Assembly By Elections: BJP करेगी सपा के PDA फॉर्मूले को काउंटर, उपचुनाव में बिछाई जातीय बिसात

Assembly By Elections: यूपी उपचुनाव में बीजेपी ने सीट के जातीय समीकरण के लिहाज से उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. बीजेपी ने जिस तरह से उम्मीदवार उतारे हैं,

Oct 24, 2024 - 14:20
Oct 25, 2024 - 04:57
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Assembly By Elections: BJP करेगी सपा के PDA फॉर्मूले को काउंटर, उपचुनाव में बिछाई जातीय बिसात

Assembly By Elections: उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने 8 में से 7 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, जबकि सीसामऊ सीट को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इस चुनावी लड़ाई में बीजेपी ने दलित और पिछड़े वर्ग पर बड़ा दांव खेलते हुए, सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को काउंटर करने की रणनीति अपनाई है। 7 में से 5 सीटों पर दलित और ओबीसी उम्मीदवारों को उतारकर बीजेपी ने अपनी जातीय बिसात बिछा दी है।

उम्मीदवारों की घोषणा: जातीय समीकरण साधने की कोशिश

बीजेपी ने उपचुनाव के लिए जिन सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान किया है, उनमें गाजियाबाद सदर से संजीव शर्मा, खैर से सुरेंद्र दिलेर, कुंदरकी से रामवीर सिंह, मंझवा से सुचिस्मिता मौर्या, फूलपुर से दीपक पटेल, कटेहरी से धर्मराज निषाद, और करहल से अनुजेश प्रताप यादव शामिल हैं। हालांकि, सीसामऊ सीट पर उम्मीदवार की घोषणा अब तक नहीं की गई है। मीरापुर सीट राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के खाते में गई है, जो भाजपा के सहयोगी दलों में से एक है।

बीजेपी की जातीय बिसात: ओबीसी पर विशेष जोर

इस उपचुनाव में बीजेपी ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार चुने हैं। पार्टी ने चार ओबीसी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जिनमें ओबीसी समुदाय की चार अलग-अलग जातियों का प्रतिनिधित्व शामिल है। इसके अलावा, एक-एक प्रत्याशी ब्राह्मण, ठाकुर, और दलित समुदाय से हैं। इस रणनीति के तहत बीजेपी ने सपा के पीडीए फॉर्मूले को चुनौती दी है। ओबीसी वर्ग से टिकट देकर बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है, वहीं सवर्ण वर्ग से भी दो उम्मीदवार मैदान में उतारकर संतुलन साधा है।

करहल में यादव बनाम यादव का मुकाबला

करहल सीट से अनुजेश प्रताप यादव को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने सपा के यादव वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। अनुजेश, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के बहनोई हैं। इस सीट पर सपा ने मुलायम सिंह यादव के पौत्र तेज प्रताप यादव को उतारा है। करहल में यादव वोटों के बिखराव की स्थिति में बीजेपी को फायदा मिल सकता है। 2002 में भी बीजेपी ने यादव कैंडिडेट उतारकर यहां जीत हासिल की थी, और इस बार फिर से इसी रणनीति को दोहराने की उम्मीद है।

कटेहरी में कुर्मी बनाम निषाद का खेल

कटेहरी सीट पर बीजेपी ने निषाद समुदाय से धर्मराज निषाद को टिकट दिया है, जबकि सपा ने कुर्मी समाज की शोभावती वर्मा को उतारा है। कटेहरी में कुर्मी और निषाद दोनों ही समुदायों के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। बीजेपी ने निषाद प्रत्याशी उतारकर सपा की जातीय रणनीति को चुनौती दी है और इस सीट पर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की है।

मंझवा: मौर्य बनाम बिंद

मंझवा सीट पर बीजेपी ने पूर्व विधायक सुचिस्मिता मौर्या को उतारा है, जबकि सपा ने ज्योति बिंद को टिकट दिया है। इस सीट पर मौर्य, बिंद और ब्राह्मण समुदाय के वोट अहम हैं। 2017 में भी इसी जातीय समीकरण के तहत बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की थी, और इस बार भी पार्टी उसी फॉर्मूले पर भरोसा कर रही है।

फूलपुर में कुर्मी दांव

फूलपुर सीट पर बीजेपी ने दीपक पटेल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि सपा ने मुज्तबा सिद्दीकी को मैदान में उतारा है। सपा यहां यादव-मुस्लिम वोटबैंक को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी ने कुर्मी प्रत्याशी देकर अपने कोर वोटबैंक पर फोकस किया है। बीजेपी 2017 और 2022 के चुनावों में इसी जातीय समीकरण के दम पर यहां जीत दर्ज कर चुकी है और एक बार फिर से उसी रणनीति को दोहरा रही है।

ब्राह्मण-ठाकुर-दलित समीकरण

बीजेपी ने ओबीसी के साथ-साथ ब्राह्मण, ठाकुर और दलित वोटबैंक को भी साधने की कोशिश की है। गाजियाबाद सदर सीट पर ब्राह्मण समाज से संजीव शर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि खैर सीट, जो दलित आरक्षित है, से सुरेंद्र दिलेर को उतारा गया है। कुंदरकी सीट से बीजेपी ने रामवीर सिंह को टिकट दिया है, जो ठाकुर समुदाय से आते हैं। कुंदरकी मुस्लिम बहुल सीट है, जहां सपा ने हाजी रिजवान को उम्मीदवार बनाया है। रामवीर सिंह और हाजी रिजवान के बीच मुकाबला एक बार फिर से रोचक बन गया है।

सपा के पीडीए फॉर्मूले का काउंटर

उत्तर प्रदेश के इन उपचुनावों को 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है, और बीजेपी ने इसी को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाई है। पार्टी ने सपा के पीडीए फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए 7 में से 5 सीटों पर दलित और ओबीसी उम्मीदवारों को उतारा है। केवल दो सीटों पर सामान्य वर्ग के प्रत्याशी दिए गए हैं।

निष्कर्ष

बीजेपी ने इस उपचुनाव में अपनी जातीय रणनीति को बड़े ही सूझबूझ के साथ तैयार किया है। सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट के लिए बीजेपी ने अपने कोर वोटबैंक के साथ-साथ ओबीसी और दलित वोटों को भी साधने की कोशिश की है। उपचुनाव के नतीजे 2027 के विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, और बीजेपी ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर सीट पर जातीय संतुलन का पूरा ख्याल रखा है।

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