UPI फ्रॉड पर लगाम: संदिग्ध पेमेंट से पहले दिखेगा YES NO अलर्ट, बैंकों का नया प्लान

यूपीआई फ्रॉड रोकने के लिए बैंकों ने संदिग्ध लेनदेन से पहले YES NO अलर्ट का प्रस्ताव दिया है। जानें कैसे काम करेगा यह नया सुरक्षा मॉडल और आरबीआई की योजना।

Aug 3, 2026 - 12:35
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UPI फ्रॉड पर लगाम: संदिग्ध पेमेंट से पहले दिखेगा YES NO अलर्ट, बैंकों का नया प्लान

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई के जरिए रोजाना अरबों रुपये का डिजिटल लेन-देन हो रहा है। लेकिन इस सफलता के साथ ही ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड और फर्जी रिफंड जैसे मामलों में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई है और इस डिजिटल पेमेंट फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए भारतीय बैंकों ने नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने एक नया सुरक्षा मॉडल प्रस्तावित किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध या हाई-रिस्क यूपीआई ट्रांसफर को प्रोसेस करने से पहले यूजर को सचेत करना है। इसके तहत यूजर की स्क्रीन पर एक ‘YES/NO’ यानी ‘हां/नहीं’ का कंफर्मेशन प्रॉम्प्ट या पॉप-अप अलर्ट दिखाया जाएगा।

फ्रॉड रोकने का नया सुरक्षा मॉडल

प्रमुख भारतीय बैंक ऑनलाइन पेमेंट में धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बड़े सॉफ्टवेयर बदलाव का सुझाव दे रहे हैं। इस प्रस्तावित योजना के अनुसार, पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन में पैसे पाने वाले के अकाउंट में जमा होने से पहले भुगतान करने वाले व्यक्ति से अंतिम मंजूरी मांगी जाएगी। इस सिस्टम में तीन स्थितियां होंगी। यदि ग्राहक स्क्रीन पर दिखने वाले अलर्ट पर ‘हां’ कहता है, तो पेमेंट कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाएगा। यदि वह ‘नहीं’ का विकल्प चुनता है, तो ट्रांजैक्शन तुरंत कैंसल कर दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि ग्राहक कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो पैसे ट्रांसफर तो होंगे लेकिन पाने वाले के अकाउंट में एक घंटे की देरी के बाद जमा होंगे। इसे ‘लैग्ड क्रेडिट’ कहा जाता है।

आरबीआई के सुझाव और बैंकों की चिंता

यह प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए एक डिस्कशन पेपर के जवाब में दिया गया है। आरबीआई ने बैंकों से फर्जी कॉल, जबरदस्ती और डीप-फेक के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकने के उपायों पर राय मांगी थी। आरबीआई ने सुझाव दिया था कि 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन में तुरंत क्रेडिट के बजाय कुछ समय की देरी की जाए। हालांकि, बैंकों को डर है कि हर बड़े पेमेंट में एक घंटे की देरी करने से डिजिटल पेमेंट की रफ्तार धीमी हो सकती है और लोग फिर से कैश ट्रांजैक्शन की ओर मुड़ सकते हैं। इसीलिए बैंकों ने ‘YES/NO’ प्रॉम्प्ट का विकल्प पेश किया है, ताकि केवल संदिग्ध मामलों में ही रुकावट आए और सामान्य लेनदेन सुचारू रूप से चलते रहें।

किन ट्रांजैक्शन पर दिखेगा अलर्ट

बैंकों का सुझाव है कि यह अलर्ट हर 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर नहीं दिखना चाहिए। इसके बजाय, यह केवल उन पेमेंट कमांड्स के लिए दिखना चाहिए जिनमें कोई असामान्य व्यवहार नजर आए और उदाहरण के लिए, यदि कोई ट्रांजैक्शन रात के 2 बजे किया जा रहा है, या किसी ऐसे व्यक्ति को पैसे भेजे जा रहे हैं जिसके साथ ग्राहक ने पहले कभी लेनदेन नहीं किया है, तो यह अलर्ट सक्रिय हो जाएगा। इसके अलावा, हाल ही में खुले बैंक अकाउंट्स में किए जाने वाले पेमेंट पर भी यह प्रॉम्प्ट दिखेगा, क्योंकि ऐसे अकाउंट्स का इस्तेमाल अक्सर ‘मनी म्यूल’ के रूप में किया जाता है। कुछ बैंकों ने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में इस सीमा को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये या 25,000 रुपये किया जा सकता है।

डिजिटल फ्रॉड के आंकड़े और चुनौतियां

देश में यूपीआई के जरिए हर महीने 23 अरब 66 करोड़ ट्रांजैक्शन होते हैं। हालांकि 10,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल संख्या का केवल 2 प्रतिशत ही हैं, लेकिन इनकी कुल संख्या काफी बड़ी है। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर फ्रॉड ‘ऑथराइज्ड पुश-पेमेंट’ के जरिए होते हैं, जहां पीड़ित धोखे में आकर खुद ट्रांजैक्शन को मंजूरी दे देते हैं। आरबीआई इस मुद्दे पर काफी गंभीर है और जल्द ही नई गाइडलाइंस ला सकता है। एनपीसीआई ने भी देरी से क्रेडिट होने वाले सिस्टम पर अपनी चिंता जताई है, क्योंकि उनका मानना है कि भारत को दूसरे देशों के सिस्टम की नकल करने के बजाय अपने यूजर एक्सपीरियंस को बरकरार रखना चाहिए।

बढ़ते फ्रॉड और मर्चेंट पेमेंट पर असर

आंकड़ों के अनुसार, रिपोर्ट किए गए डिजिटल फ्रॉड की संख्या साल 2021 में 2 लाख 60 हजार से बढ़कर साल 2025 में 28 लाख तक पहुंच गई है। इसी अवधि के दौरान फ्रॉड की कुल वैल्यू 551 करोड़ रुपये से बढ़कर 22,931 करोड़ रुपये हो गई है। प्रस्तावित एहतियाती कदम फिलहाल केवल P2P ट्रांजैक्शन तक ही सीमित हैं और मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर लागू नहीं होंगे। हालांकि, कई छोटे व्यापारी अपने सेविंग्स अकाउंट से जुड़े क्यूआर कोड का उपयोग करते हैं, जो तकनीकी रूप से P2P श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन पर इसका कुछ असर पड़ सकता है। बैंकों का मानना है कि यह नया सिस्टम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगा और ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखेगा।

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