ISRO ने रचा इतिहास: देश का पहला जियो इमेजिंग सैटेलाइट EOS 05 सफलतापूर्वक लॉन्च

ISRO ने GSLV F17 के जरिए देश का पहला जियो इमेजिंग सैटेलाइट EOS 05 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह सैटेलाइट कृषि और आपदा प्रबंधन में रियल टाइम डेटा देगा।

Sep 4, 2026 - 09:35
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ISRO ने रचा इतिहास: देश का पहला जियो इमेजिंग सैटेलाइट EOS 05 सफलतापूर्वक लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार की आधी रात को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश का पहला एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन स्पेसक्राफ्ट (EOS 05) सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह सैटेलाइट भारत के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह जियो ऑर्बिट में स्थापित होने वाला देश का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट है। इस महत्वपूर्ण मिशन को GSLV F17 रॉकेट के माध्यम से अंजाम दिया गया। इसरो द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, EOS 05 सैटेलाइट ने उड़ान भरने के लगभग 18 मिनट बाद अपनी निर्धारित सब जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया।

आसमान में भारत की आँख: सामरिक और नागरिक महत्व

इस मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने इस सैटेलाइट को आसमान में आँख (eye in the sky) की संज्ञा दी है। यह नाम इसकी कार्यक्षमता को पूरी तरह से परिभाषित करता है। यह सैटेलाइट पृथ्वी की सतह की रियल टाइम तस्वीरें प्रदान करने में सक्षम है, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में, यह फसलों की निगरानी और पैदावार के आकलन में मदद करेगा। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में यह सैटेलाइट वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि यह प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित डेटा और तस्वीरें उपलब्ध कराएगा, जिससे राहत कार्यों में तेजी आएगी। यह जियो ऑर्बिट से भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट है जो देश के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा भी उपलब्ध कराएगा।

GSLV F17 और EOS 05 की तकनीकी विशेषताएं

7 मीटर है। 5 टन है। रॉकेट के नोज कोन पर 2367 किलोग्राम वजन वाला EOS 05 सैटेलाइट लगाया गया था। इस रॉकेट की सबसे बड़ी विशेषता इसका तीसरा स्टेज है, जो क्रायोजेनिक है। GSLV F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान है। जहाँ अधिकांश अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में रहकर काम करते हैं, वहीं EOS 05 पृथ्वी से लगभग 36000 किलोमीटर की ऊँचाई पर यानी जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में तैनात रहेगा। इस ऊँचाई पर सैटेलाइट पृथ्वी के घूमने की गति के साथ तालमेल बिठाता है, जिससे यह एक ही स्थान पर स्थिर रहकर निगरानी कर सकता है।

पिछली चुनौतियों और विफलताओं पर विजय

यह मिशन इसरो के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि GSLV F17/EOS 05 को 2021 के असफल GSLV F 10/EOS 03 मिशन की जगह लेने के लिए तैयार किया गया है। साल 2021 के उस मिशन में, उड़ान के 307वें सेकंड में ऑनबोर्ड कंप्यूटर ने मिशन को रोक दिया था। बाद में डेटा की जांच से पता चला था कि क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी आने के कारण वह मिशन विफल हो गया था और आज का यह सफल लॉन्च लगभग 8 महीने के अंतराल के बाद हुआ है। इस साल 12 जनवरी को PSLV C62 रॉकेट 16 सैटेलाइट लेकर गया था, लेकिन तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण वह उन्हें सही ऑर्बिट में नहीं पहुँचा सका था। इसके अलावा, मई 2025 में PSLV C61 EOS 09 के साथ की गई एक कोशिश भी मोटर प्रेशर की समस्या और चैंबर प्रेशर में गिरावट के कारण सफल नहीं हो पाई थी।

लॉन्च का घटनाक्रम और इसरो प्रमुख का बयान

इस ऐतिहासिक मिशन के लिए 27 घंटे का स्मूद काउंटडाउन बुधवार रात 11:30 बजे शुरू हुआ था। गुरुवार तड़के ठीक 2:55 बजे रॉकेट ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। आधी रात का समय और बारिश होने के बावजूद, वहां मौजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में लोग इस पल के गवाह बने और मिशन की सफलता के बाद इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि GSLV F17 रॉकेट ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट 05 को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से उसकी तय ऑर्बिट में स्थापित कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि एक बार काम शुरू करने के बाद यह देश के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होगा। मिशन की सफलता के लिए इसरो चेयरमैन ने लॉन्च से पहले तिरुमाला तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन भी किए थे।

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