रह गई है। कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक विफलता मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी को उम्मीद थी कि वह अपने विधायकों के दम पर एक सीट हासिल कर लेगी और इस पूरे मामले ने चुनावी प्रक्रिया में दस्तावेजों की सटीकता और पारदर्शिता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस कानूनी और राजनीतिक झटके के बाद अपनी अगली रणनीति क्या तय करती है।

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