आशीष बनर्जी की मौत पर ममता बनर्जी ने जताया दुख, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने दिए जांच के आदेश
रामपुरहाट में टीएमसी नेता आशीष बनर्जी का शव मिला। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने धमकी की जांच का वादा किया, जबकि ममता बनर्जी ने मानसिक तनाव को वजह बताया।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी की अचानक और दुखद मौत ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शोक और सनसनी फैला दी है और रविवार की सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में लटका हुआ पाया गया। इस घटना के बाद से ही राज्य की राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। हालांकि, उनकी मौत के पीछे की असली वजह अभी भी एक पहेली बनी हुई है और इस बात को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या किसी बाहरी दबाव या धमकी ने उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिया जांच का भरोसा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आशीष बनर्जी की आत्महत्या के मामले की पूरी गहराई से जांच सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जांच का एक मुख्य पहलू यह होगा कि क्या पूर्व डिप्टी स्पीकर को किसी प्रकार की धमकी दी गई थी। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी नेता की मौत के कुछ घंटों बाद कहा कि अगर यह पाया जाता है कि किसी ने उन्हें धमकी दी थी, तो उस पर कड़ी जांच और कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वे इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं हैं और सच्चाई को सामने लाना चाहते हैं।
ममता बनर्जी ने जताया गहरा दुख और मानसिक तनाव का किया जिक्र
दूसरी ओर, बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए आशीष बनर्जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आशीष बनर्जी के जाने से उन्हें बहुत बड़ी व्यक्तिगत क्षति हुई है और उनकी कमी हमेशा खलेगी। ममता बनर्जी ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय समाज को शिक्षित करने और पूरी लगन से लोगों की सेवा करने में बिताया। वे हमेशा अपने विनम्र स्वभाव और रामपुरहाट तथा बीरभूम के लोगों के साथ अपने करीबी रिश्तों के लिए जाने जाते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस दुखद घटना को जो बात और भी दर्दनाक बनाती है, वह यह है कि अपने आखिरी दिनों में उन्हें बहुत ज्यादा मानसिक और भावनात्मक तनाव का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक दुश्मनी की मानवीय कीमत पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी के राजनीतिक करियर और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पांच बार के विधायक, पूर्व डिप्टी स्पीकर और चेयरमैन के तौर पर आशीष दा ने रामपुरहाट के विकास के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने जनता के लिए कई महत्वपूर्ण और जरूरी काम किए और इसके बावजूद, उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करने के बजाय, उन्हें बार-बार बदनाम करने की कोशिश की गई। उन पर झूठे आरोप लगाए गए और उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की सेवा के इतने लंबे रिकॉर्ड के बावजूद उन्हें जिस परेशानी का सामना करना पड़ा, वह हम सभी को राजनीतिक दुश्मनी की मानवीय कीमत के बारे में सोचने पर मजबूर करती है।
कुणाल घोष ने सुसाइड नोट और सामाजिक बदनामी का किया दावा
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने दावा किया कि आशीष बनर्जी ने एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर बन रहे मानसिक दबाव और सामाजिक बदनामी के डर का स्पष्ट जिक्र किया है। घोष ने इस मौत को राज्य के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने की कोशिश की और कहा कि आशीष बनर्जी समाज में बदनामी के डर से पैदा हो रहे मानसिक दबाव को झेल नहीं पा रहे थे। उन्होंने कहा कि एक अच्छा तृणमूल कार्यकर्ता होने के बावजूद वह इस दबाव के आगे टिक नहीं सके और घोष ने इस पूरी स्थिति के लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराया और मांग की कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों का पता चल सके।
बीजेपी विधायक ध्रुब साहा ने भी की जांच की मांग
हैरानी की बात यह है कि बीजेपी विधायक ध्रुब साहा ने भी आशीष बनर्जी की मौत पर दुख जताया और जांच की मांग का समर्थन किया। ध्रुब साहा वही नेता हैं जिन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में रामपुरहाट सीट से आशीष बनर्जी को लगभग 24000 वोटों के अंतर से हराया था। साहा ने कहा कि वह कुछ दिन पहले ही बनर्जी से मिले थे और उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि पांच बार के विधायक रहे व्यक्ति ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस उम्र में और इतने अनुभव के बाद उन्होंने ऐसा क्यों किया और साहा ने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो, तो इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र या दूसरी एजेंसी से करवानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसके पीछे कोई और गहरी साजिश या वजह तो नहीं है।
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