IDBI Bank Privatization: कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही रॉकेट बने शेयर, निवेशकों की हुई चांदी

आईडीबीआई बैंक के शेयरों में 9 प्रतिशत की तेजी आई क्योंकि कैबिनेट ने फेयरफैक्स को 60 दशमलव 72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी। जानें इस बड़े सौदे की पूरी जानकारी।

Oct 15, 2026 - 08:35
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IDBI Bank Privatization: कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही रॉकेट बने शेयर, निवेशकों की हुई चांदी

आईडीबीआई बैंक के शेयरों में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण निजीकरण की प्रक्रिया को मिली एक बड़ी और ऐतिहासिक मंजूरी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईडीबीआई बैंक में 60 दशमलव 72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इस खबर के सार्वजनिक होते ही बैंक के शेयरों ने रॉकेट की तरह रफ्तार पकड़ी और करीब 9 प्रतिशत की छलांग लगाई। इस तेजी से निवेशकों को बड़ा मुनाफा हुआ और कंपनी के बाजार मूल्यांकन में 8,086 करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया। एयर इंडिया की बिक्री के बाद इसे देश का सबसे बड़ा रणनीतिक विनिवेश माना जा रहा है, जो सरकारी नियंत्रण वाले बैंकों के निजीकरण की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगा।

शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन और वैल्यूएशन में उछाल

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर आईडीबीआई बैंक का शेयर 9 दशमलव 07 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 90 रुपये 44 पैसे पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब निवेशकों के उत्साह के कारण यह 12 दशमलव 90 प्रतिशत तक चढ़कर 93 रुपये 62 पैसे के स्तर तक पहुंच गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर भी स्थिति काफी मजबूत रही, जहां बैंक का शेयर 8 दशमलव 98 प्रतिशत की मजबूती के साथ 90 रुपये 39 पैसे पर बंद हुआ। इस जबरदस्त उछाल के कारण बैंक का कुल बाजार पूंजीकरण 8,085 करोड़ 82 लाख रुपये बढ़कर 97,244 करोड़ 73 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इसलिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का माहौल बना हुआ था और बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 251 दशमलव 89 अंक यानी 0 दशमलव 34 प्रतिशत गिरकर 72,781 दशमलव 89 अंक पर रहा, जबकि निफ्टी 99 दशमलव 25 अंक यानी 0 दशमलव 44 प्रतिशत टूटकर 22,622 दशमलव 70 अंक पर बंद हुआ।

फेयरफैक्स के साथ सौदे की विस्तृत जानकारी

कनाडा की दिग्गज कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स करीब 53,000 करोड़ रुपये (लगभग 5 दशमलव 5 अरब डॉलर) में आईडीबीआई बैंक में 60 दशमलव 72 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने जा रही है। यह किसी भी भारतीय बैंक में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा और देश में बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने फेयरफैक्स की अनुषंगी कंपनी मेसर्स 10955230 कनाडा इंक को रणनीतिक खरीदार के रूप में अपनी मंजूरी दी है। यह कंपनी भारत सरकार की 30 दशमलव 48 प्रतिशत हिस्सेदारी को करीब 26,620 करोड़ रुपये में और सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30 दशमलव 24 प्रतिशत हिस्सेदारी को करीब 26,440 करोड़ रुपये में खरीदेगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, कनाडा के प्रसिद्ध उद्योगपति प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स प्रति शेयर 81 रुपये का भुगतान करेगी। यह कीमत दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा निर्धारित 75 रुपये 99 पैसे प्रति शेयर के उचित मूल्य से काफी अधिक है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सरकार का दृष्टिकोण

बैंकिंग क्षेत्र का यह विशाल सौदा आईडीबीआई बैंक के निजीकरण और वाणिज्यिक उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी कम करने के लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों की एक बड़ी सफलता है। इस हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया वास्तव में साल 2022 में शुरू की गई थी। हालांकि, इस साल की शुरुआत में जब वित्तीय बोलियां आरक्षित मूल्य से कम रहीं, तो सरकार ने बिक्री प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोक दिया था और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सौदे को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार ने बैंक को वित्तीय संकट से बाहर निकालने में मदद की है और अब अल्पांश हिस्सेदारी बरकरार रखते हुए प्रस्तावित पुनर्गठन के माध्यम से उसकी वृद्धि के अगले चरण को गति दी जा रही है। वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि इस कदम से भारत की बैंकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी और बैंक सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। यह सौदा इस बात की भी पुष्टि करता है कि भारत की विकास यात्रा अत्यंत मजबूत है और उसकी अर्थव्यवस्था में चुनौतियों से उबरने की अद्भुत क्षमता है।

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