दलाल स्ट्रीट पर विदेशी फंड्स की भारी बिकवाली: बैंक और एनर्जी शेयरों से निवेशकों ने खींचे हाथ
जून 2026 के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 64,761 करोड़ रुपये निकाले। बैंकिंग, ऊर्जा और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई।
जून 2026 के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा शुद्ध रूप से धन निकालने का सिलसिला जारी रहा। वैश्विक व्यापक आर्थिक दबावों और मजबूत डॉलर इंडेक्स के कारण यह रुझान बना हुआ है, जिससे दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के बीच चिंता का माहौल है और विदेशी निवेशकों ने इस बार भी अपने सबसे पसंदीदा और लिक्विड क्षेत्रों, जैसे कि वित्तीय सेवा (बैंकिंग) और तेल एवं गैस (ऊर्जा) से अपनी हिस्सेदारी सबसे अधिक बेची है। इस भारी बिकवाली के कारण निफ्टी बैंक और एनर्जी इंडेक्स पर जबरदस्त दबाव देखा जा रहा है।
जून के पहले पखवाड़े में रिकॉर्ड निकासी
NSDL के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने जून के पहले पखवाड़े में शेयर बाजार का मूड खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने 19 सेक्टरों में कुल 64,761 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह मार्च के दूसरे पखवाड़े के बाद से किसी भी दो हफ्तों में हुआ सबसे बड़ा आउटफ्लो यानी निकासी थी। यह बिकवाली मई के दूसरे पखवाड़े में 13 सेक्टरों में हुई 14,621 करोड़ रुपये की बिकवाली की तुलना में काफी अधिक थी। इस अवधि के दौरान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला, जिससे बिकवाली की रफ्तार तेज हुई।
वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा मार
इस निकासी का सबसे गहरा असर वित्तीय सेवा क्षेत्र पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों ने जून के पहले पखवाड़े में इस सेक्टर में 11,263 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो बेंचमार्क इंडेक्स में इस सेक्टर के बड़े वजन को दर्शाता है। गौरतलब है कि जनवरी से अप्रैल के बीच इस सेगमेंट से कुल 91,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली पहले ही हो चुकी है। अल्फानिटी के को-फाउंडर और डायरेक्टर यू आर भट ने ईटी की रिपोर्ट में बताया कि जब भी विदेशी निवेशक फिर से पूंजी लगाने का मन बनाएंगे, तो वित्तीय सेवाओं में सबसे ज्यादा इनफ्लो देखने को मिलेगा, क्योंकि उन्होंने इस सेक्टर में अपनी पोजीशन काफी कम कर दी है और सुधार के बाद यह सेक्टर अब आकर्षक दिखने लगा है।
तेल, गैस और कंज्यूमेबल फ्यूल सेक्टर से 10,488 करोड़ रुपये की दूसरी सबसे बड़ी निकासी हुई। इसकी तुलना में मई में यहां लगभग 9,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी। जनवरी से अप्रैल के बीच इस क्षेत्र से 6,391 करोड़ रुपये निकाले गए थे, जिससे पता चलता है कि जून में बिकवाली का दबाव काफी बढ़ गया है।
विभिन्न सेक्टरों में बिकवाली के आंकड़े
विदेशी निवेशकों ने ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर में 9,044 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि मई में यह आंकड़ा 2,532 करोड़ रुपये और जनवरी से अप्रैल के बीच 17,985 करोड़ रुपये था। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में भी भारी दबाव रहा, जहां जून के पहले पखवाड़े में 6,733 करोड़ रुपये की निकासी हुई। इससे पहले मई में 1,911 करोड़ रुपये और जनवरी से अप्रैल के बीच 24,870 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए थे। एफएमसीजी सेक्टर में जून के शुरुआती 15 दिनों में 5,063 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई, जबकि मई में यह 3,561 करोड़ रुपये और साल के पहले चार महीनों में 18,072 करोड़ रुपये थी।
विशेषज्ञों की राय और बाजार का विश्लेषण
असित सी मेहता में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के हेड सिद्धार्थ भामरे ने ईटी की रिपोर्ट में विश्लेषण करते हुए कहा कि हालांकि वित्तीय सेवाओं में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई, लेकिन कुल विदेशी होल्डिंग्स के मुकाबले यह बहुत बड़ी नहीं थी। हालांकि, तेल और गैस सेक्टर से हुई निकासी काफी महत्वपूर्ण थी और भामरे ने आगे बताया कि ऑटोमोबाइल शेयरों पर बिकवाली का दबाव इसलिए दिखा क्योंकि उनकी भविष्य की संभावनाएं तेल की कीमतों की दिशा से गहराई से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा, आईटी शेयरों पर दबाव का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर उपजी चिंताएं हैं, जो भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल में बदलाव ला सकती हैं।
इन क्षेत्रों में दिखा मामूली निवेश
भारी बिकवाली के बीच कुछ क्षेत्रों में मामूली निवेश भी देखा गया। 'अन्य' श्रेणी में 629 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ, जबकि मई में यहां से 1,062 करोड़ रुपये निकाले गए थे। टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में 373 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो मई के 415 करोड़ रुपये के आउटफ्लो के मुकाबले बेहतर है। सर्विसेज सेक्टर में 302 करोड़ रुपये का इनफ्लो रहा, जो मई के 7,204 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है। यूटिलिटीज सेक्टर में मात्र 7 करोड़ रुपये का निवेश देखा गया, जबकि मई में यहां से 47 करोड़ रुपये और जनवरी से अप्रैल के बीच 127 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।
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