अभिजीत दिपके आशुतोष रांका और सौरव दास सशर्त रिहा अगले 1 साल तक शांति बनाए रखने का निर्देश

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 1 साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया। सुप्रीम कोर्ट आज पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई करेगा।

Oct 11, 2026 - 14:35
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अभिजीत दिपके आशुतोष रांका और सौरव दास सशर्त रिहा अगले 1 साल तक शांति बनाए रखने का निर्देश

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं की रिहाई की खबर सामने आई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया है। हालांकि, यह रिहाई पूरी तरह से बिना शर्त नहीं है। प्रशासन ने इन नेताओं के सामने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है, जिसके तहत उन्हें अगले 1 साल तक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल होने से बचना होगा जिससे समाज में शांति और अमन-चैन भंग होने की आशंका हो।

रिहाई की शर्तें और कानूनी प्रक्रिया

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए जो कानूनी ढांचा तैयार किया गया है, वह शांति व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है। शर्त के अनुसार, वे अगले 1 साल तक किसी भी ऐसी गतिविधि का हिस्सा नहीं बनेंगे जो सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती हो। आज इन तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां इस शर्त पर सहमति बनी। इस दौरान पुलिस स्टेशन परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपनी रिहाई के बाद घोषणा की है कि वे आज दोपहर 2 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें वे अपनी हिरासत और पार्टी की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

शनिवार को एयरपोर्ट पर हुई थी हिरासत

इन तीनों नेताओं की मुश्किलों की शुरुआत शनिवार को हुई थी जब उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरते ही हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस की इस कार्रवाई की जानकारी सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने साझा की थी। रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि उन्हें दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने सुबह ही इस संबंध में सूचित किया था कि अभिजीत, आशुतोष और सौरव को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। रत्ना सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की लीगल हेड होने के नाते वे और अन्य वकीलों की टीम पुलिस स्टेशन में मौजूद रहकर कानूनी प्रक्रिया की निगरानी कर रही थी।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन का कारण

शनिवार को दिल्ली पुलिस ने एक बड़े विरोध प्रदर्शन को विफल करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के दौरान 1000 से भी अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। हिरासत में लिए गए लोगों में न केवल सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके शामिल थे, बल्कि चार पूर्व मुख्यमंत्री और प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिया था। यह पूरा विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष संशोधन यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में आज होगी विशेष सुनवाई

इस पूरे मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है और मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट आज उन दो महत्वपूर्ण याचिकाओं पर विशेष सुनवाई करने जा रहा है जो शनिवार को दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों से संबंधित हैं और इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच करेगी। पहली याचिका में सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है, क्योंकि आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह नहीं रोका जाना चाहिए, अधिकारियों ने दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियां जारी रखीं और वहीं दूसरी याचिका एक 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका है, जिसमें विपक्षी नेताओं, वकीलों और पत्रकारों की प्रिवेंटिव डिटेंशन को चुनौती देते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की गई है।

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