विदेश यात्रा में यूपीआई पेमेंट पर 0 दशमलव 4 प्रतिशत फीस का सच: जानें 11 देशों का गणित
एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0 दशमलव 4 प्रतिशत एमडीआर केवल घरेलू मर्चेंट्स पर लगेगा। 11 देशों में अंतरराष्ट्रीय भुगतान अप्रभावित रहेंगे।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने हाल ही में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के लिए एक नए ढांचे की घोषणा की है जिसने डिजिटल भुगतान का उपयोग करने वाले लोगों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। इस बदलाव का मुख्य बिंदु 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0 दशमलव 4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करना है। यह नया नियम 15 अक्टूबर से प्रभावी होने जा रहा है। जैसे ही यह खबर सामने आई भारत से बाहर यात्रा करने वाले पर्यटकों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों (एनआरआई) के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या अब फ्रांस या सिंगापुर जैसे देशों में यूपीआई से भुगतान करना महंगा हो जाएगा।
11 देशों में फैला यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
इस स्थिति को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यूपीआई की पहुंच किन देशों तक है और एनपीसीआई की अंतरराष्ट्रीय शाखा एनआईपीएल के माध्यम से यूपीआई वर्तमान में दुनिया के 11 प्रमुख देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है। यूरोप और मध्य पूर्व में फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और ग्रीस इस सूची में शामिल हैं। वहीं दक्षिण और पूर्वी एशिया में सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव, कंबोडिया और मॉरीशस में यूपीआई सक्रिय है। इन देशों में भारतीय यात्री स्थानीय क्यूआर कोड को स्कैन करके सीधे अपने भारतीय बैंक खाते से भुगतान कर सकते हैं। आशंका यह थी कि घरेलू स्तर पर लागू होने वाला 0 दशमलव 4 प्रतिशत का शुल्क इन अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट पॉइंट्स पर भी लगेगा जिससे विदेश यात्रा का खर्च बढ़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन पर स्पष्टीकरण
एनपीसीआई और वित्तीय विशेषज्ञों ने इस भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन के नियम पूरी तरह अलग हैं। 15 अक्टूबर से लागू होने वाला 0 दशमलव 4 प्रतिशत एमडीआर का ढांचा केवल भारत में पंजीकृत व्यापारियों (मर्चेंट्स) के लिए है। विदेशों में होने वाले यूपीआई भुगतान क्रॉस-बॉर्डर फॉरेक्स नियमों और एनआईपीएल के विदेशी पार्टनर बैंकों के साथ हुए समझौतों के आधार पर चलते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि आप फ्रांस में पेस्ट्री खरीदते हैं या सिंगापुर में खरीदारी करते हैं तो उस पर भारत का घरेलू एमडीआर नियम लागू नहीं होगा। विदेशी मर्चेंट आउटलेट्स पर यूपीआई भुगतान करने वाले भारतीय पर्यटकों पर इस नए शुल्क का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और उनकी भुगतान प्रक्रिया पहले की तरह ही पारदर्शी बनी रहेगी।
विदेशों में कैसे काम करता है यूपीआई भुगतान?
जब कोई भारतीय उपयोगकर्ता सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट या फ्रांस के एफिल टॉवर के पास किसी मर्चेंट का क्यूआर कोड स्कैन करता है तो राशि उसके भारतीय बैंक खाते से भारतीय रुपये में ही कटती है। भुगतान को अंतिम रूप देने से पहले यूपीआई ऐप पर उस समय की मुद्रा विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) और मानक फॉरेक्स शुल्क स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। ये शुल्क बैंक और अंतरराष्ट्रीय पेमेंट गेटवे द्वारा तय किए जाते हैं न कि नए एमडीआर नियमों द्वारा। इस प्रकार विदेशों में यूपीआई का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए डिजिटल भुगतान का अनुभव सुरक्षित और अतिरिक्त घरेलू शुल्कों से मुक्त बना रहेगा।
भारत में हुए बदलावों का विस्तृत विवरण
भारत के भीतर होने वाले बदलावों की बात करें तो सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के 'क्लिक-एंड-पे' मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0 दशमलव 4 प्रतिशत का शुल्क लगेगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि मर्चेंट इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम सेवा, बीमा और ईंधन जैसी विशेष श्रेणियों के लिए एनपीसीआई ने 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज तय किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा चाहे राशि कितनी भी हो।
यात्रियों और प्रवासियों के लिए निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों या 11 समर्थित देशों में रहने वाले प्रवासियों को नए एमडीआर नियमों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। 0 दशमलव 4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क केवल घरेलू भारतीय मर्चेंट इकोसिस्टम के लिए है और इसका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के बाहर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आपकी अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान प्रक्रिया पहले की तरह ही सुचारू और निशुल्क बनी रहेगी। सरकार और एनपीसीआई का उद्देश्य यूपीआई को आम नागरिक के लिए एक मुफ्त और सुलभ उपकरण बनाए रखना है जबकि घरेलू स्तर पर मर्चेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करना है।
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