नेपाल बाढ़ बचाव: त्रिशूली टनल में फंसी 100 जिंदगियों को बचाने का महाअभियान जारी

नेपाल में बाढ़ से 788 लोगों की मौत के बाद त्रिशूली टनल में फंसी 100 जिंदगियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

Aug 31, 2026 - 08:35
 0  1
नेपाल बाढ़ बचाव: त्रिशूली टनल में फंसी 100 जिंदगियों को बचाने का महाअभियान जारी

नेपाल में आई भयानक और विनाशकारी बाढ़ को 5 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन तबाही के सबसे डरावने और रोंगटे खड़े कर देने वाले मंजर अब भी जमीन के नीचे दबे हुए हैं। रेस्क्यू टीमें बिना थके, दिन-रात इस उम्मीद में काम कर रही हैं कि मलबे के नीचे दबी जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। नेपाल में इस कुदरती कहर के कारण अब तक 788 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है और यह आंकड़ा हर बीतते घंटे के साथ लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महाविनाश के बीच, सबकी नजरें त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर टिकी हैं, जहां की एक सुरंग में करीब 100 जिंदगियां मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रही हैं।

त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट टनल में जारी है संघर्ष

नेपाल में कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया है कि हिमालय की खूबसूरत वादियां अब मलबे और मौत के एक अंतहीन कब्रिस्तान में तब्दील हो चुकी हैं। बाढ़ की इस विनाशलीला को 5 दिन बीत जाने के बाद भी सबसे डरावनी तस्वीरें जमीन के नीचे दफन हैं। बचाव दल त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की मोटी दीवारों को चीरकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। 100 घंटों से भी ज्यादा का समय बीत चुका है और अब तक सफलता के नाम पर केवल सुरंग के ऊपरी हिस्से से एक पाइप अंदर डाला जा सका है। इस पाइप के जरिए सुरंग में कैद लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है, ताकि वे सांस ले सकें। लेकिन ये सांसें भी अस्थाई हैं, क्योंकि उफनती नदी और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश हर पल खतरे को बढ़ा रही है।

बचाव कार्य में तकनीकी प्रयास और चुनौतियां

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी का यह दृढ़ विश्वास है कि कीचड़ से भरी त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट टनल में अब भी लोग जीवित हो सकते हैं। इस उम्मीद को उन मजदूरों के बयानों से बल मिला है जो इस आपदा से जिंदा बचकर निकलने में सफल रहे। इसी विश्वास के आधार पर त्रिशूली सुरंग के ऊपरी हिस्से में 4 सुराख किए जा चुके हैं। इन्हीं सुराखों के माध्यम से अंदर पाइप डालकर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। सुरंग के भीतर की स्थिति का सटीक जायजा लेने के लिए हाई-टेक कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। बचाव कार्य का अगला चरण खुदाई का है, ताकि रेस्क्यू टीम के कमांडोज सीधे सुरंग के भीतर प्रवेश कर सकें। हालांकि, यह ऑपरेशन चुनौतियों से भरा है। रातभर हुई भारी बारिश ने नदी के जलस्तर को अचानक बढ़ा दिया, जिससे ड्रिलिंग वाली जगह पर पानी भर गया है। पल-पल बदलता मौसम अब रेस्क्यू टीमों के लिए भी बड़ा संकट पैदा कर रहा है।

शवों की पहचान और महाविनाश का मंजर

नेपाल से आ रही तस्वीरें और खबरें रूह कंपा देने वाली हैं। तबाही का मंजर इतना भयंकर है कि मलबे से निकाले जा रहे शवों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। शव इस कदर खराब हो चुके हैं कि अधिकारियों को उनका DNA सैंपल लेकर तुरंत दफन करने की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। यह स्थिति प्रमाणित करती है कि नेपाल में कुदरत ने केवल विनाश नहीं, बल्कि महाविनाश की झलक दिखाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में हर तरफ केवल मलबा ही मलबा नजर आ रहा है, जिसके नीचे न जाने कितनी जिंदगियां दफन हो चुकी हैं।

त्रासदी के बीच उम्मीद के चमत्कार

इस भीषण त्रासदी और विनाश के बीच कुछ ऐसे चमत्कार भी देखने को मिले हैं, जो मानवीय साहस और किस्मत की अद्भुत मिसाल पेश करते हैं और एक 4 साल की मासूम बच्ची 2 दिन तक मौत के साये में रहने के बाद सुरक्षित बाहर निकाल ली गई। एक अन्य घटना में, उफनती लहरों के बीच अपने घर में फंसा एक पूरा परिवार सुरक्षित बच गया। हैरानी की बात यह रही कि विनाशकारी बाढ़ उस घर की बुनियाद तक को नहीं हिला पाई। वहीं, एक बेजुबान जानवर द्वारा एक इंसान को लहरों में डूबने से बचाने की कहानी भी सामने आई है। इन्हीं चमत्कारों ने टनल में फंसी 100 जिंदगियों के लिए उम्मीद की लौ जलाए रखी है। रेस्क्यू फाइटर्स, जो इस समय नेपाल में रक्षक बनकर उभरे हैं, इन जिंदगियों को बचाने के लिए अपना सब कुछ झोंक रहे हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow