रिलायंस जियो आईपीओ: 17 बैंक नियुक्त, 4 अरब डॉलर का होगा इश्यू

रिलायंस जियो ने अपने 4 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए 17 बैंकों को नियुक्त किया है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा।

Mar 19, 2026 - 09:35
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रिलायंस जियो आईपीओ: 17 बैंक नियुक्त, 4 अरब डॉलर का होगा इश्यू

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की दूरसंचार इकाई, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के प्रबंधन के लिए 17 निवेश बैंकों की नियुक्ति की है। सूत्रों के अनुसार, यह आईपीओ पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) संरचना पर आधारित होगा। इसका अर्थ है कि कंपनी नए शेयर जारी करके कोई नई पूंजी नहीं जुटाएगी, बल्कि इसके मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा सार्वजनिक निवेशकों को बेचेंगे।

रिलायंस जियो वर्तमान में 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी है। कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सेवाओं का विस्तार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी किया है और इस आईपीओ के माध्यम से रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी डिजिटल और टेलीकॉम शाखा के मूल्यांकन को बाजार में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

17 प्रमुख वित्तीय सलाहकारों की नियुक्ति

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, रिलायंस जियो ने इस बड़े निर्गम के लिए वैश्विक और घरेलू स्तर के 17 बैंकों को सलाहकार के रूप में चुना है। इन बैंकों में अमेरिकी दिग्गज सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली, बैंक ऑफ अमेरिका और जेपी मॉर्गन शामिल हैं और भारतीय निवेश बैंकों में एक्सिस कैपिटल, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, आईआईएफएल और कोटक महिंद्रा कैपिटल को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। ये बैंक आईपीओ के मूल्य निर्धारण, मार्केटिंग और नियामक प्रक्रियाओं का प्रबंधन करेंगे।

ऑफर फॉर सेल (OFS) की संरचना

यह आईपीओ पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' के रूप में बाजार में आएगा। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स इस प्रक्रिया के माध्यम से कोई नया फंड जुटाने की योजना नहीं बना रही है। इसके बजाय, कंपनी के वर्तमान निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलने या आंशिक रूप से अपनी होल्डिंग कम करने का विकल्प चुनेंगे। इससे कंपनी के पास कोई अतिरिक्त नकदी नहीं आएगी, लेकिन बाजार में इसके शेयरों की तरलता बढ़ेगी।

आईपीओ का संभावित आकार और मूल्यांकन

बाजार के अनुमानों और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, रिलायंस जियो का आईपीओ 4 अरब डॉलर (लगभग ₹33,000 करोड़ से अधिक) का हो सकता है। यदि यह इस स्तर पर पहुंचता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। रिलायंस जियो ने पिछले छह वर्षों में अपनी बाजार हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाया है और अब यह देश के दूरसंचार क्षेत्र में अग्रणी स्थान पर है।

प्रमुख वैश्विक निवेशकों की भागीदारी

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में दुनिया के कई बड़े निजी इक्विटी और निवेश फंडों ने निवेश किया है। इनमें केकेआर (KKR), जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) जैसे नाम शामिल हैं। इन निवेशकों ने 2020 के दौरान कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। आईपीओ के माध्यम से इन संस्थागत निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी का मूल्यांकन करने और उसे सार्वजनिक बाजार में पेश करने का अवसर मिलेगा।

सेबी के पास आवेदन की समयसीमा

रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस जियो इसी महीने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास आईपीओ के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है। नियामक की मंजूरी मिलने के बाद ही आईपीओ की सटीक तारीखों और मूल्य बैंड की घोषणा की जाएगी। कंपनी इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की योजना बना रही है ताकि बाजार की अनुकूल स्थितियों का लाभ उठाया जा सके।

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