जंतर मंतर पर अपराधियों की एंट्री पर अभिजीत दिपके ने उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर 2100 अपराधियों की मौजूदगी पर दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और छात्रों के उत्पीड़न पर चेतावनी दी।
'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर अपराधियों के प्रवेश को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। टीवी9 भारतवर्ष मराठी से बातचीत के दौरान, दिपके ने दिल्ली पुलिस के उन दावों पर प्रतिक्रिया दी जिसमें विरोध प्रदर्शन स्थल पर अपराधियों की मौजूदगी की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा कि आखिर अपराधी इतने सुरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्र में खुलेआम कैसे घूम सकते हैं, जबकि आम प्रदर्शनकारियों को कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है।
सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत अनुभव
दिपके ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि उन्हें खुद भी बिना गहन चेकिंग के प्रवेश नहीं मिलता था। ऐसे में दिल्ली पुलिस का यह दावा कि वहां 2100 अपराधी मौजूद थे, कई सवाल खड़े करता है। दिपके ने सवाल किया कि इन सभी लोगों को जंतर-मंतर पर एंट्री कैसे मिल गई? उन्होंने इसे दिल्ली पुलिस की एक बड़ी विफलता करार दिया और कहा कि यह सवाल सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन से पूछा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि पुलिस को इन अपराधियों की मौजूदगी का पता अब क्यों चला।
राजनीतिक प्रभाव और युवाओं की शक्ति
अभिजीत दिपके ने हालिया आंदोलनों के राजनीतिक परिणामों पर भी बात की। उन्होंने उल्लेख किया कि कुछ लोग यह दावा करते थे कि वर्तमान सरकार में कोई इस्तीफा नहीं होता है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 साल से किसी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया था। लेकिन, दिपके के अनुसार, देश के युवाओं की ताकत ने इस स्थिति को बदल दिया है और उन्होंने कहा कि युवाओं के दबाव के कारण ही एक मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा है, जो युवाओं की एकजुटता की जीत है।
छात्रों का उत्पीड़न और कानूनी मामले
छात्रों के उत्पीड़न के मुद्दे पर बात करते हुए दिपके ने कहा कि सरकार ने पहले यह भरोसा दिलाया था कि आंदोलन खत्म होने पर छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी केस वापस ले लिए जाएंगे। सरकार ने यह वादा भी किया था कि छात्रों को किसी भी प्रकार का उत्पीड़न नहीं झेलना पड़ेगा। हालांकि, दिपके ने चिंता जताई कि अब देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि छात्रों के खिलाफ अभी भी मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जो सरकार के वादे के खिलाफ है।
नए आंदोलन की चेतावनी
दिपके ने बताया कि उन्होंने इस मामले को फिर से सरकार के सामने उठाया था, जिसके बाद अधिकारी सभी केस वापस लेने पर सहमत हुए थे। उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर छात्रों को परेशान करना बंद नहीं किया गया, तो वे एक और बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे और धरने पर बैठेंगे और इस चेतावनी के बाद बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की सरकारों ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि वे किसी भी प्रदर्शनकारी या छात्र को परेशान नहीं करेंगे। हालांकि, दिपके ने कहा कि दिल्ली समेत कुछ इलाकों में अभी तक केस वापस नहीं लिए गए हैं और उन्होंने कहा कि वे सरकार को मनाने की कोशिश कर रहे हैं और यदि वे नहीं माने, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
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