अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 9 जुलाई को होगा, मौत के 4 महीने बाद दी जाएगी विदाई
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 9 जुलाई को मशहद में होगा। फरवरी में अमेरिकी हमले में उनकी मौत के 132 दिन बाद यह कार्यक्रम हो रहा है।
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मृत्यु के लगभग चार महीने बाद आयोजित किया जा रहा है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, खामेनेई को 9 जुलाई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह कार्यक्रम उनकी मृत्यु के 132 दिन बाद हो रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई की मृत्यु फरवरी में ईरान पर हुए इजराइली और अमेरिकी हमलों के दौरान हुई थी। उनकी मृत्यु के साथ ही ईरान में तीन दशकों से अधिक समय से चले आ रहे उनके नेतृत्व का अंत हो गया था। हालांकि, सुरक्षा कारणों और युद्ध की स्थिति के चलते उनके अंतिम संस्कार में अब तक देरी होती रही है, लेकिन अब ईरान ने जुलाई में इस कार्यक्रम को संपन्न करने की तिथि निर्धारित कर दी है।
अंतिम संस्कार का विस्तृत कार्यक्रम
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होगी। तेहरान में तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह के बाद, 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में एक और बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात, 9 जुलाई को उन्हें उनके गृहनगर मशहद में दफनाया जाएगा। तेहरान के अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि इस पूरे कार्यक्रम में लगभग 20 मिलियन लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार इस पूरी प्रक्रिया का समापन होगा, जहां लाखों की संख्या में लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे।
देरी के पीछे के मुख्य कारण
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को एक अमेरिकी हमले में हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद से ही उनके अंतिम संस्कार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। मूल रूप से यह कार्यक्रम मार्च में होना तय था, लेकिन क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। इसके अलावा, उनके अवशेषों की स्थिति और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सत्ता के हस्तांतरण को लेकर महीनों तक चली अटकलों ने भी इस प्रक्रिया में देरी की। तीन दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद, उत्तराधिकार की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी समय की आवश्यकता थी।
मुहर्रम और धार्मिक मान्यताओं का महत्व
अंतिम संस्कार की तिथि को आगे बढ़ाने में धार्मिक कैलेंडर की भी बड़ी भूमिका रही है। ईरान ने पहले मुहर्रम की शुरुआत में इस कार्यक्रम को करने की योजना बनाई थी, जो जून की शुरुआत में था। हालांकि, मेयर अलीरेजा जकानी ने एक बयान में स्पष्ट किया कि समारोह को मुहर्रम के पहले 10 दिनों के बाद तक के लिए टाल दिया गया है। इसका उद्देश्य यह था कि लोग इमाम हुसैन के लिए अपना वार्षिक शोक निर्बाध रूप से पूरा कर सकें। इमाम हुसैन 680 CE में कर्बला की लड़ाई में शहीद हुए थे और शिया समुदाय के लिए उनका शोक अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कारण अब यह कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
अमेरिकी और इजराइली हमलों का संदर्भ
खामेनेई की मृत्यु का कारण फरवरी में हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों को बताया गया है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों के बाद से ही ईरान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। 28 फरवरी से लेकर 9 जुलाई तक का 132 दिनों का समय ईरान के इतिहास में एक बड़े बदलाव का गवाह रहा है। अब जब अंतिम संस्कार की तारीखें तय हो गई हैं, तो पूरे देश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और तेहरान, कोम और मशहद जैसे शहरों में होने वाले इन कार्यक्रमों में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
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