Rafale Deal:भारत खरीदेगा 114 राफेल जेट्स: रक्षा मंत्रालय की समिति ने दी मंजूरी, 'मेक इन इंडिया' के तहत होगा निर्माण

रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी। 'मेक इन इंडिया' के तहत बनने वाले ये जेट्स भारत की रक्षा क्षमता बढ़ाएंगे। फरवरी में पीएम मोदी-मैक्रों बैठक में डील फाइनल होने की उम्मीद है।

Jan 16, 2026 - 22:35
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Rafale Deal:भारत खरीदेगा 114 राफेल जेट्स: रक्षा मंत्रालय की समिति ने दी मंजूरी, 'मेक इन इंडिया' के तहत होगा निर्माण

भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (DPB) ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह निर्णय भारत की वायुसेना को आधुनिक बनाने और 'मेक इन। इंडिया' पहल को बढ़ावा देने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। इस सौदे से भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल विमानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे देश की हवाई रक्षा और आक्रमण क्षमता में अभूतपूर्व सुधार आएगा। डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद, अब इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के समक्ष रखा जाएगा। DAC रक्षा खरीद से संबंधित सभी प्रमुख निर्णयों के लिए एक महत्वपूर्ण निकाय है, जो प्रस्तावों की रणनीतिक और वित्तीय व्यवहार्यता का मूल्यांकन करता है और dAC की मंजूरी के बाद, अंतिम अनुमोदन के लिए यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा। CCS राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील और बड़े फैसलों पर अंतिम मुहर लगाती है। यह बहुस्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि देश की। रक्षा खरीद पूरी तरह से जांची-परखी और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हो।

'मेक इन इंडिया' पहल का विस्तार

यह सौदा 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत किया जाएगा, जो भारत को रक्षा उत्पादन का एक आत्मनिर्भर केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण करेगी, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हाल ही में, डसॉल्ट ने डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में अपनी हिस्सेदारी 49% से बढ़ाकर 51% कर दी है, जो इस संयुक्त उद्यम के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस संयुक्त उद्यम में एक भागीदार है, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करता है और यह साझेदारी न केवल विमानों के निर्माण में मदद करेगी बल्कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को भी सुगम बनाएगी।

तकनीकी एकीकरण और स्वदेशीकरण

इस सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डसॉल्ट सभी 114 राफेल जेट्स में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद को एकीकृत करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि नए विमान भारतीय सेना की मौजूदा हथियार प्रणालियों के साथ पूरी तरह से संगत हों। इसके अतिरिक्त, डसॉल्ट सुरक्षित डेटा लिंक भी उपलब्ध कराएगा, जिससे इन विमानों को भारतीय रडार और सेंसर सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा। यह एकीकरण भारतीय वायुसेना को एक एकीकृत और मजबूत नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता प्रदान करेगा। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) भी इस सौदे का एक अभिन्न अंग है, जिसमें एयरफ्रेम निर्माण के लिए महत्वपूर्ण तकनीकें भारत को हस्तांतरित की जाएंगी। इंजन निर्माता साफ्रान और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगी, जिससे भारत को विमानन प्रौद्योगिकी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल होगी। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पूरा होने के बाद, इन विमानों में स्वदेशी कंटेंट 55 से 60 प्रतिशत तक होने की उम्मीद है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

वायुसेना की बढ़ती मांग और मौजूदा बेड़ा

भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2025 में 114 अतिरिक्त राफेल जेट्स की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी, जो उसकी परिचालन आवश्यकताओं और रणनीतिक योजना को दर्शाता है और वायुसेना के पास पहले से ही 36 राफेल विमानों का एक बेड़ा है, जिन्हें अंबाला और हाशिमारा एयरबेस से संचालित किया जाता है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना ने भी अपने विमानवाहक पोतों के लिए 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। इन नए 114 विमानों के शामिल होने से भारत के बेड़े में राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी, जिससे भारतीय वायुसेना की रणनीतिक गहराई और लचीलापन बढ़ेगा।

रखरखाव और परिचालन दक्षता

अधिक संख्या में एक ही प्लेटफॉर्म के विमान होने से रखरखाव लागत में कमी आएगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी। अंबाला एयरबेस पर राफेल का प्रशिक्षण और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से ही चालू है, जो नए विमानों के रखरखाव और मरम्मत के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करता है और वायुसेना के पास तुरंत दो स्क्वाड्रन (लगभग 36-38 विमान) को शामिल करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ पहले से मौजूद है। यह मौजूदा क्षमता नए विमानों के सुचारू एकीकरण और त्वरित तैनाती को सुनिश्चित करेगी, जिससे भारत की रक्षा तैयारी मजबूत होगी।

भारत-फ्रांस संबंधों में मजबूती

यह महत्वपूर्ण रक्षा सौदा भारत और फ्रांस के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फरवरी। में प्रस्तावित बैठक के दौरान इस समझौते पर मुहर लगने की संभावना है। यह बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत संयुक्त उत्पादन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी। राफेल मरीन विमान, जो वायुसेना के राफेल विमानों की तुलना में अधिक उन्नत सुविधाओं से लैस हैं, नौसेना की क्षमताओं को भी बढ़ाएंगे, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी। यह डील न केवल भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाएगी बल्कि वैश्विक। रक्षा बाजार में 'मेक इन इंडिया' की साख को भी स्थापित करेगी।

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