विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त का यूपी दौरा रद्द, निर्वाचन आयोग ने बताया स्थगन का कारण
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा एसआईआर विवाद के बीच रद्द। चुनाव आयोग ने प्रक्रियात्मक कारणों का हवाला दिया, जबकि विपक्ष ने देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया।
एसआईआर (SIR) को लेकर शुरू हुए राजनीतिक विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण दौरा रद्द कर दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त को मेरठ और वाराणसी में जेन-जी (Gen-Z) संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा लेना था। उनके यूपी दौरे के अचानक स्थगित होने के बाद अब निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक सफाई भी सामने आ गई है। इस दौरे के रद्द होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को घेरना शुरू कर दिया है।
मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रमों का पूरा विवरण
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 25 सितंबर को मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) में युवाओं यानी जेन-जी के साथ संवाद करना था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नए मतदाताओं और युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था। इसके पश्चात, 28 सितंबर को वाराणसी में भी इसी तरह का एक युवाओं से संवाद का कार्यक्रम प्रस्तावित था। हालांकि, अब इन दोनों ही कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन दो विशेष सम्मेलनों को स्थगित करने का निर्णय 21 सितंबर को ही ले लिया गया था।
चुनाव आयोग ने स्थगन पर क्या सफाई दी?
मुख्य चुनाव आयुक्त का यूपी दौरा स्थगित होने पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, कार्यक्रमों की तिथियों में समायोजन विभिन्न कारकों जैसे कि आयोजन स्थलों की उपलब्धता, उच्च अधिकारियों के व्यस्त कार्यक्रम और प्राकृतिक कारणों की वजह से आवश्यक हो जाता है। आयोग ने यह भी तर्क दिया कि ऐसे कई अवसर पहले भी आए हैं जब ईएलसी (ELC) सम्मेलनों को स्थगित किया गया है या उनकी तारीखों में बदलाव किया गया है। आयोग ने उदाहरण देते हुए बताया कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड में भी इसी तरह कार्यक्रमों की तिथियों में बदलाव किया गया था।
विपक्षी दलों का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने एसआईआर के मुद्दे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आज देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है और कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है और प्रदर्शन की बात कही है। दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे, जबकि वामपंथी दल जंतर-मंतर पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है।
क्या है एसआईआर विवाद और आपत्तियों का मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ एक अखबार की रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया था कि दो निर्वाचन आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इन दोनों आयुक्तों ने पिछले कुछ महीनों में 14 बार फैसलों को लेने की प्रक्रिया पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इन दावों ने चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक न होने के संकेत दिए, जिसे विपक्ष ने एक बड़े मुद्दे के रूप में लपक लिया है।
चुनाव आयोग का आंतरिक प्रक्रिया पर पक्ष
अखबार के दावों और विपक्षी हमलों पर जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत और टिप्पणियां सामने आना एक सामान्य और स्वस्थ प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव आयोग द्वारा पिछले एक साल में जितने भी आदेश जारी किए गए हैं, वे सभी आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का ही परिणाम हैं। आयोग ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आंतरिक चर्चाओं में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा सामूहिक और एकमत होता है। फिलहाल, इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
What's Your Reaction?