संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी: अब नक्शे पर यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से बड़ा दिखेगा अफ्रीका

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अफ्रीका का सही आकार दिखाने वाले नए नक्शे को मंजूरी दी है। 164 देशों के समर्थन वाले इस फैसले से 500 साल पुराने मर्केटर मैप की गलतियां सुधरेंगी।

Sep 5, 2026 - 12:35
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संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी: अब नक्शे पर यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से बड़ा दिखेगा अफ्रीका

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व मानचित्र के स्वरूप को बदलने के एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है और इस निर्णय के बाद अब दुनिया के नक्शे पर अफ्रीका महाद्वीप अपने वास्तविक और सही आकार में दिखाई देगा। लंबे समय से चले आ रहे भौगोलिक भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से लिए गए इस फैसले से अब अफ्रीका का चित्रण यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों की तुलना में अधिक सटीक होगा। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को टोगो द्वारा पेश किया गया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है।

वैश्विक मतदान और देशों का रुख

इस प्रस्ताव पर हुए मतदान के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में 164 देशों ने इसके पक्ष में अपना मत दिया। अफ्रीकी संघ के सदस्य देशों ने इस पहल का पुरजोर समर्थन किया और इसे भौगोलिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर वैश्विक सहमति पूरी तरह से एकतरफा नहीं थी। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस बदलाव का कड़ा विरोध किया और इसके खिलाफ वोट देने वाला वह एकमात्र देश रहा। इसके अलावा, 6 देशों ने मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और वे इससे बाहर रहे। हालांकि संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और मर्केटर मैप के इस्तेमाल पर कोई कानूनी रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन यह दुनिया भर के शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी निकायों और डिजिटल मानचित्र प्रदाताओं के लिए एक मजबूत दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करेगा और इस पूरे अभियान को करेक्ट द मैप नाम दिया गया है।

16वीं सदी के मर्केटर मैप की समस्या

दुनिया भर में पिछले 500 सालों से जिस नक्शे का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे मर्केटर मैप कहा जाता है। इसे 1569 में फ्लेमिश नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर द्वारा तैयार किया गया था। उस समय इस नक्शे को बनाने का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय नाविकों को समुद्र में रास्ता खोजने में मदद करना था। चूंकि पृथ्वी गोल है और उसे एक सपाट कागज पर दिखाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, इसलिए मर्केटर ने एक ऐसा प्रोजेक्शन तैयार किया जो दिशाओं के लिए तो सही था, लेकिन इसमें महाद्वीपों का आकार बिगड़ गया। इस नक्शे में भूमध्य रेखा के पास स्थित देश छोटे दिखाई देते हैं, जबकि ध्रुवों के पास स्थित देश अपने वास्तविक आकार से कहीं ज्यादा बड़े नजर आते हैं।

अफ्रीका और ग्रीनलैंड की तुलना

मर्केटर मैप की सबसे बड़ी त्रुटि अफ्रीका और ग्रीनलैंड की तुलना में दिखाई देती है। इस पुराने नक्शे में अफ्रीका और ग्रीनलैंड लगभग एक ही आकार के नजर आते हैं और जबकि वास्तविकता यह है कि अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गलतियों से अफ्रीका और भूमध्य रेखा के आसपास के देशों की वैश्विक अहमियत और उनकी विकास संबंधी जरूरतों को लोग वास्तविकता से कम आंकते हैं। नया प्रस्ताव इसी धारणा को बदलने की एक कोशिश है।

इक्वल अर्थ नक्शा और अफ्रीका की विशालता

मर्केटर मैप की कमियों को दूर करने के लिए साल 2018 में कार्टोग्राफरों ने इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन विकसित किया था। यह नक्शा महाद्वीपों के क्षेत्रफल को उनके वास्तविक अनुपात में दिखाता है। इसी साल फरवरी में अफ्रीकी संघ के सभी 54 सदस्य देशों ने इस नए नक्शे को अपनाने का फैसला किया था। उनका कहना है कि यह नक्शा अफ्रीका के विशाल भूभाग को सही ढंग से प्रदर्शित करता है। करेक्ट द मैप अभियान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अफ्रीका महाद्वीप इतना विशाल है कि इसके भीतर अमेरिका, चीन, भारत, जापान, मैक्सिको और यूरोप का एक बहुत बड़ा हिस्सा आसानी से समा सकता है और इसके बावजूद काफी जमीन बची रहेगी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने इस बदलाव पर अपनी राय रखते हुए कहा कि एक न्यायपूर्ण दुनिया की शुरुआत एक न्यायपूर्ण नक्शे से ही होती है। उनका मानना है कि नक्शे केवल कागज का टुकड़ा नहीं हैं, बल्कि वे लोगों की सोच और दुनिया को समझने के नजरिए को प्रभावित करते हैं। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरो ने भी इस बदलाव का समर्थन करते हुए कहा कि नक्शा बदलने से भले ही दुनिया न बदले, लेकिन एक गलत तस्वीर को सुधारना सच्चाई की ओर बढ़ने वाला कदम है।

दूसरी ओर, अमेरिका की संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय शांति, समृद्धि और देशों के बीच संबंधों जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शों पर। हालांकि, अफ्रीका नो फिल्टर की लेराटो मोगोएतलाथे का कहना है कि अफ्रीका को गलत आकार में दिखाना केवल एक तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि यह अफ्रीका के बारे में बनी वैश्विक धारणा का भी सवाल है। केन्याई जियोग्राफर किओको मुएंडो के अनुसार, नक्शे केवल रास्ता दिखाने का साधन नहीं होते, बल्कि वे किसी भी क्षेत्र की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक छवि को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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