Ravichandran Ashwin:अश्विन ने तोड़ी चुप्पी, अचानक संन्यास लेने के पीछे की बताई पूरी सच्चाई

Ravichandran Ashwin: अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गाबा टेस्ट के बाद अचानक संन्यास के ऐलान कर दिया था और भारत लौट आए थे. इसके बाद काफी हलचल मची थी और ड्रेसिंग

Jan 15, 2025 - 14:20
Jan 16, 2025 - 10:36
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Ravichandran Ashwin:अश्विन ने तोड़ी चुप्पी, अचानक संन्यास लेने के पीछे की बताई पूरी सच्चाई

Ravichandran Ashwin: भारतीय क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 1-3 से करारी हार का सामना करना पड़ा था। यह सीरीज भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई कारणों से चर्चा में रही। मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अलावा कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनकी चर्चा लंबे समय तक होती रही। इनमें सबसे चौंकाने वाली घटना टीम के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का अचानक संन्यास लेना था। गाबा टेस्ट के बाद अश्विन ने क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर सभी को चौंका दिया। इस फैसले के पीछे के कारण और टीम के अंदरूनी विवाद की खबरों ने क्रिकेट प्रेमियों के बीच हलचल मचा दी।

अश्विन का अचानक संन्यास: क्या था कारण?

रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल 'ऐश की बात' पर इस चौंकाने वाले फैसले पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके अंदर की क्रिएटिविटी खत्म हो चुकी थी और उन्हें लगने लगा था कि उनका क्रिकेटिंग सफर पूरा हो गया है। उन्होंने कहा, "मैं बहुत सोचता हूं कि जीवन में आगे क्या करना है। अगर किसी को लगने लगे कि उसका काम पूरा हो चुका है, तो फिर कुछ सोचने का मतलब नहीं। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मैं अब कुछ नया और क्रिएटिव करने में सक्षम नहीं हूं। इसलिए मैंने संन्यास का फैसला लिया।"

अश्विन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका फैसला अचानक नहीं था, बल्कि यह लंबे समय से चल रही मानसिक प्रक्रिया का नतीजा था। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी यह महसूस करता है कि उसकी क्षमता खत्म हो रही है, तो उसे अपने करियर के बारे में खुद फैसला लेना चाहिए।

टीम के अंदरूनी विवाद की खबरें

अश्विन के संन्यास के बाद टीम के भीतर मतभेद की खबरें भी सामने आईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अश्विन और टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के बीच कुछ बातों को लेकर अनबन हो गई थी। इसके अलावा, रोहित शर्मा के साथ भी उनके मतभेद की अफवाहें उड़ीं। हालांकि, इन खबरों पर आधिकारिक तौर पर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए कि अश्विन को अंतिम टेस्ट में खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया। कई दिग्गजों ने यह माना कि अश्विन को फेयरवेल टेस्ट का सम्मान मिलना चाहिए था।

"मैं और खेल सकता था, लेकिन टीम में जगह नहीं थी"

अश्विन ने संन्यास के बाद उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, "लोगों ने बहुत कुछ कहा, लेकिन यह इतनी बड़ी बात नहीं थी। मैंने पहला मैच नहीं खेला, दूसरा खेला, फिर तीसरे से बाहर हो गया। हो सकता है कि अगले मैच में खेलता, लेकिन अगर मुझे सिर्फ फेयरवेल के लिए टीम में रखा गया होता, तो मुझे यह पसंद नहीं आता। मैं ऐसा खिलाड़ी नहीं हूं जो सिर्फ फेयरवेल के लिए टीम में जगह चाहता हो।"

अश्विन ने साफ किया कि उनके अंदर अभी भी क्रिकेट खेलने का जुनून है, लेकिन भारतीय टीम के साथ नहीं। उन्होंने कहा, "मैं और क्रिकेट खेल सकता था, लेकिन मुझे लगा कि संन्यास लेना तभी बेहतर है जब लोग पूछें 'अभी क्यों?' न कि जब लोग कहें 'अभी क्यों नहीं?' यह मेरे लिए सम्मानजनक विदाई का सही समय था।"

अश्विन का भविष्य: क्या विदेशी लीग में खेलेंगे?

अश्विन ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि वह अब विदेशी लीग में खेलने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा, "मेरे अंदर अभी भी क्रिकेट बाकी है। मैं इसे किसी और प्लेटफॉर्म पर खेलने के लिए तैयार हूं। इंडियन ड्रेसिंग रूम से बाहर जाकर भी मैं अपने क्रिकेट को एंजॉय कर सकता हूं।" उनकी यह बात संकेत देती है कि वह अब आईपीएल या अन्य विदेशी टी20 लीग में नजर आ सकते हैं।

क्रिकेट विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

अश्विन के अचानक संन्यास पर कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया दी। कुछ ने इसे भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान बताया, तो कुछ ने उनके फैसले की सराहना की।

पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा, "अश्विन एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो हमेशा टीम के लिए 100% देने का प्रयास करते हैं। उनका अचानक संन्यास लेना चौंकाने वाला है, लेकिन यह उनका व्यक्तिगत फैसला है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।"

वहीं, पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने कहा, "अश्विन का योगदान भारतीय क्रिकेट में बहुत बड़ा रहा है। हालांकि, अगर वह अपनी जगह टीम में नहीं पाते थे, तो उनका संन्यास लेना समझदारी का फैसला है। हर खिलाड़ी को खुद तय करना होता है कि उसे कब रिटायर होना है।"

निष्कर्ष

रविचंद्रन अश्विन का संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उनके फैसले ने न केवल उनके प्रशंसकों को चौंकाया, बल्कि टीम के अंदरूनी माहौल को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। हालांकि, अश्विन ने अपने फैसले को पूरी तरह से व्यक्तिगत बताया और स्पष्ट किया कि वह अपनी शर्तों पर संन्यास लेना चाहते थे।

अश्विन का यह फैसला एक बार फिर से यह संदेश देता है कि क्रिकेट सिर्फ मैदान पर खेला जाने वाला खेल नहीं है, बल्कि यह खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति और उनकी सोच का भी प्रतिबिंब है। अश्विन का संन्यास इस बात का प्रमाण है कि कभी-कभी खिलाड़ियों को अपनी शर्तों पर विदाई लेना जरूरी हो जाता है, ताकि वह सम्मान के साथ अपने करियर का अंत कर सकें।

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