संसद में प्रियंका गांधी का तीखा प्रहार: पूछा क्या छात्र आतंकवादी थे जो उनपर पैलेट गन चलाई
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद में एंटी पेपर लीक बिल 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार को घेरा और छात्रों पर पैलेट गन चलाने पर सवाल उठाए।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देश के युवाओं की स्थिति और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही एक बेहद गंभीर सवाल उठाया कि क्या देश के छात्र आतंकवादी थे जो उन पर पैलेट गन और AK-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल करने की नौबत आई? उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश आखिर किसने दिया था। उन्होंने पूछा कि क्या यह आदेश प्रधानमंत्री ने दिया था या गृह मंत्री ने, और कहा कि आज पूरा देश इस बात का जवाब मांग रहा है क्योंकि यह केवल कांग्रेस पार्टी का मुद्दा नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
छात्रों पर बल प्रयोग और सरकार की जवाबदेही
प्रियंका गांधी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सिस्टम बच्चों के भविष्य को कुचलने का काम कर रहा है और उन्होंने सवाल किया कि क्या पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना जायज नहीं है? उन्होंने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि जब बच्चे अपने हक के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तो उन पर लाठीचार्ज किया गया और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के नौजवानों से डरती है और उनकी पीड़ा का मजाक उड़ाती है। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि किसी की पीड़ा का उपहास नहीं उड़ाया जाना चाहिए और सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि युवाओं के खिलाफ इस तरह के कठोर कदम उठाने की अनुमति किसने दी थी।
शिक्षा तंत्र में आरएसएस का हस्तक्षेप और बजट पर सवाल
अपने भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने शिक्षा प्रणाली के भगवाकरण का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरे शिक्षा तंत्र में आरएसएस के प्रचारकों को भर दिया है जिससे यह सिस्टम अंदर से खोखला हो गया है। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को जबरदस्ती थोपने और पूरी व्यवस्था को सेंट्रलाइज यानी केंद्रीकृत करने की आलोचना की। उनके अनुसार, इस केंद्रीकरण ने मामलों को सुलझाने के बजाय और अधिक उलझा दिया है। बजट के आंकड़ों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि देश का शिक्षा बजट 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये है, जबकि अकेले NEET के बच्चों से 1 लाख 32 हजार करोड़ रुपये लिए जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि देश के कुल बजट में शिक्षा का हिस्सा हर साल बढ़ने के बजाय घट रहा है, जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
पेपर लीक के आंकड़े और माफिया पर कार्रवाई का अभाव
प्रियंका गांधी ने पिछले एक दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में पिछले 10 वर्षों में 152 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं और उनका भविष्य अंधकार में चला गया है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पेपर लीक होने के बावजूद आज तक किसी भी बड़े दोषी या पेपर लीक माफिया के सदस्य को कड़ी सजा नहीं दी गई है और उन्होंने इसे परीक्षा प्रणाली की पूर्ण विफलता करार दिया। उन्होंने एक भावनात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि एक तरफ महाराष्ट्र में एक परिवार अपनी बेटी की मौत का दुख मना रहा था, वहीं दूसरी तरफ सदन में पूर्व शिक्षा मंत्री का स्वागत किया जा रहा था। उन्होंने पूछा कि यह कैसा अहंकार है जहां आंखों में शर्म होने के बजाय सम्मान किया जा रहा है।
विधेयक की प्रभावशीलता और प्रधानमंत्री को सलाह
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर अपनी राय रखते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि केवल बिल लाने या कमेटियां बनाने से पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार द्वारा बनाई गई कमेटियों में गोमूत्र के विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो शिक्षा जैसे गंभीर विषय के लिए सही नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि उन्हें अपने सलाहकार बदलने चाहिए और सिस्टम में वास्तव में शिक्षित और योग्य लोगों को जगह देनी चाहिए और पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का पिछला रिकॉर्ड पहले से ही खराब रहा है। उन्होंने अंत में कहा कि आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z झूठ को बर्दाश्त नहीं करेगी और सरकार को पीआर के सहारे अपनी नैया पार लगाने के बजाय ठोस कदम उठाने होंगे।
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