अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, 6 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
अमेरिका द्वारा ईरान के 140 ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने कुवैत, सऊदी अरब और जॉर्डन समेत 6 देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आहट अब हकीकत में बदलती नजर आ रही है और दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव उस समय चरम पर पहुंच गया जब अमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के 6 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमला कर दिया। यह घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर समझौता पूरी तरह टूट गया और सैन्य कार्रवाइयों का एक नया दौर शुरू हो गया। इस टकराव ने न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया में तेल और गैस संकट की आशंका को गहरा कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले से भड़की चिंगारी
ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस हमले के कारण जहाज में भीषण आग लग गई और उसके इंजन को भारी नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद से चालक दल का एक सदस्य लापता बताया जा रहा है और इस हमले को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती माना और इसके तुरंत बाद ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।
अमेरिका की बड़ी कार्रवाई: 140 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक
जहाज पर हुए हमले के जवाब में अमेरिका ने शनिवार 11 जुलाई की देर रात ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, उनकी सेनाओं ने ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया। इसके पहले 130 ठिकानों पर हमले की बात भी सामने आई थी। अमेरिका ने बहरीन स्थित अपने बेस से मिसाइलें दागीं और ईरान के 7 प्रमुख शहरों में तबाही मचाई। धमाकों की गूंज चाबहार, बुशहर, बंदर अब्बास और सिरिक जैसे शहरों में सुनी गई। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि पिछले 3 दिनों के भीतर उन्होंने ईरान के अंदर 300 से ज्यादा लक्ष्यों पर कार्रवाई की है।
ईरान का पलटवार: 6 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
अमेरिकी हमलों के कुछ ही देर बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरानी सरकारी टीवी IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना ने 6 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इन देशों में कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन शामिल हैं। कतर, यूएई और बहरीन में मिसाइल हमलों की सूचना के बाद अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया है और ईरान का कहना है कि जब तक अरब देशों में अमेरिका का दखल खत्म नहीं होता, तब तक इस मार्ग से आवाजाही सामान्य नहीं होने दी जाएगी।
सीजफायर का अंत और राजनीतिक बयानबाजी
ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदें 7 जुलाई को तब खत्म हो गईं जब उनके बीच हुआ सीजफायर समझौता टूट गया। इसकी मुख्य वजह ईरान द्वारा होर्मुज में कतर और सऊदी अरब के 3 जहाजों को निशाना बनाना था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो समिट के दौरान इस बात की पुष्टि की कि अब ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। इस बीच, अमेरिकी रक्षा सचिव पीटर हेसगेथ ने स्पष्ट किया कि ईरान को जहाजों पर हमले की भारी कीमत चुकानी होगी। वहीं, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कड़े शब्दों में कहा कि अब एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है और वादा न निभाने वालों को अंजाम भुगतना होगा।
बदले की आग और वैश्विक संकट
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद उनके बेटे और देश के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा ने बदले की कसम खाई है। मुज्तबा ने कहा कि वह अपने पिता और बेगुनाहों की हत्या का बदला लेकर रहेंगे और इसके लिए लक्ष्यों की एक सूची तैयार की जा रही है। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान उनकी हत्या करने की कोशिश करता है, तो उस पर ऐसा हमला होगा जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया होगा। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इसके लिए पहले ही निर्देश दे रखे हैं और इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है।
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