शेयर बाजार में ऐतिहासिक उछाल: निफ्टी 24000 के पार, जानें तेजी के बड़े कारण
निफ्टी 50 ने पहली बार 24000 का स्तर पार किया और सेंसेक्स में 250 अंकों की तेजी आई। जानें कैसे अमेरिका-ईरान शांति समझौते और कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
भारतीय शेयर बाजार ने आज के कारोबारी सत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर पर पहुंचते हुए पहली बार 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। बाजार में आई इस जबरदस्त तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर में हुई जोरदार खरीदारी का बड़ा हाथ है। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों के उत्साह ने बाजार को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया, जहां सेंसेक्स में भी 250 अंकों से अधिक की बढ़त देखी गई। इस बड़ी तेजी के मुख्य कारणों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला संभावित शांति समझौता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट शामिल है। बाजार में लगातार चौथे दिन यह बढ़त का सिलसिला जारी है, जिससे आम निवेशकों के बीच भरोसे का माहौल और मजबूत हुआ है।
सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआती चाल का विवरण
आज सुबह बाजार खुलते ही चारों तरफ खरीदारी का माहौल देखने को मिला। सुबह करीब 09 बजकर 48 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 237 अंक 32 पैसे यानी 0 दशमलव 31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77045 अंक 80 पैसे के स्तर पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स ने 284 अंक 69 पैसे की छलांग लगाई और 77093 अंक 17 पैसे के उच्च स्तर को छू लिया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 भी 68 अंक 5 पैसे या 0 दशमलव 28 प्रतिशत की तेजी के साथ 24057 अंक 20 पैसे पर टिका हुआ था। ट्रेडिंग के पहले ही घंटे में निफ्टी ने 24067 अंक 55 पैसे का ऊपरी स्तर छूकर नया रिकॉर्ड बनाया। केवल बड़े शेयरों में ही नहीं, बल्कि मझोले और छोटे शेयरों में भी अच्छी रौनक देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में आधा-आधा फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों के भीतर बाजार पहले ही 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हासिल कर चुका था।
ग्लोबल मार्केट से मिले दो बड़े सकारात्मक संकेत
बाजार की इस अचानक और बड़ी तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हो रहे सुधारों का बड़ा योगदान है। शुक्रवार 19 जून को जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबर ने दुनिया भर के निवेशकों को बड़ी राहत दी है। इस समझौते की खबर से वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। इसके अतिरिक्त, रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही अब सामान्य हो गई है। सप्लाई चेन की बाधाएं दूर होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव टूटकर 79 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है, जो कुछ समय पहले तनावपूर्ण स्थितियों के कारण 120 डॉलर के करीब पहुंच गया था। भारत जैसे देश के लिए कच्चा तेल सस्ता होना बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे कंपनियों की उत्पादन लागत घटती है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
आईटी सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान
आज के कारोबार की एक विशेष बात यह रही कि मेटल और रियल्टी सेक्टर ने बाजार पर दबाव बनाने की कोशिश की। इन दोनों सेक्टर्स के इंडेक्स में आधा फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही थी। इसके साथ ही बैंकिंग सेक्टर के सरकारी और प्राइवेट बैंकों के शेयरों में भी हल्की सुस्ती का माहौल था। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आईटी सेक्टर ने अकेले दम पर बाजार को ऊपर खींचने का काम किया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे पूरे मार्केट की धारणा सकारात्मक बनी हुई है। आईटी शेयरों में आई इस तेजी ने अन्य क्षेत्रों की गिरावट की भरपाई कर दी और निफ्टी को 24000 के पार ले जाने में मदद की।
इंडिया विक्स और एशियाई बाजारों की स्थिति
बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की घबराहट को मापने वाला सूचकांक इंडिया विक्स फिलहाल 0 दशमलव 16 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 13 दशमलव 39 पर बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब यह इंडेक्स 13 से 17 के बीच रहता है, तो इसे निवेश के लिए बेहद सुरक्षित माना जाता है। इसका संकेत यह है कि आने वाले दिनों में बाजार में किसी बड़े झटके या भारी अस्थिरता की संभावना कम है। वहीं अगर एशियाई बाजारों पर नजर डालें तो वहां मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई और सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम्स में 1-1 फीसदी से ज्यादा की तेजी है, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। हालांकि चीन और ताइवान के बाजारों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसका भारतीय बाजार के मजबूत सेंटिमेंट पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।
What's Your Reaction?