Paris Olympic 2024: मैदान खेल का या लड़ाई सियासी, विनेश के अयोग्य घोषित होने को क्यों बताया जा रहा साजिश?

Paris Olympic 2024: विनेश फोगाट के फाइनल से बाहर होने के बाद भारत में सियासत तेज हो गई है. फोगाट पर ओलंपिक के फैसले को विपक्ष साजिश बता रहा है तो वहीं सरकार और फेडरेशन इस पर चुप है. सवाल उठता है कि विनेश मामले में राजनीति क्यों हो रही है?

Aug 7, 2024 - 17:35
Aug 7, 2024 - 21:15
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Paris Olympic 2024: मैदान खेल का या लड़ाई सियासी, विनेश के अयोग्य घोषित होने को क्यों बताया जा रहा साजिश?

Paris Olympic 2024: महिला पहलवान विनेश फोगाट के ओलंपिक फाइनल से बाहर होने के बाद भारत की राजनीति गर्म हो गई है. संसद से लेकर सोशल मीडिया तक विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर फेडरेशन और सरकार पर हमलावर है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने फोगाट के फाइनल न खेलने देने को साजिश बताया है और इसकी जांच की मांग की है. आप सांसद संजय सिंह ने सरकार से सख्ती दिखाने को कहा है. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि यह फेडरेशन और सरकार की साजिश है. विनेश के साथ रूके सभी लोगों की जांच की जाए.

फेडरेशन ने फोगाट के फाइनल न खेल पाने को दुखद और देश का नुकसान बताया है. हालांकि, साजिश के एंगल पर फेडरेशन और सरकार ने कुछ नहीं कहा है. विपक्ष के दावे और फेडरेशन-सरकार की चुप्पी के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों विनेश फोगाट मामले में राजनीति हो रही है?

पहले जानिए फोगाट क्यों हुई बाहर?

विनेश फोगाट ओलंपिक के फाइनल में पहुंच गई थीं. उनका फाइनल खेला जाना तय माना जा रहा था. इसी बीच खबर आई कि वजन की वजह से विनेश मैच नहीं खेल पाएंगी. विनेश का वजन 50 किलो से करीब 150 ग्राम ज्यादा था.

ओलंपिक नियम के मुताबिक कुश्ती के पहलवानों को कैटेगरी से सिर्फ 100 ग्राम तक की ही छूट मिल सकती है. विनेश 50 किलोग्राम की कैटेगरी में मैच खेल रही थी.

फोगाट पर कैसे शुरू हुई राजनीति?

विनेश फोगाट के फाइनल में जाने के बाद से ही राजनीति तेज है, लेकिन इस पर बवाल तब मचा, जब वजन की वजह से उन्हें फाइनल में नहीं खेले जाने देने की खबर सामने आई. शुरुआत विनेश के ससुर के एक बयान से हुआ. टीवी-9 भारतवर्ष से बात करते हुए विनेश के ससुर राजपाल राठी ने कहा कि ये साजिश के तहत किया गया है. ये अचानक कैसे हो गया?

राठी के बयान के कुछ देर बाद संसद में इस मुद्दे पर हंगामा मच गया. विपक्ष की तरफ से लोकसभा में पप्पू यादव, चंद्रशेखर, असदुद्दीन ओवैसी और हरेंद्र मलिक ने सरकार की घेराबंदी कर दी. इन सांसदों का कहना है कि जानबूझकर विनेश को टारगेट किया है.

आप सांसद संजय सिंह ने ट्वीट कर सरकार को इस मामले में गंभीर होने के लिए कहा है. सिंह ने कहा है कि सख्ती से इस मामले में पेश आए. अगर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ भारत सरकार की मांग को नहीं मानता है तो इसका बहिष्कार किया जाए.

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है. अखिलेश ने कहा है कि विनेश फोगाट के फाइनल में न खेल पाने की चर्चा के तकनीकी कारणों की गहरी जाँच-पड़ताल हो और सुनिश्चित किया जाए कि सच्चाई क्या है और इसके पीछे की असली वजह क्या है?

फोगाट पर राजनीति क्यों?

1. विनेश और बीजेपी के रिश्ते तल्ख

पिछले साल विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक के नेतृत्व में पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था. यह धरना बीजेपी के तत्कालीन सांसद बृजभूषण के खिलाफ था. पहलवानों का कहना था कि बृजभूषण ने भारतीय कुश्ती को जागीर बना दिया है.

इस दौरान बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का भी आरोप लगा. पहलवानों ने उन्हें फेडरेशन से हटाने और उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी. हालांकि, पहलवानों की कई मांगें नहीं मानी गई.

इसको लेकर विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों ने प्रदर्शन भी किया था. आखिर में एक समझौते के तहत खेल मंत्रालय ने फेडरेशन को भंग कर दिया था. मंगलवार को जब विनेश फाइनल में पहुंची तब उनके साथी बजरंग पुनिया ने एक पोस्ट भी किया था.

बजरंग ने लिखा- विनेश फोगाट भारत की वो शेरनी जिसने आज बैक टू बैक मैच में 4 बार की विश्व विजेता और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन को हराया. उसके बाद क्वार्टरफाइनल में पूर्व विश्व चैंपियन को हराया, लेकिन एक बात बताऊं? ये लड़की अपने देश में लातों से कुचली गई थी. ये लड़की अपने देश में सड़कों पर घसीटी गई थी. ये लड़की दुनिया जीतने वाली है मगर इस देश में सिस्टम से हार गई थी.

2. हरियाणा में विधानसभा के चुनाव

विनेश फोगाट जहां से आती हैं, उस हरियाणा में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं. राज्य की 90 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी गठबंधन का मुकाबला होना है. विनेश जिस जाट समुदाय से आती हैं, हरियाणा की राजनीति में उस समुदाय का सियासी दबदबा है.

हरियाणा जाटों की आबादी करीब 20-22 प्रतिशत है. सीएसडीएस के मुताबिक हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जाटों का 61 प्रतिशत वोट मिला है. बीजेपी के पक्ष में 27 प्रतिशत जाटों ने मतदान किया है.

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