10372 करोड़ का इंडिया एआई मिशन: नेटवेब और E2E नेटवर्क्स के शेयरों में हलचल
जानिए कैसे 10372 करोड़ रुपये का इंडिया एआई मिशन नेटवेब टेक्नोलॉजीज और E2E नेटवर्क्स के भविष्य को बदल रहा है और निवेशकों को दे रहा है बड़ा मौका।
भारत अब सिर्फ विदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों का खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता है और सरकार ने देश का अपना मजबूत डिजिटल ढांचा तैयार करने के लिए 10372 करोड़ रुपये के इंडिया एआई मिशन का बिगुल फूंक दिया है। इस बड़ी पहल के तहत स्वदेशी एआई मॉडल, भारतीय भाषाओं के डेटा सेट से लेकर सुपरफास्ट कंप्यूटर नेटवर्क तैयार किए जा रहे हैं। अब तक देशभर में 38000 से ज्यादा जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) लगाए जा चुके हैं। इस ऐतिहासिक कदम ने शेयर बाजार में भी बड़ी हलचल पैदा कर दी है। निवेशकों की पैनी नजर अब उन देसी कंपनियों पर टिक गई है, जो इस नई क्रांति का बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं।
नेटवेब टेक्नोलॉजीज: स्वदेशी कंप्यूटिंग में अग्रणी
नेटवेब टेक्नोलॉजीज भारत की उन चुनिंदा कंपनियों में से एक है, जो हाई-एंड कंप्यूटिंग के मामले में पूरी तरह स्वदेशी समाधान पेश कर रही है। इस कंपनी का मुख्य फोकस प्राइवेट क्लाउड सिस्टम पर है। इंडिया एआई मिशन के तहत सरकार जब अपना खुद का ढांचा खड़ा कर रही है, तो वहां नेटवेब एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरती है। कंपनी के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के एआई कारोबार ने शानदार छलांग लगाई है। इसके एआई बिजनेस की कमाई में सालाना आधार पर 459 दशमलव 6 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। यह अब कंपनी की कुल कमाई का 43 दशमलव 4 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों को भी नेटवेब ही जरूरी हार्डवेयर मुहैया करा रही है।
वैश्विक दिग्गजों के साथ साझेदारी और विनिर्माण
यह कंपनी केवल बाहर से मंगाए गए कंप्यूटर के पुर्जे जोड़ने तक सीमित नहीं है। नेटवेब ने 15000 वर्गफुट की एक आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री लगाई है, जहां हाई-कैपेसिटी वाले जीपीयू सिस्टम बनाए जाते हैं। भविष्य की भारी डिमांड को देखते हुए यह कंपनी एनवीडिया, एएमडी तथा इंटेल जैसी दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर रिसर्च में जुटी है। आने वाले समय में बाजार को एनवीडिया ब्लैकवेल जैसे सुपर-एडवांस प्लेटफॉर्म पर आधारित सिस्टम मिलने वाले हैं। शेयर बाजार में भी इसका असर दिखा है, जहां एक साल में निवेशकों को 136 दशमलव 85 प्रतिशत का रिटर्न मिला है। हालांकि, शुक्रवार को बाजार बंद होने तक इसके शेयर में 5 दशमलव 44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
E2E नेटवर्क्स: क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में संप्रभुता
इस रेस में दूसरी मजबूत दावेदार कंपनी E2E नेटवर्क्स है। इसने सॉवरेन बाय डिजाइन रणनीति के तहत अपना खास क्लाउड प्लेटफॉर्म तैयार किया है और इसका सीधा मतलब यह है कि भारत का जरूरी डेटा अब विदेशी सर्वर का मोहताज नहीं रहेगा। आज के समय में सरकारी एजेंसियों, राष्ट्रीय डेटा सेंटरों से लेकर एआई स्टार्टअप्स तक, कंपनी का यह प्लेटफॉर्म अपनी सेवाएं दे रहा है। मौजूदा समय में कंपनी दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ तमिलनाडु में करीब 5050 क्लाउड जीपीयू का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। यह स्वदेशी क्लाउड समाधान भारत की डिजिटल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भविष्य का निवेश और शानदार रिटर्न
बाजार की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए E2E नेटवर्क्स ने 533 करोड़ 40 लाख रुपये का बड़ा निवेश प्लान किया है। कंपनी एनवीडिया के 1024 एडवांस ब्लैकवेल जीपीयू का पहला क्लस्टर लगा रही है। वित्त वर्ष 2027 तक इनकी संख्या दोगुनी होकर 2048 के पार जाने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही ग्राहकों को एक ही जगह पर सारा काम करने की सहूलियत देने के लिए कंपनी ने टीआईआर नाम का एक खास प्लेटफॉर्म भी बनाया है, जहां मॉडल तैयार करने से लेकर उसे लागू करने तक का पूरा काम हो सकता है। शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो शुक्रवार को E2E नेटवर्क्स के शेयरों में 4 दशमलव 98 प्रतिशत की तेजी देखी गई और यह 452 रुपये 90 पैसे पर पहुंच गया। पिछले एक साल में यह शेयर निवेशकों को करीब 65 दशमलव 78 प्रतिशत का मुनाफा दे चुका है।
What's Your Reaction?