बेंजामिन नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किलें: अमेरिका ने 48 घंटों में इजराइल को दिए 4 बड़े झटके

अमेरिका ने इजराइल को 48 घंटों में 4 बड़े झटके दिए हैं। ईरान डील से बाहर करने और रक्षा मंत्री को वीजा न देने से नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ीं। पूरी खबर पढ़ें।

Jun 17, 2026 - 12:35
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बेंजामिन नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किलें: अमेरिका ने 48 घंटों में इजराइल को दिए 4 बड़े झटके

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर स्थितियां प्रतिकूल होती नजर आ रही हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर अमेरिका ने इजराइल को चार बड़े झटके दिए हैं, जिससे नेतन्याहू सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संकेत दिया है कि इजराइल और उसके सबसे करीबी सहयोगी अमेरिका के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। नेतन्याहू, जो अब तक अमेरिका के समर्थन को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते थे, अब खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

ईरान समझौते से इजराइल को रखा बाहर

पहला बड़ा झटका तब लगा जब अमेरिका ने ईरान समझौते की प्रक्रिया से इजराइल को पूरी तरह बाहर कर दिया। इजराइल की स्पष्ट मांग थी कि इस समझौते में ईरान द्वारा लंबी दूरी की मिसाइलों के निर्माण पर रोक लगाने के मुद्दे को शामिल किया जाए और इसके अतिरिक्त, इजराइल चाहता था कि इस समझौते के माध्यम से अन्य खाड़ी देशों को भी अब्राहम समझौते का हिस्सा बनाया जाए। हालांकि, अमेरिका ने इजराइल की इन शर्तों को नजरअंदाज कर दिया और उसे समझौते की बारीकियों से भी दूर रखा। इजराइल को अब तक उन शर्तों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है जिन पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बन रही है।

रणनीतिक अपमान और ट्रंप के कड़े बोल

दूसरा झटका अमेरिका द्वारा सूचना साझा करने से इनकार करना और राष्ट्रपति ट्रंप के बयान हैं। इजराइल ने अमेरिका से उस एमओयू की एक प्रति मांगी थी जिस पर हस्ताक्षर होने हैं, लेकिन अमेरिका ने इसे देने से साफ मना कर दिया। इसके साथ ही, मंगलवार 16 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजराइल की आलोचना की। ट्रंप ने कहा कि अगर वे नहीं होते, तो इजराइल अब तक बर्बाद हो गया होता और उन्होंने इजराइल की तुलना सीरिया से करते हुए उसे एक कमजोर राष्ट्र बताया और कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ लड़ने में सीरिया, इजराइल से बेहतर साबित हो सकता है। पेरिस में दिए गए ट्रंप के इस बयान ने नेतन्याहू सरकार की साख को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

व्हाइट हाउस से नहीं मिला मिलने का समय

तीसरा झटका अमेरिकी मीडिया सीएनएन की एक रिपोर्ट के जरिए सामने आया। मंगलवार 16 जून को प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करना चाहते हैं, लेकिन व्हाइट हाउस ने अभी तक उन्हें मिलने का समय नहीं दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डील पूरी होने के बाद ही उन्हें मिलने का वक्त दिया जा सकता है। यह नेतन्याहू के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार मानी जा रही है, क्योंकि अक्टूबर 2026 में इजराइल में प्रधानमंत्री पद के चुनाव होने हैं और नेतन्याहू इस चुनाव में जीत के लिए अमेरिकी समर्थन पर काफी निर्भर थे।

रक्षा मंत्री बेन ग्वीर को वीजा देने से इनकार

चौथा और सबसे व्यक्तिगत झटका इजराइल के रक्षा मंत्री बेन ग्वीर को लगा है और हार्तेज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने बेन ग्वीर को वीजा देने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री मियामी की यात्रा करना चाहते थे, लेकिन उन्हें आसानी से स्पेशल वीजा नहीं दिया गया। एक मित्र राष्ट्र के रक्षा मंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का स्पष्ट संकेत है। इसे इजराइल के लिए एक बड़े अपमान के रूप में देखा जा रहा है।

नेतन्याहू के अलग-थलग पड़ने के कारण

अमेरिका द्वारा नेतन्याहू को अकेला छोड़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं। ईरान युद्ध की शुरुआत में दोनों देश साथ थे, लेकिन समझौते के समय अमेरिका ने अपना रास्ता बदल लिया। इसका एक मुख्य कारण यह है कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देश ईरान के साथ समझौते के पक्ष में थे। नाटो सदस्य तुर्की ने भी कूटनीतिक रास्ता अपनाने का समर्थन किया। इसके अलावा, नेतन्याहू ने ट्रंप को भरोसा दिलाया था कि युद्ध शुरू होते ही ईरान में तख्तापलट हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इस गलत आकलन के कारण ट्रंप ने नेतन्याहू पर भरोसा करना कम कर दिया है। साथ ही, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इजराइल के वर्तमान रुख के विरोध में हैं, जिससे नेतन्याहू की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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