PERM निलंबन पर भारत की प्रतिक्रिया: H-1B वीजा सुरक्षित, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर पड़ेगा असर
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा 8 कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने का असर H-1B वीजा पर नहीं होगा, लेकिन ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को अमेरिकी सरकार द्वारा कई बड़ी टेक कंपनियों को रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित करने के फैसले पर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से संबंधित यह कार्रवाई मौजूदा H-1B वीजा धारकों या उनके आश्रितों की स्थिति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी। विदेश मंत्रालय का यह बयान उन हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अमेरिका के तकनीकी क्षेत्र में कार्यरत हैं और इस निलंबन की खबर के बाद अपनी वीजा स्थिति को लेकर चिंतित थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि PERM और H-1B दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और एक पर की गई कार्रवाई का दूसरे पर सीधा असर नहीं होता है।
H-1B वीजा और PERM के बीच का अंतर
विदेश मंत्रालय ने विस्तार से बताया कि PERM कार्यक्रम और H-1B वीजा अमेरिकी आव्रजन प्रणाली के दो अलग-अलग हिस्से हैं। H-1B एक गैर-प्रवासी वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विशेषज्ञ व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। दूसरी ओर, PERM प्रक्रिया उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है जो स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड प्राप्त करना चाहते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हालांकि इन 8 कंपनियों के पात्र कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में देरी हो सकती है, लेकिन उनके वर्तमान H-1B वीजा की वैधता या शर्तों में कोई बदलाव नहीं आएगा। इसका मतलब है कि इन कंपनियों में काम कर रहे भारतीय पेशेवर अपने वर्तमान वीजा के आधार पर अमेरिका में रहना और काम करना जारी रख सकते हैं।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर पड़ने वाला प्रभाव
भले ही H-1B वीजा सुरक्षित हो, लेकिन विदेश मंत्रालय ने यह स्वीकार किया है कि PERM कार्यक्रम के तहत आवेदनों के निलंबन से संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों की स्थायी निवास की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। PERM कार्यक्रम के तहत निलंबन का अर्थ है कि अमेरिकी श्रम विभाग अब इन कंपनियों से नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और न ही पहले से लंबित आवेदनों पर कोई कार्रवाई करेगा और इससे उन भारतीय पेशेवरों के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ सकता है जो लंबे समय से ग्रीन कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे थे।
आर्थिक लाभ और प्रतिभा का आवागमन
विदेश मंत्रालय ने भारत और अमेरिका के बीच कुशल प्रतिभा के आवागमन से होने वाले आर्थिक लाभों पर भी विशेष जोर दिया और मंत्रालय ने कहा कि टैलेंट का यह आवागमन दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत मूल्यवान है। MEA के अनुसार, इससे न केवल भारतीयों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर पैदा होते हैं, बल्कि यह अमेरिकी कंपनियों को अत्याधुनिक नवाचार, अनुसंधान, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने में भी मदद करता है। मंत्रालय ने आगे कहा कि यह प्रक्रिया अमेरिका में रोजगार सृजन और शेयरधारकों की संपत्ति बढ़ाने में भी सहायक होती है और विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा उठाए गए इन ताजा कदमों से दोनों देशों की साझा आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को कोई बढ़ावा नहीं मिला है।
निलंबित कंपनियों की सूची और अमेरिकी प्रशासन के आरोप
अमेरिकी श्रम विभाग ने जिन 8 प्रमुख कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया है, उनमें माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने इस कार्रवाई के पीछे के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2009 से अकेले इन कंपनियों ने ही लगभग 3000000 विदेशी कामगारों की मांग की है। इस अवधि के दौरान, उन्हें 230000 से अधिक H-1B वीजा स्वीकृतियां और 100000 से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणपत्र (PERM) प्राप्त हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि इन कंपनियों ने रोजगार-आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम का दुरुपयोग किया है और अमेरिकी श्रमिकों के स्थान पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया है, जिससे स्थानीय कामगारों के लिए नौकरियों के अवसर कम हुए हैं।
क्या है PERM नियम और इसकी प्रक्रिया?
PERM (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक अमेरिकी नियोक्ता किसी विदेशी कर्मचारी को ग्रीन कार्ड के लिए प्रायोजित कर सकता है। इस प्रक्रिया के तहत, अमेरिकी श्रम विभाग को यह प्रमाणित करना होता है कि उस विशिष्ट पद के लिए पर्याप्त योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। साथ ही, विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से समान पद पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कार्य स्थितियों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। वर्तमान में चल रही जांचों के आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने इन कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिसके कारण यह निलंबन लागू किया गया है।
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