दिवाली रैली टालने को लेकर सीटीआई ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र, पढ़ें पूरी रिपोर्ट विस्तार से

दिल्ली के व्यापारियों ने 1 नवंबर की रैली को दिवाली के बाद टालने की मांग को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखा है।

Oct 30, 2026 - 12:35
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दिवाली रैली टालने को लेकर सीटीआई ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र, पढ़ें पूरी रिपोर्ट विस्तार से

दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने एक नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की प्रस्तावित रैली को लेकर पहले राहुल गांधी को पत्र लिखा था और अब उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। एक नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को लेकर चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई ने राहुल गांधी के बाद अब सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। सीटीआई का कहना है कि 31 अक्टूबर और एक नवंबर को दिल्ली में कारोबार ठप्प हो सकता है और इसे लेकर दिल्ली के 20 लाख व्यापारियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। सीटीआई ने अपने पत्र में लिखा है कि 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर का उदाहरण हमारे सामने पूरी तरह से मौजूद है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सिर्फ 5000 से 7000 लोग ही आए थे, तब भी 8 घंटे तक सेंट्रल दिल्ली में भीषण जाम लगा रहा था। अब जब 10 लाख लोग आ रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में दिल्ली का क्या हाल होगा, इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है।

सीटीआई की सोनिया गांधी जी से दो प्रमुख मांगें

व्यापारी संगठन सीटीआई ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के सामने अपनी दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि एक नवंबर की इस प्रस्तावित रैली को दिवाली के बाद यानी 10 और 11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली के पावन पर्व पर कारोबार में किसी भी प्रकार का विघ्न ना पड़े। दूसरी मांग यह है कि अगर रैली करनी ही है, तो इसे मध्य दिल्ली के रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में आयोजित किया जाए, जहां लगभग 15000 गाड़ियों की पार्किंग की बड़ी जगह आसानी से उपलब्ध है। सीटीआई ने सोनिया गांधी से आग्रह करते हुए कहा है कि ये 20 बाजार केवल साधारण बाजार नहीं हैं, बल्कि ये पूरी दिल्ली की असली धड़कन हैं। इन बाजारों में रोजाना 10 हजार करोड़ रुपये से लेकर 12 हजार करोड़ रुपये तक का विशाल कारोबार होता है।

व्यापारियों में धनतेरस और दीपावली के माल को लेकर चिंता

छह नवंबर को धनतेरस का त्योहार है और व्यापारी इस बात से बेहद डरे हुए हैं कि अगर 31 अक्टूबर और एक नवंबर को मध्य दिल्ली में लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई और भारी चक्का जाम लग गया, तो उनका धनतेरस और दीपावली का माल समय पर कैसे आएगा और कैसे जाएगा। इसके अलावा, रोजाना 3 लाख से 4 लाख लोग दिल्ली के आसपास के शहरों और छोटे-छोटे कस्बों से दिल्ली के अलग-अलग प्रमुख बाजारों में खरीदारी करने के लिए आते हैं, वे भी इस भारी जाम और प्रतिबंधों के कारण आने से पूरी तरह कतराएंगे। सीटीआई ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि आदरणीय सोनिया जी, आपने हमेशा देश के छोटे व्यापारी की आवाज को बहुत ध्यान से सुना है। हमें पूरी उम्मीद है कि आप हमारी इस महत्वपूर्ण विनती को सुनेंगी और रैली को दिवाली के बाद के लिए स्थगित कर देंगी। हमने राहुल गांधी जी से भी इस संबंध में गुहार लगाई थी, लेकिन उन्होंने इसे मना कर दिया। अब देश के व्यापारियों की आखिरी उम्मीद केवल और केवल आपसे ही बची है।

अन्य विपक्षी नेताओं को भी लिखा गया पत्र

राहुल और सोनिया गांधी के अलावा दिल्ली के विभिन्न व्यापारी संगठनों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी औपचारिक चिट्ठी लिखी है। सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन फेडरेशन और किराना कमेटी दिल्ली ने साफ शब्दों में कहा है कि इस रैली के कारण त्योहारी सीजन के दौरान कई प्रमुख थोक बाजारों में कारोबार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। व्यापारी संगठनों ने अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से विशेष आग्रह किया है कि वे इंडिया ब्लॉक के सदस्य दलों के बड़े नेता होने के नाते कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष इस मामले को प्रमुखता से उठाएं और यादव और बनर्जी को लिखे गए इन पत्रों में संगठनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि धनतेरस से लेकर दिवाली के बीच दिल्ली में लगभग 25000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यापार होता है।

विरोध प्रदर्शनों और रैलियों से हुआ भारी नुकसान

संगठनों ने बताया कि सितंबर और अक्टूबर के महीनों में हुए विभिन्न विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को पहले ही लगभग 3000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ चुका है। इसके ऊपर, व्यापारी संगठनों ने बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि खरीदारी के इस बेहद चरम मौसम के दौरान एक और बड़ी राजनीतिक सभा होने से 10000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान और हो सकता है। उन्होंने यह भी विस्तार से बताया कि इसका प्रभाव केवल व्यापारियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर श्रमिकों, डिलीवरी कर्मियों और अन्य तमाम उन लोगों तक भी तेजी से फैलेगा जिनकी दैनिक आजीविका पूरी तरह से इन व्यावसायिक गतिविधियों पर ही निर्भर करती है। संगठनों ने अंत में विस्तार से बताया कि मध्य दिल्ली के रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में सदर बाजार, खारी बावली और चांदनी चौक सहित लगभग 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार आते हैं जो इस व्यवधान से सीधे प्रभावित होंगे।

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