अमेरिका ईरान महायुद्ध: ट्रंप के आदेश पर 12 शहरों में 140 ठिकानों पर बमबारी

अमेरिका ने ईरान के 12 शहरों में 140 ठिकानों पर हमला किया। जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया और अमेरिकी बेसों पर मिसाइलें दागीं।

Jul 12, 2026 - 21:35
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अमेरिका ईरान महायुद्ध: ट्रंप के आदेश पर 12 शहरों में 140 ठिकानों पर बमबारी

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर महायुद्ध की स्थिति पैदा हो गई है जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेना ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार और भीषण हमले कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश के बाद अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के भीतर व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया है और यह एक हफ्ते के भीतर ईरान पर अमेरिका का तीसरा बड़ा हमला है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका द्वारा दी गई समय सीमा यानी डेडलाइन के खत्म होते ही ये हमले शुरू कर दिए गए। ताजा जानकारी के अनुसार ईरान के 12 अलग-अलग शहरों में 140 से ज्यादा ठिकानों पर भारी बमबारी की गई है।

ट्रंप का मिशन ईरान और खामेनेई की कसम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस बार अपने "मिशन ईरान" को हर हाल में कामयाब बनाने के इरादे से युद्ध के मैदान में उतरे हैं। उनका लक्ष्य ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह से पंगु बनाना है। दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। खामेनेई ने "खून के बदले खून" का नारा देते हुए ट्रंप को मिटाने की कसम खाई है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस सीधी जंग ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है और किसी भी पक्ष के पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी और वैश्विक संकट

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी बड़े कदम उठाए हैं। ईरान ने खाड़ी के 6 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेसों पर हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। इस युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है जिसे ईरान ने पूरी तरह से बंद कर दिया है। होर्मुज को बंद किए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं और अब किसी भी देश के जहाज को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है और कई देशों के जहाजों ने खुद ही इस इलाके से दूरी बना ली है।

ईरान ने होर्मुज को बंद करने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण यह फैसला लेना पड़ा। उनका कहना है कि कुछ जहाज तय समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे थे जिससे सुरक्षा का खतरा पैदा हो गया था। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसे अपनी सुरक्षा का पूर्ण भरोसा नहीं मिलता और बाहरी सैन्य दबाव कम नहीं होता तब तक होर्मुज में हालात सामान्य नहीं होंगे। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज इस प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश करेगा उसे सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

बैलिस्टिक मिसाइल हमले और डिफेंस सिस्टम की सक्रियता

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित प्रिंस हसन एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। IRGC के अनुसार उनके निशाने पर एक कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और MQ-9 ड्रोन के हैंगर थे। हालांकि इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसके अलावा ईरान ने कुवैत और बहरीन में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है।

ईरानी हमलों को रोकने के लिए क्षेत्र के अन्य देशों ने भी अपने डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जानकारी दी है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया। बहरीन में हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए जबकि कतर ने अपने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। ओमान के डुक्म बंदरगाह से भी हमले की खबरें आई हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि उनके सभी एयरबेस सुरक्षित हैं और ईरान की तरफ से किए जा रहे हमलों को उनके उन्नत डिफेंस सिस्टम सफलतापूर्वक रोक रहे हैं।

युद्ध का पैमाना और वर्तमान स्थिति

अमेरिका ने दावा किया है कि पिछले 3 दिनों के भीतर उसने ईरान के 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं ईरानी मीडिया के मुताबिक होर्मोजगन और बुशहर प्रांतों के कई इलाकों में लगातार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े जानी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और दोनों देशों के बीच जारी यह गोलाबारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति पर पड़ सकता है।

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