MRFA डील: 90 सेकंड में 100 किमी दूर दुश्मन होगा ढेर, भारत की बड़ी तैयारी
भारत 114 राफेल विमानों के लिए 3 लाख 25 हजार करोड़ रुपये की MRFA डील कर रहा है, जिसमें 90 सेकंड में 100 किमी मार करने वाली Meteor मिसाइल शामिल होगी।
भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए सबसे बड़े मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम के तहत 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। करीब 3 लाख 25 हजार करोड़ रुपये की इस संभावित डील को एशिया की सबसे महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इस सौदे का सबसे अहम पहलू लंबी दूरी की हवाई लड़ाई यानी बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) क्षमता को और अधिक मजबूत करना है। इसके लिए भारत मौजूदा Meteor मिसाइल के एडवांस वर्जन को अपने बेड़े में शामिल करने पर विशेष जोर दे रहा है।
Meteor मिसाइल की मारक क्षमता और तकनीक
राफेल के सबसे खतरनाक हथियारों में शामिल Meteor मिसाइल पहले से ही दुनिया की सबसे एडवांस BVR एयर-टू-एयर मिसाइलों में गिनी जाती है। यह पारंपरिक रॉकेट इंजन की बजाय थ्रॉटल योग्य रैमजेट इंजन का उपयोग करती है, जिससे यह मैक 4 से अधिक की गति हासिल कर सकती है। यह मिसाइल लगभग 100 किलोमीटर की दूरी केवल 90 सेकंड में तय कर सकती है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक उच्च गति और ऊर्जा बनाए रखती है, जिससे दुश्मन विमान के लिए बच निकलना लगभग असंभव हो जाता है।
नई डाटालिंक तकनीक से मिलेगी बड़ी बढ़त
भारतीय वायुसेना Meteor के नए संस्करण में विकसित की जा रही अत्याधुनिक डेटालिंक प्रणाली को भी शामिल करना चाहती है। इस तकनीक के विकास में स्पेन की रक्षा कंपनी Indra और मिसाइल निर्माता MBDA मिलकर काम कर रहे हैं। यह डेटालिंक प्रणाली मिसाइल और लड़ाकू विमान के बीच लगातार संपर्क बनाए रखती है। मिसाइल के उड़ान भरने के बाद भी पायलट उसे लक्ष्य की नई जानकारी, दिशा परिवर्तन और अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भेज सकता है। राफेल के शक्तिशाली RBE2 AESA रडार से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा की मदद से मिसाइल लगातार अपने मार्ग को बदल सकेगी, जिससे 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर भी लक्ष्य को भेदने की क्षमता बढ़ जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सुरक्षा फीचर्स
नई प्रणाली में उन्नत ECCM (Electronic Counter-Counter Measures) तकनीक शामिल होगी और यह तकनीक दुश्मन के जैमर और इलेक्ट्रॉनिक हमलों के बावजूद मिसाइल को अपने लक्ष्य का पीछा करने में सक्षम बनाती है। इसके अलावा, नई दो-तरफा संचार प्रणाली के जरिए पायलट आवश्यकता पड़ने पर मिसाइल को उड़ान के दौरान ही किसी दूसरे लक्ष्य की ओर मोड़ सकेगा। आधुनिक नेटवर्क आधारित युद्ध में यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है और यह भारतीय पायलटों को युद्ध क्षेत्र में अधिक लचीलापन प्रदान करेगी।
भारतीय जरूरतों के अनुसार विशेष बदलाव
भविष्य में मिलने वाले 114 राफेल विमानों में भारतीय वायुसेना के मौजूदा 36 राफेल विमानों में शामिल 13 इंडिया-स्पेसिफिक एन्हांसमेंट्स (ISE) भी दिए जाएंगे। इसमें इजराइली हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले (HMD) शामिल है, जिससे पायलट केवल सिर घुमाकर लक्ष्य को लॉक कर सकेगा और इसके अलावा, लेह जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले एयरबेस से उड़ान भरने के लिए विशेष कोल्ड स्टार्ट सिस्टम भी दिया जाएगा। विमान में उन्नत SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम होगा, जिसे चीन और पाकिस्तान के रडार एवं एयर डिफेंस सिस्टम का मुकाबला करने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित किया गया है।
IAF को मिलेगा रणनीतिक फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत MRFA सौदे के तहत Meteor मिसाइल के एडवांस वर्जन और उससे जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों को हासिल करने में सफल रहता है, तो भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी की हवाई लड़ाई में चीन और पाकिस्तान की वायु सेनाओं पर महत्वपूर्ण बढ़त मिल जाएगी। यह तकनीक न केवल भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को पुख्ता करेगी, बल्कि दुश्मन के खेमे में भी खौफ पैदा करेगी। 114 नए विमानों का यह बेड़ा भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को अगले कई दशकों के लिए सुरक्षित कर देगा।
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