PPF Withdrawal Rules: 15 साल से पहले निकालें पैसा, जानें नियम और तरीका
पीपीएफ खाते से 15 साल की मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने के नियमों को विस्तार से जानें। आंशिक निकासी की सीमा और समय से पहले खाता बंद करने की शर्तों की पूरी जानकारी।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ को भविष्य को सुरक्षित और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने का एक बेहतरीन माध्यम माना जाता है। अधिकांश निवेशक इसमें लंबी अवधि के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर निवेश करते हैं, क्योंकि इसकी मैच्योरिटी अवधि 15 साल निर्धारित की गई है। हालांकि, कई बार निवेशकों के मन में यह भ्रांति रहती है कि पीपीएफ में जमा किया गया पैसा 15 साल की पूरी अवधि समाप्त होने से पहले किसी भी स्थिति में नहीं निकाला जा सकता है। यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। भारत सरकार ने खाताधारकों की वित्तीय जरूरतों और आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैच्योरिटी से पहले भी रकम निकालने के लिए विशेष नियम बनाए हैं। पीपीएफ से पैसा निकालने की प्रक्रिया और इसके नियम सामान्य बचत खाते से काफी अलग और विशिष्ट होते हैं, जिन्हें समझना हर निवेशक के लिए अत्यंत आवश्यक है।
7वें वित्त वर्ष से निकासी की शुरुआत
पीपीएफ खाते से आंशिक निकासी की सुविधा खाता खोलने के तुरंत बाद उपलब्ध नहीं होती है। नियमों के अनुसार, आप अपने खाते से थोड़ा पैसा यानी आंशिक निकासी 7वें वित्त वर्ष से शुरू कर सकते हैं। इसके लिए यह अनिवार्य शर्त है कि जिस वर्ष आपने अपना खाता खोला है, उसके बाद कम से कम पांच वित्त वर्ष पूरे हो चुके हों। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक ने अपना पीपीएफ खाता वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान खोला है, तो पांच वित्त वर्ष की गणना के बाद वह वित्त वर्ष 2026-27 से अपने खाते से पैसा निकालने का पात्र हो जाएगा। यह नियम सुनिश्चित करता है कि निवेश की निरंतरता बनी रहे और निवेशक को एक निश्चित समय के बाद ही तरलता का लाभ मिले।
खाते से कितना पैसा निकाल सकते हैं
पीपीएफ से पैसा निकालने की एक अधिकतम सीमा तय की गई है ताकि आपके भविष्य के लिए जमा पूंजी पूरी तरह खत्म न हो जाए। निकासी की राशि तय करने के लिए दो तरह के बैलेंस की जांच की जाती है। पहला यह कि पिछले वित्त वर्ष के अंत में आपके खाते में कुल कितनी राशि जमा थी। दूसरा यह कि जिस साल आप पैसा निकाल रहे हैं, उससे ठीक चार साल पहले आपके खाते में कितना बैलेंस था। नियम के मुताबिक, इन दोनों में से जो भी रकम कम होगी, उसका 50 प्रतिशत हिस्सा ही आप निकाल सकते हैं। यह गणना निवेशक को एक बड़ी राशि उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है।
उदाहरण से समझें निकासी का गणित
इस नियम को एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है और मान लीजिए कि पिछले वित्त वर्ष के अंत में आपके पीपीएफ खाते में 800000 रुपये जमा थे। वहीं, चार साल पहले आपके खाते का बैलेंस 600000 रुपये था। ऐसी स्थिति में, 600000 रुपये को ही आधार माना जाएगा क्योंकि यह दोनों में से कम राशि है। इस आधार पर आप अधिकतम 50 प्रतिशत यानी 300000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं। खाताधारकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक वित्त वर्ष के दौरान केवल एक बार ही पैसा निकालने की अनुमति दी जाती है।
15 साल की मैच्योरिटी के बाद क्या हैं विकल्प
पीपीएफ की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है, जिसकी गणना खाता खुलने वाले वित्त वर्ष के अंत से की जाती है। 15 साल पूरे होने पर खाताधारक के पास कई विकल्प होते हैं। पहला विकल्प यह है कि आप पूरी जमा राशि को ब्याज सहित निकाल सकते हैं और खाता बंद कर सकते हैं और यदि आपको तुरंत पैसों की आवश्यकता नहीं है, तो आप इसे आगे भी जारी रख सकते हैं। इसके दो तरीके हैं: पहला, आप बिना कोई नया पैसा जमा किए खाते को चालू रख सकते हैं, जिस पर आपको नियमानुसार ब्याज मिलता रहेगा। दूसरा, यदि आप निवेश जारी रखना चाहते हैं, तो पीपीएफ खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है।
खाते को समय से पहले बंद करने की विशेष शर्तें
सामान्य परिस्थितियों में मैच्योरिटी से पहले पूरा पैसा नहीं निकाला जा सकता और न ही खाता बंद किया जा सकता है और लेकिन कुछ विशेष और गंभीर स्थितियों में, खाता खोलने के 5 साल पूरे होने के बाद पीपीएफ अकाउंट को समय से पहले बंद करने की अनुमति दी जाती है। इन शर्तों में खाताधारक, उनके जीवनसाथी या आश्रित बच्चों की किसी गंभीर बीमारी का इलाज शामिल है। इसके अलावा, खाताधारक या उनके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भी खाता बंद कर पैसा निकाला जा सकता है। यदि खाताधारक की आवासीय स्थिति बदल जाती है और वह एनआरआई बन जाता है, तो भी खाता बंद करने का प्रावधान है। हालांकि, समय से पहले खाता बंद करने पर एक शर्त यह है कि आपको मिलने वाले कुल ब्याज में 1 प्रतिशत की कटौती की जाती है।
खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में नियम
यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण कारण से खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो पीपीएफ के मैच्योरिटी नियमों में ढील दी जाती है। ऐसी स्थिति में, मैच्योरिटी की 15 साल की अवधि का इंतजार करना जरूरी नहीं होता है। खाते में जमा पूरी रकम ब्याज सहित नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को सौंप दी जाती है। पीपीएफ को एक लंबी अवधि का निवेश माना जाना चाहिए और इसे रोजमर्रा के खर्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते के रूप में नहीं देखना चाहिए। लेकिन आपातकालीन स्थितियों में इसकी निकासी और समय से पहले बंद करने की सुविधाएं निवेशकों के लिए बहुत मददगार साबित होती हैं।
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