हनुमान अंश का असर: बाबा नीम करोली के कैंची धाम में उमड़ी भारी भीड़
फिल्म हनुमान अंश की सफलता के बाद कैंची धाम में बाबा नीम करोली के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। रोजाना 6 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीम करौली, जिन्हें बाबा नीब करौरी के नाम से भी जाना जाता है, और उनके कैंची धाम की ख्याति आज विश्व स्तर पर फैली हुई है। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक/मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां इस पावन धाम के दर्शन कर चुकी हैं और हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा नीब करौरी के दर्शन के लिए कैंची धाम पहुंचते हैं। भक्तों के बीच यह अटूट मान्यता है कि बाबा नीब करौरी साक्षात हनुमान जी के अवतार थे और उन्हें एक चमत्कारिक सिद्ध पुरुष व असीम करुणा वाले संत के रूप में पूजा जाता है। हालांकि, इन दिनों फिल्म 'हनुमान अंश' के कारण बाबा नीब करौरी और कैंची धाम की चर्चा पूरे देश में एक बार फिर तेज हो गई है। इस फिल्म ने लोगों के मन में बाबा और इस स्थान के प्रति जिज्ञासा को और भी अधिक बढ़ा दिया है।
हनुमान अंश फिल्म की अभूतपूर्व सफलता
हाल ही में रिलीज हुई बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' ने देश और दुनिया में जबरदस्त सुर्खियां बटोरी हैं। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म की निर्माण लागत मात्र 2 करोड़ रुपये थी, लेकिन इसने वर्ल्ड वाइड स्तर पर 408 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार किया है। फिल्म देखने के बाद देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में कैंची धाम पहुंच रहे हैं। कई लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि उस स्थान को साक्षात महसूस करने की एक कोशिश है जिसकी कहानी उन्होंने पर्दे पर देखी है। यही कारण है कि फिल्म के प्रदर्शन के बाद कैंची धाम में आने वाले लोगों की आवाजाही में स्थानीय स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है और अब यहां पहले के मुकाबले कहीं अधिक भीड़ जुटने लगी है।
श्रद्धालुओं के आंकड़े और पुलिस की रिपोर्ट
नैनीताल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, फिल्म के रिलीज होने के बाद कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। जहां पहले सामान्य दिनों में 4 हजार से 5 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या रोजाना 6 हजार से अधिक हो गई है। पहाड़ की भौगोलिक क्षमता और संकरी सड़कों के लिहाज से यह संख्या काफी अधिक मानी जा रही है। विशेष रूप से वीकेंड यानी शनिवार और रविवार को यह आंकड़ा 15 हजार से 20 हजार के करीब पहुंच जाता है। कैंची धाम नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर भवाली से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत शांत और आध्यात्मिक स्थल है। बाबा नीब करौरी महाराज का इस स्थान से बहुत गहरा लगाव था और फिल्म ने उनकी जीवन यात्रा को जिस तरह से दिखाया है, उसने लोगों में उस स्थान को देखने की इच्छा जगा दी है जहां बाबा ने अपनी साधना और सेवा का लंबा समय व्यतीत किया था।
9 महीने में 50 लाख श्रद्धालु और भविष्य की चुनौतियां
कैंची धाम के प्रति बढ़ती आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 के शुरुआती 9 महीनों में, यानी सितंबर माह तक, लगभग 50 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए हैं। इतनी विशाल संख्या में लोगों के आने से कैंची धाम अब केवल एक धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के सबसे बड़े धार्मिक-पर्यटन स्थलों में शुमार हो गया है। इस बढ़ती लोकप्रियता ने सरकार के सामने भी नई चुनौतियां पेश की हैं। अब चुनौती केवल श्रद्धालुओं को धाम तक सुरक्षित पहुंचाने की नहीं है, बल्कि बढ़ती भीड़ के प्रबंधन के लिए पूरे क्षेत्र के परिवहन और पर्यटन ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की भी है।
रोपवे परियोजना से सुगम होगा कैंची धाम का सफर
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार अब कई बड़ी योजनाओं पर काम कर रही है, जिसमें काठगोदाम से नैनीताल और रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम रोपवे का विस्तार सबसे प्रमुख है। वर्तमान में काठगोदाम से पहाड़ों की ओर जाने के लिए केवल सड़क मार्ग ही एकमात्र साधन है। घुमावदार पहाड़ी रास्ते, संकरी सड़कें और पर्यटन सीजन के दौरान वाहनों का अत्यधिक दबाव अक्सर यातायात की गंभीर समस्या पैदा करता है। ऐसे में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को भविष्य में कैंची धाम तक विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है, तो इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आवागमन का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा और यात्रा अधिक सुगम व समय की बचत करने वाली होगी।
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