समुद्री सुरक्षा के लिए सऊदी अरब ने बनाया 14 देशों का गठबंधन, ओमान और यूएई रहे बाहर

सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खतरों से निपटने के लिए 14 देशों का समुद्री गठबंधन बनाया है। जानें क्यों ओमान और यूएई इस गठबंधन का हिस्सा नहीं बने।

Jul 31, 2026 - 20:35
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समुद्री सुरक्षा के लिए सऊदी अरब ने बनाया 14 देशों का गठबंधन, ओमान और यूएई रहे बाहर

सऊदी अरब ने समुद्री सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की कोशिशों और विभिन्न जहाजों को निशाना बनाने की घटनाओं के बाद, सऊदी अरब ने लाल सागर, बाब अल-मंदेब और अदन की खाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 14 देशों का एक शक्तिशाली समुद्री गठबंधन बनाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का भी औपचारिक ऐलान कर दिया था। इस गठबंधन का प्राथमिक उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना है।

गठबंधन का गठन और रक्षा मंत्रालय का बयान

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार, 31 जुलाई को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस गठबंधन की घोषणा की। मंत्रालय के अनुसार, यह 14 देशों का गठबंधन सामूहिक समुद्री रक्षा सहयोग के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा। इस मंच के माध्यम से शामिल देश रणनीतिक समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेंगे और वैश्विक व्यापार में आने वाली किसी भी बाधा को रोकने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह गठबंधन अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले इन मार्गों पर नेविगेशन की सुविधा को सुदृढ़ करेगा।

क्षेत्रीय तनाव का संदर्भ

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष होर्मुज स्ट्रेट पर केंद्रित हो गया है। यह रास्ता विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस रास्ते के लगभग बंद होने की स्थिति से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है। हाल ही में तनाव बढ़ने के साथ, यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी मार्ग पर बार-बार हमले किए हैं। पिछले सप्ताह हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का भी ऐलान किया था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

भागीदारी और सदस्य देश

गठबंधन के गठन को लेकर आयोजित बैठक में कुल 51 देशों को निमंत्रण भेजा गया था, जिसमें से 43 देशों ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्की, कुवैत, बहरीन, कतर, जॉर्डन, मिस्र, पाकिस्तान, जिबूती, सोमालिया, बांग्लादेश, यमन, सूडान और कोमोरोस जैसे देश इस गठबंधन का हिस्सा बन चुके हैं या बनने की प्रक्रिया में हैं। ये देश मिलकर समुद्री खतरों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति पर काम करेंगे।

संचालन ढांचा और कार्यप्रणाली

सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, गठबंधन के सदस्य देश समुद्री खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करेंगे। इसके अलावा, ये देश संयुक्त ऑपरेशन चलाएंगे और नियमित रूप से सैन्य अभ्यास भी करेंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह गठबंधन पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य किसी विशेष देश को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ओमान और यूएई की दूरी के कारण

इस बड़े गठबंधन के बावजूद, क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण देशों, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान ने इससे दूरी बनाई है। इन दोनों देशों के शामिल न होने के पीछे उनके अपने रणनीतिक और कूटनीतिक कारण हैं।

ओमान ने क्यों बनाई दूरी?

  • ओमान लंबे समय से अपनी तटस्थ विदेश नीति के लिए जाना जाता है और वह क्षेत्रीय विवादों में शामिल होने से बचता है।
  • वह अक्सर क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता है और उसके ईरान तथा सऊदी अरब दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं।
  • यमन संघर्ष के मामले में भी ओमान ने हमेशा बातचीत और शांति प्रयासों पर जोर दिया है।
  • हूती विद्रोहियों और अन्य पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में ओमान कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है।

यूएई ने क्यों बनाई दूरी?

  • यूएई पहले से ही अमेरिका, फ्रांस और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रक्षा व्यवस्थाओं का हिस्सा है।
  • वह सऊदी अरब के नेतृत्व वाले नए सैन्य ढांचे के बजाय अपनी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना चाहता है।
  • सऊदी अरब और यूएई के बीच कुछ रणनीतिक मतभेद भी इस गठबंधन से दूरी बनाने की एक वजह माने जा रहे हैं।

बाब अल-मंदेब का सामरिक महत्व

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल समुद्री व्यापार का लगभग 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा और हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल 29 किलोमीटर चौड़ा है। ऐसी स्थिति में, यहाँ किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या रुकावट वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई से लेकर तेल और एलएनजी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

सऊदी अरब के लिए इस मार्ग की अहमियत

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब ने अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से तेल को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुँचाना शुरू किया है। इसके बाद, तेल निर्यात के लिए जहाजों को अनिवार्य रूप से बाब अल-मंदेब से होकर गुजरना पड़ता है और हूतियों द्वारा बाब अल-मंदेब में सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी के ऐलान ने सऊदी की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिसके कारण उसे इस 14 देशों के गठबंधन की पहल करनी पड़ी है।

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