नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारत ने बचाए 108 नागरिक, 57.5 टन राहत सामग्री के साथ सेना तैनात

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने 108 नागरिकों को बचाया और 57.5 टन राहत सामग्री भेजी है। भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीमें भी तैनात की गई हैं।

Aug 30, 2026 - 09:35
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नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारत ने बचाए 108 नागरिक, 57.5 टन राहत सामग्री के साथ सेना तैनात

नेपाल के भोटे कोसी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और सड़क, पुल तथा आवासीय इलाकों सहित बुनियादी ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची है। भारत सरकार ने इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ अपनी एकजुटता दोहराई है और स्पष्ट किया है कि वह हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक नेपाल में 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इसके अलावा, उन 50 भारतीय नागरिकों से भी दोबारा संपर्क स्थापित कर लिया गया है जो पहले संपर्क से बाहर हो गए थे।

नागरिकों की सुरक्षा और बचाव के आंकड़े

बाढ़ का प्रभाव केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका असर चीन की तरफ भी पड़ा है। स्थानीय चीनी सरकारी अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों में 598 भारतीय नागरिक चीन की सीमा से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। वर्तमान में लगभग 900 भारतीय नागरिक अभी भी चीन की तरफ मौजूद हैं, जो सुरक्षित हैं और अधिकारियों के संपर्क में हैं। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह चिंता का विषय है कि 275 से अधिक भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। भारतीय दूतावास इन सभी की तलाश के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।

उच्च स्तरीय कूटनीतिक समन्वय और कंट्रोल रूम

इस त्रासदी पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की और अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि भारत इस संकट के समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और इसके बाद 28 अगस्त को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी नेपाल के विदेश मंत्री से बातचीत कर राहत कार्यों की समीक्षा की और भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने भी 24/7 हेल्पलाइन शुरू की है, जो नेपाली और चीनी अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रभावितों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहे हैं।

भारतीय वायुसेना का राहत अभियान

भारत ने नेपाल को तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों का बेड़ा तैनात किया है। अब तक तीन विमानों के माध्यम से कुल 57 दशमलव 5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। 26 अगस्त को वायुसेना के सी-130जे हरक्यूलिस विमान ने 10 टन सामग्री पहुंचाई, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं। इसके बाद 27 अगस्त को सी-17 ग्लोबमास्टर ने 37 दशमलव 5 टन सामग्री पहुंचाई। इस खेप में 28 दशमलव 5 टन टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, डी-वॉटरिंग पंप, किचन सेट और जनरेटर के साथ-साथ 8 टन दवाइयां और 1 टन खाद्य सामग्री शामिल थी। 28 अगस्त को एक और सी-130जे विमान ने भारतीय सेना की 5 सदस्यीय टनल रेस्क्यू रिकॉन टीम और 6 सदस्यीय मेडिकल टीम को 10 टन अतिरिक्त सामग्री के साथ नेपाल पहुंचाया।

विशेषज्ञ टीमें और बुनियादी ढांचा सहायता

राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए भारत ने विशेषज्ञ टीमें भी तैनात की हैं। भारतीय सेना की तकनीकी टीम ने प्रभावित इलाकों में टनल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। 29 अगस्त (शनिवार) को प्रस्तावित चौथी सी-130जे उड़ान के जरिए 13 सदस्यीय विशेष टनल रेस्क्यू टीम और आधुनिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। यह टीम पहले भेजी गई रिकॉन टीम के जमीनी आकलन के आधार पर काम करेगी। इसके अलावा, मृतकों की पहचान में मदद के लिए 6 फॉरेंसिक टीमों के 19 सदस्यीय दल को नेपाल भेजा जा रहा है, जो डीएनए विश्लेषण में सहयोग करेंगे। संपर्क मार्गों को बहाल करने के लिए भारत ने बेली ब्रिज (Bailey Bridge) और तकनीकी टीमें भी उपलब्ध कराई हैं, जिनमें से एक पुल पहले ही नेपाल पहुंच चुका है। भारत ने नेपाल के सर्च और रेस्क्यू अभियान में मदद के लिए एनडीआरएफ (NDRF) की सेवाएं देने की भी पेशकश की है।

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