GST काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को: बड़े कारोबारियों के लिए रजिस्ट्रेशन नियम आसान करने की तैयारी

12 सितंबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में बड़े कारोबारियों के लिए पंजीकरण नियमों को सरल बनाने और ऑटोमेशन पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

Aug 30, 2026 - 09:35
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GST काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को: बड़े कारोबारियों के लिए रजिस्ट्रेशन नियम आसान करने की तैयारी

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के ढांचे में एक बार फिर बड़े सुधार की तैयारी की जा रही है। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। इस बैठक का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह एक साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। इससे पहले काउंसिल की बैठक 3 और 4 सितंबर 2025 को हुई थी। मुख्य बैठक से ठीक एक दिन पहले यानी 11 सितंबर को वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक भी होगी जिसमें प्रस्तावित बदलावों और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जीएसटी काउंसिल में केंद्र के साथ-साथ सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं जो सामूहिक रूप से देश की कर प्रणाली पर निर्णय लेते हैं।

बड़े कारोबारियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण

12 सितंबर को होने वाली इस बैठक के एजेंडे में सबसे प्रमुख मुद्दा बड़े कारोबारियों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार काउंसिल उन कारोबारों के लिए नियमों को सरल बनाने पर विचार कर सकती है जिनमें हर महीने 2 लाख 50 हजार रुपये से ज्यादा का टैक्स क्रेडिट पास किया जाता है। वर्तमान में बड़े कारोबारियों के लिए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया पूरे देश में एक समान नहीं है। केंद्र और विभिन्न राज्यों के जीएसटी विभाग अपने-अपने अलग तरीकों और प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। इस भिन्नता के कारण बड़े कारोबारियों को अक्सर प्रशासनिक परेशानियों और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। काउंसिल का लक्ष्य एक ऐसी एकीकृत और सरल प्रक्रिया विकसित करना है जिससे बड़े करदाताओं को पंजीकरण के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा न आए।

टैक्स स्लैब में बदलाव और पिछला इतिहास

जीएसटी काउंसिल की इस आगामी बैठक की पृष्ठभूमि सितंबर 2025 में हुई पिछली बैठक से जुड़ी है। उस बैठक में जीएसटी की दरों और टैक्स स्लैब में व्यापक बदलाव किए गए थे। 22 सितंबर 2025 से देश में जीएसटी का एक नया सिस्टम लागू किया गया था। इस नए सिस्टम के तहत मुख्य रूप से 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो टैक्स स्लैब बनाए गए हैं। वहीं महंगी और कुछ विशेष श्रेणी की वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत का जीएसटी रेट तय किया गया है। इससे पहले देश में 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के चार अलग-अलग स्लैब लागू थे। आगामी बैठक में इन बदलावों की समीक्षा के साथ-साथ व्यापार करने की सुगमता को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन और ऑटोमेशन पर चर्चा

पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने के अलावा काउंसिल जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैंसिल यानी रद्द करने की प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव कर सकती है। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुसंगत बनाने के लिए ऑटोमेशन और अन्य तकनीकी सुधारों पर चर्चा होने की संभावना है और इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया पूरे देश में एक जैसी हो और इसमें मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो। वर्तमान में देश में लगभग 1 करोड़ 68 लाख कारोबार जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड हैं। ऐसे में पंजीकरण और उसे रद्द करने की प्रक्रिया में होने वाला कोई भी बदलाव इतनी बड़ी संख्या में मौजूद कारोबारियों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारियों के लिए मौजूदा व्यवस्था

जीएसटी काउंसिल ने पहले ही छोटे कारोबारियों के लिए राहत भरे कदम उठाए हैं। सितंबर 2025 की बैठक में छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारियों के लिए एक सरल जीएसटी रजिस्ट्रेशन स्कीम को मंजूरी दी गई थी जिसे 1 नवंबर से लागू किया गया था। यह व्यवस्था उन कारोबारियों के लिए है जिन्हें जीएसटी सिस्टम के डेटा के आधार पर कम जोखिम वाला माना जाता है या जिनकी हर महीने की आउटपुट टैक्स देनदारी 2 लाख 50 हजार रुपये तक है। अब इसी तरह की सरलता बड़े कारोबारियों के लिए भी लाने की तैयारी है ताकि देश का व्यापारिक वातावरण और अधिक सुदृढ़ हो सके। 12 सितंबर की बैठक में लिए जाने वाले फैसले देश के 1 करोड़ 68 लाख पंजीकृत कारोबारियों के लिए व्यापार की राह को और आसान बना सकते हैं।

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