वायु सेना प्रमुख एपी सिंह का बयान: अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं, पाकिस्तान के 5th जेनरेशन जेट पर दी प्रतिक्रिया
वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने ड्रोन फोर्स की संभावनाओं को खारिज किया और पाकिस्तान के 5वीं पीढ़ी के विमानों पर भारत की रणनीति साझा की।
भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने दिल्ली में 94वें वायु सेना दिवस के अवसर पर आयोजित अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने न केवल भविष्य की युद्ध रणनीतियों और तकनीकी विकास पर बात की, बल्कि व्यक्तिगत वीरता के उदाहरणों को भी रेखांकित किया जो विमानन जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। वायु सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में हथियारों का अलग-अलग होना नहीं, बल्कि उनका एक साथ मिलकर काम करना ही सफलता की कुंजी है।
कैप्टन स्मित मच्छर की असाधारण बहादुरी की सराहना
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को कैप्टन स्मित मच्छर की जमकर तारीफ की। उन्होंने दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में हाल ही में हुए एक हवाई आतंकी हमले के दौरान कैप्टन मच्छर द्वारा दिखाई गई असाधारण बहादुरी और सूझबूझ की सराहना की। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि पायलट की शारीरिक और मानसिक दृढ़ता पूरी एविएशन कम्युनिटी के लिए एक बड़ा सबक है। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा, "उन्होंने जो किया है, वह असाधारण रूप से बहादुरी भरा काम है। उन्होंने जबरदस्त शारीरिक और मानसिक दृढ़ता दिखाई। " यह सम्मान इस बात को पुख्ता करता है कि आसमान में आने वाले किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तकनीक के साथ-साथ मानवीय साहस और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता कितनी अनिवार्य है।
ड्रोन फोर्स की संभावनाओं पर विराम
देश में एक अलग ड्रोन फोर्स बनाने की चल रही चर्चाओं और संभावनाओं को वायु सेना प्रमुख ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रोन वायु सेना के लिए 'क्रांतिकारी' नहीं बल्कि 'विकासवादी' कदम हैं। उनके अनुसार, बिना पायलट वाले सिस्टम और 'लोइटरिंग म्यूनिशन' तब अधिक प्रभावी साबित होते हैं जब उन्हें अन्य हथियारों और प्लेटफॉर्म के साथ जोड़कर इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय वायु सेना के पास ड्रोन की क्षमताएं पिछले कई दशकों से मौजूद हैं और अब केवल उनकी संख्या, प्रकार और मारक क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
एपी सिंह ने स्पष्ट किया कि भारतीय वायु सेना के लिए ड्रोन एक क्रमिक विकास का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, "हम ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की संख्या बढ़ा रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें किसी अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत है और " उन्होंने युद्ध के मैदान में वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए अलग-अलग हथियार प्रणालियों के बीच तालमेल बिठाकर ऑपरेशन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि एक प्रकार का हथियार अलग और दूसरा अलग तरीके से काम नहीं कर सकता, बल्कि उन्हें एक एकीकृत शक्ति के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि वायु सेना के पास पहले से ही ऐसी यूनिट्स हैं जो इन क्षमताओं को संभाल रही हैं और जरूरत पड़ने पर इनका विस्तार किया जा सकता है।
पाकिस्तान के 5वीं पीढ़ी के जेट और भारत की तैयारी
चीन से 5वीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट प्राप्त करने और अपने पायलटों को प्रशिक्षित करने के पाकिस्तान के हालिया कदमों पर भी वायु सेना प्रमुख ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन यह इतनी बड़ी चिंता नहीं है कि इससे घबराया जाए। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास पहले भी हवाई शक्ति थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनका जो हश्र हुआ वह सबके सामने है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल विमान होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हथियारों का सही एकीकरण (इंटीग्रेशन) सबसे जरूरी है।
भारत की अपनी तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि 5वीं पीढ़ी के विमानों के लिए हमारा स्वदेशी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोग्राम तेजी से चल रहा है। हालांकि, उन्होंने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी कहा कि अगर इस प्रोग्राम में किसी कारणवश देरी होती है, तो भारत को अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कहीं और से यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेने होंगे। यह बयान भारत की रक्षा तैयारियों में किसी भी प्रकार के समझौते न करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय वायु सेना हमेशा किसी भी चुनौती के लिए तैयार रहे।
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