शेख हसीना का बड़ा खुलासा: बांग्लादेश प्रदर्शन छात्रों का आंदोलन नहीं बल्कि एक संगठित राजनीतिक साजिश थी
शेख हसीना ने अपने निष्कासन की दूसरी बरसी पर कहा कि 2024 का आंदोलन छात्रों का नहीं बल्कि एक संगठित राजनीतिक साजिश थी।
बांग्लादेश से अपने निष्कासन की दूसरी बरसी के अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेशी आवामी लीग की अध्यक्षा शेख हसीना ने एक अत्यंत भावुक और महत्वपूर्ण संबोधन दिया। दो साल पहले बांग्लादेश में हुए व्यापक प्रदर्शनों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए शेख हसीना ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह कोई साधारण छात्र आंदोलन नहीं था। उन्होंने इसे एक सुनियोजित और संगठित विरोध प्रदर्शन करार दिया और हसीना के अनुसार, 15 जुलाई के बाद से उस विरोध प्रदर्शन का चरित्र पूरी तरह बदल गया था और लोग हिंसा तथा मारकाट पर उतारू हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ शुरू कर दी थी।
एक संगठित साजिश का दावा
शेख हसीना ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले दो वर्षों से उन्होंने अपने प्यारे बांग्लादेश को अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके निर्माण के लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में 30 लाख लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। हसीना ने बताया कि उनकी सरकार ने शुरू से ही बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के माध्यम से इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन सुधार की आड़ में कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को एक हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया।
आवामी लीग के नेताओं का कड़ा रुख
शेख हसीना के संबोधन से पहले, निर्वासन में रह रहे आवामी लीग के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी बात रखी। पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने बांग्लादेश की सत्ता के पूर्व सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला। नौफेल ने स्पष्ट किया कि वे बदला नहीं बल्कि न्याय चाहते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद को समर्थन न दिया जाए, क्योंकि वे बांग्लादेश को एक विफल राष्ट्र (फेल्ड स्टेट) बनते नहीं देखना चाहते। इसी क्रम में, अधिवक्ता शाह मोहम्मद बख्तियार ने मोहम्मद यूनुस के पूर्व शासनकाल की आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा शेख हसीना पर चलाए जा रहे मुकदमों को फर्जी करार दिया।
सुरक्षा और उग्रवाद पर चिंता
पूर्व राजनयिक और खुफिया अधिकारी अमीनुल हक पोलाश ने शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश में उग्रवाद की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में आतंकवाद और इस्लामी चरमपंथ में भारी वृद्धि देखी गई है, जो न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। राजनीतिक विश्लेषक अबू ओबैधा अरिन ने कहा कि शेख हसीना एक गहरी राजनीतिक साजिश के कारण निर्वासन में हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति के कारण बांग्लादेशी पासपोर्ट की रैंकिंग गिर गई है और लगभग 2 लाख छात्र देश में फंसे हुए हैं जो विदेश यात्रा नहीं कर पा रहे हैं।
आर्थिक प्रगति और वापसी का संकल्प
अबू ओबैधा अरिन ने दावा किया कि शेख हसीना ने बांग्लादेश को बिना तारों वाले बिजली के खंभों के देश से निकालकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया था और उन्होंने पिछली बीएनपी सरकार पर आरोप लगाया कि उस समय ठेके हासिल करने के लिए 10 प्रतिशत कमीशन देना अनिवार्य था। अरिन ने विश्वास जताया कि युवा फिर से एकजुट हो रहे हैं और शेख हसीना की वापसी पर सभी एक साथ खड़े होंगे। उन्होंने सवाल किया कि 17 करोड़ लोगों की आबादी वाले देश में कितने लोगों का मुंह बंद किया जा सकता है। पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि महिलाओं, अल्पसंख्यकों और पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकना अनिवार्य है और इसी भावना के साथ शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का निर्णय लिया है, वह बदला लेने के लिए नहीं बल्कि शांति और न्याय के लिए लौट रही हैं।
#LISTEN | In a virtual interaction with the media in Delhi, former Bangladesh PM Sheikh Hasina says, "For the last two years, I watched my beloved Bangladesh suffer...This is not the Bangladesh we built, this is not the Bangladesh for which 3 million people sacrificed their lives… pic.twitter.com/E3JnV5eYgw— ANI (@ANI) August 5, 2026
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