EPFO 3.0 लागू: अब पीएफ क्लेम और ट्रांसफर के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर

ईपीएफओ ने CITES प्रोजेक्ट के तहत डेटाबेस को केंद्रीकृत किया। अब 5 लाख रुपये तक का ऑटो-सेटलमेंट और तेज पीएफ क्लेम की सुविधा मिलेगी।

Jul 12, 2026 - 20:35
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EPFO 3.0 लागू: अब पीएफ क्लेम और ट्रांसफर के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर

0 को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस महीने संगठन ने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्रोजेक्ट के तहत अपने सभी सदस्यों के डेटाबेस को एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव के बाद ईपीएफओ की सेवाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और सदस्य-केंद्रित हो जाएंगी।

CITES प्रोजेक्ट: तकनीक के जरिए बड़ी राहत

CITES प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ईपीएफओ की पुरानी और विकेंद्रीकृत प्रणाली को आधुनिक बनाना है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने पिछले सप्ताह जानकारी दी कि ईपीएफओ ने अपने सभी सदस्य रिकॉर्ड को नए केंद्रीय डेटाबेस में सफलतापूर्वक माइग्रेट कर दिया है और इससे देशभर में पीएफ और पेंशन से जुड़ी सेवाओं के वितरण में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

पुरानी व्यवस्था में हर क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय का अपना अलग डेटाबेस होता था, जिससे डेटा के मिलान और क्लेम प्रोसेसिंग में काफी समय लगता था। अब सभी सदस्यों का डेटा एक ही राष्ट्रीय डेटाबेस में उपलब्ध है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब देशभर के किसी भी अधिकृत ईपीएफओ कार्यालय से किसी भी सदस्य के अनुरोध का निपटारा किया जा सकेगा और अब सदस्यों को अपने पीएफ या पेंशन क्लेम के लिए अपने विशिष्ट क्षेत्रीय कार्यालय के चक्कर लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

सदस्यों को मिलने वाले प्रमुख लाभ

इस नई व्यवस्था के तहत क्लेम का पैसा सदस्यों को बहुत जल्दी मिलेगा। अब पीएफ क्लेम का भुगतान एक केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। जिस दिन क्लेम का निपटारा होगा, उसी दिन पैसा सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सीधे सदस्य के बैंक खाते में भेज दिया जाएगा।

एक और महत्वपूर्ण बदलाव ब्याज की गणना को लेकर किया गया है। पहले पीएफ के अंतिम निपटान पर ब्याज केवल पिछले महीने के आखिरी दिन तक ही जोड़ा जाता था। लेकिन अब नई व्यवस्था में भुगतान की मंजूरी मिलने की तारीख तक का ब्याज दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि सदस्यों को अब पहले की तुलना में अधिक ब्याज राशि प्राप्त होगी।

ब्याज दर और पासबुक अपडेट

ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8 प्रतिशत 25 ब्याज दर निर्धारित की है। इस दर के हिसाब से लगभग 34 करोड़ खातों में कुल 1 लाख 44 हजार करोड़ रुपये जमा किए जाने हैं। संगठन का लक्ष्य है कि 15 जुलाई तक यह राशि सभी पात्र खातों में जमा कर दी जाए। इसके बाद सदस्य अपनी डिजिटल पासबुक में तुरंत ब्याज की राशि देख सकेंगे, जिससे उन्हें अपने निवेश की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

एक ही पोर्टल पर सभी सुविधाएं

अब ईपीएफओ सदस्यों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। पोर्टल पर लॉग-इन करते ही सदस्य एक ही स्थान पर अपना पीएफ बैलेंस, क्लेम का स्टेटस, सदस्यता की विस्तृत जानकारी, पेंशन सेवा रिकॉर्ड और अब तक मिले हुए सभी लाभों का विवरण देख सकेंगे। यह केंद्रीकृत व्यवस्था पारदर्शिता को बढ़ावा देगी और सदस्यों को सशक्त बनाएगी।

क्लेम रिजेक्शन में आएगी कमी

अक्सर तकनीकी गलतियों या दस्तावेजों की कमी के कारण पीएफ क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे। अब सिस्टम में ऐसी सुविधा जोड़ी गई है जो क्लेम जमा करने से पहले ही जरूरी दस्तावेजों और जानकारी की स्वतः जांच कर लेगी। यदि कोई कमी पाई जाती है, तो पोर्टल उसी समय सदस्य को सूचित कर देगा, जिससे क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना बहुत कम हो जाएगी।

इसके अलावा, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को भी बढ़ा दिया गया है। अब पूरी तरह से केवाईसी सत्यापित 5 लाख रुपये तक के एडवांस पीएफ क्लेम का निपटारा ऑटो-सेटलमेंट के जरिए होगा, जिसकी सीमा पहले केवल 1 लाख रुपये थी। सदस्य अब अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे। पोर्टल पर यह भी स्पष्ट रूप से दिखेगा कि सदस्य किन परिस्थितियों में कितनी रकम निकालने के पात्र हैं।

आसान निकासी नियम और ऑटो-ट्रांसफर

पीएफ निकासी के नियमों को भी सरल बनाया गया है। पहले आंशिक निकासी के लिए 13 अलग-अलग नियम थे, जिन्हें अब घटाकर केवल तीन श्रेणियों में बांट दिया गया है: जरूरी जरूरतें, आवास संबंधी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां। इसके साथ ही, जिन सदस्यों का यूएएन आधार से लिंक है, उनका पीएफ खाता नौकरी बदलने पर अपने-आप ट्रांसफर हो जाएगा। इसके लिए अब पुराने या नए नियोक्ता की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

ईपीएफओ एमनेस्टी स्कीम 2026

संगठन ने उन संस्थानों के लिए भी एक राहत योजना शुरू की है जो एक्जेम्प्टेड पीएफ ट्रस्ट चलाते हैं। ईपीएफओ एमनेस्टी स्कीम 2026 के तहत ऐसे संस्थानों को अपनी कानूनी स्थिति नियमित कराने का एक मौका दिया जाएगा। यह योजना 29 जून 2026 से शुरू होकर छह महीने तक प्रभावी रहेगी। यह उन संस्थानों के लिए है जिनके पास आयकर विभाग की मान्यता तो है लेकिन ईपीएफ कानून के तहत आवश्यक छूट नहीं है। इस योजना का लाभ उठाकर संस्थान भविष्य की कानूनी जटिलताओं से बच सकेंगे।

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